रोमियों 13:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्‍वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिए हुए नहीं और परमेश्‍वर का सेवक है*; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करनेवाले को दण्ड दे।

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रोमियों 13:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 13:4 का अर्थ एक समग्र दृष्टिकोण

इस पद का केंद्र भाव है: सरकार और कानून-व्यवस्था परमेश्वर की व्यवस्था का साधन हैं; जो उनका सही पालन करे, उसे भलाई और सुरक्षा मिलती है; जो दुष्कर्म करे, उसे दण्ड भी प्राप्त होता है।

पृष्टभूमि और संदर्भ

रोमियों की पत्रीश में पौलुस रोम की नयी सृष्टि की समस्या को स्पष्ट करते हैं: नागरिक न्याय, सामाजिक व्यवस्था और प्रेम की गई भूमिका। इस संदर्भ में “न्यायिक सत्ता” से उनका आशय वह व्यवस्था है जो समुदाय की शांति बनाए रखे, अपराध पर नियंत्रण रखे और न्याय दिलाए। यहाँ कहा गया है कि सरकार तेरे वंदनीय सेवक के रूप में, परमेश्वर की धारा के भीतर, बुरे कर्म करने वालों को दंडित करने के लिए नियुक्त है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • सेवक के रूप में अधिकारी: शासक को पे्ररित करने वाला उद्देश्य है कि समाज सुरक्षित रहे; यह सत्ता प्रतिष्ठान का दायित्व है—न्याय देना, दंड देना और व्यवस्था बनाए रखना।
  • आत्म-संयम और दायित्व: ईमानदार नागरिक के लिए यह प्रेरणा है कि वे कानून के अनुसार चलें, दुष्कर्म से बचें और अपने कर्तव्य निभाएं।
  • दण्ड और चेतावनी: अगर कोई बुराई करे, तो वह कानून के अनुसार परिणाम भुगते; परमेश्वर ने सत्ता को यह कर्तव्य दिया है।

2-3 प्रमुख क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप प्रभाव

  • — राज्य ऊपर से मान्यता प्राप्त है; शासन के नियम परमेश्वर के आदेश के अधीन होते हैं; यह राष्ट्रीय कानून के सम्मान की नींव देता है।
  • — प्रभु के अनुयायियों के लिए कानूनों की सम्मान-भावना; समाजिक व्यवस्था के अनुरूप आचरण का महत्त्व बताता है।
  • — प्रभु यीशु के समय में भी सत्ता की सीमा और प्रभु की परम सत्ता दोनों का संतुलन; न्याय-व्यवस्था की भूमिका को नैतिक मानदंडों के साथ जोड़ता है।

हिंदी अनुवाद और उपलब्ध संदर्भों के साथ व्याख्या

यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि सरकार परमेश्वर की सेवक है—यह इसलिए ताकि-good व्यवस्था बनी रहे; परन्तु यदि कार्य गलत हों, तो वह दंड दे। यह बताता है कि नागरिकों के लिए कानून का सम्मान आवश्यक है, क्योंकि अधिकार-व्यवस्था का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा और नैतिक आचरण का संरक्षण है।

थीमेटिक सार

  • सरकार परमेश्वर की व्यवस्था के उपकरण हैं।
  • आचरण और कानून का पालन समुदाय की भलाई है।
  • दुष्कर्म पर दण्ड, जनता को सुरक्षा देता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस पद से प्रेरणा मिलती है कि ईमानदार नागरिक बनें, कानून के अनुसार चलें, और सामाजिक सुरक्षा के लिए शासक के अधिकार और दायित्व के सम्मान को प्राथमिकता दें। यदि आप बुराई करो, तो दण्ड सुनिश्चित है; यदि आप भलाई में रहते हो, तो शांति और व्यवस्था आपके समुदाय में फलती-फूलती है।

नोट्स: ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के विचार (संक्षेप)

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