Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 24:21 — पंथ, भय और सत्य की दिशा
पद में माता-पिता/बच्चे के संबंध के बजाय एक व्यावहारिक चुनौती सामने आती है: अपने उच्च अधिकारों, विशेषकर Yahweh (יהוה) और राजा के भय के साथ संयम रखना और उनसे विरुद्ध बोलने या बलवा करने से बचना। यह शिक्षा नीतिवचन की सामान्य धारा के अनुरूप है, जिसमें प्रवचनों के सम्मान, क्रम और विवेकपूर्ण चेष्टा पर बल दिया गया है। संदिग्ध या उकसाने वाले प्रभाव में पड़कर नीतिगत निर्णय लेने से बचना चाहिए; सत्य के मार्ग पर चलना, पर अधिकारों का सम्मान भी बनाए रखना चाहिए, ताकि परमेश्वर की प्रतिष्ठा बनी रहे।
मुख्य निष्कर्ष
यह वाक्य हमें दो बातें सिखाता है: एक) परमेश्वर और मान्यता प्राप्त सत्ता के प्रति सम्मान बनाए रखना; दो) अन्याय और दबाव से भी विमुख रहकर विवेकपूर्वक निर्णय लेना। किसी भी दबाव में आकर हिंसा या दुरुपयोग की राह पर जाए बिना, न्याय और शान्ति के ढांचे में अपने आचरण को बनाए रखना चाहिए। (1 पतरस 2:17)
मुख्य विषय
관련 पद (cross-references) – संक्षिप्त संकेत
इन संदर्भों के साथ, पाठ यह दिखाता है कि ईमानदार जीवन में सत्ता-प्रभाव के साथ-साथ आचरण का संयम कितना आवश्यक है।
संक्षिप्त विश्लेषण
यद्यपि सत्ता के भय से दूरी बनाना उचित है, राजा और प्रभु के मान-सम्मान की नीति भी महत्वपूर्ण है। नीतिवचन इस संतुलन को सिखाते हैं: सत्य और न्याय के मार्ग पर चलना, दबाव में भी दुष्ट आचरण से बचना। यह जीवन-पथ ब्रह्मांडीय’ordre के अनुरूप है, ताकि लोग और समाज शांति से बढ़ें।
व्यावहारिक विचार
संक्षेप
नीतिवचन 24:21 हमें न केवल autoridad के भय को मानने की प्रेरणा देता है, बल्कि यह सिखाता है कि भय के साथ विवेकपूर्ण आचरण और सत्य की राह पर टिके रहना ही परमेश्वर के साथ एक सही जीवन के लिए मार्ग है।
कथन-उद्धरण नोट: यह Commentary Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डॉ़यमेंट टिप्पणीकारों के सामान्य विचारों से प्रेरित अवधारणाओं को एक समेकित हिंदी सार में प्रस्तुत करता है।