Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 24:1 नीतिवचन 24:2 नीतिवचन 24:3 नीतिवचन 24:4 नीतिवचन 24:5 नीतिवचन 24:6 नीतिवचन 24:7 नीतिवचन 24:8 नीतिवचन 24:9 नीतिवचन 24:10 नीतिवचन 24:11 नीतिवचन 24:12 नीतिवचन 24:13 नीतिवचन 24:14 नीतिवचन 24:15 नीतिवचन 24:16 नीतिवचन 24:17 नीतिवचन 24:18 नीतिवचन 24:19 नीतिवचन 24:20 नीतिवचन 24:21 नीतिवचन 24:22 नीतिवचन 24:23 नीतिवचन 24:24 नीतिवचन 24:25 नीतिवचन 24:26 नीतिवचन 24:27 नीतिवचन 24:28 नीतिवचन 24:29 नीतिवचन 24:30 नीतिवचन 24:31 नीतिवचन 24:32 नीतिवचन 24:33 नीतिवचन 24:34



नीतिवचन 24:11 का सीधा अर्थ
जो मार डाले जाने के लिये घसीटे जाते हैं उन्हें छुड़ा; और जो घात किए जाने को हैं उन्हें रोक।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यि आयत नीतिवचन कीCollected ज्ञान-नीति में आता है जहाँ सावधान बुद्धिमत्ता से न्याय और दयालुता के बीच संतुलन स्पष्ट होता है। यह कहता है कि समाज के भीतर कमजोर और संकट में पड़े लोगों को सुरक्षित और बचाने की जिम्मेदारी नैतिक कर्तव्य है। यदि किसी पर अत्याचार हो रहा हो, तो उसका उद्धार करना और उसे नुकसान से रोकना पुरानी इथिकल परंपरा का हिस्सा है। यह सिर्फ व्यक्तिगत करुणा नहीं; यह समुदाय-निर्माण की एक सामान्य नैतिक बाध्यता भी है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
1) वास्तविक संकट के समय चुप रहने से अपराधी को बढ़ावा मिलता है; साहसपूर्वक intervene करना उद्धार का प्रतीक है।
2) दयालुता और न्याय एक साथ चलते हैं—जहाँ संरक्षण की जरूरत है वहाँ तुरंत कदम उठाने चाहिए।
3) समाज की सुरक्षा व्यक्तिगत आचरण से आरम्भ होती है; हर योग्य व्यक्ति को अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना चाहिए।
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंसेस (संवाद-योग्य उद्धरणों के साथ)
- नीतिवचन 3:27: "जो कुछ तुम के पास हो, उसे उस काम के लिए प्रयोग करो जो उचित हो।" यह दर्शाता है कि सुरक्षित बनाना और बचाना केवल उत्साह नहीं, एक नैतिक दायित्व है।
- यशायाह 1:17: "सीखो न्याय, संभालो धैर्य, सहायता करो विकलांगों को, न्याय करो अनाथों के पक्ष में।" समाज के कमजोरों की रक्षा का व्यापक नूर यहाँ स्पष्ट है।
- सामाजिक न्याय की दृष्टि से - लोकतांत्रिक-नैतिकता का मूल आदर्श: "बचा लेना" और "हानि रोकना" एक साथ चलते हैं।
पृथक अन्युभागी टिप्पणी (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षेप उद्धरण)
Matthew Henry: "In rescuing the endangered, we manifest the justice and mercy that God requires in society."
Albert Barnes: "To intervene for the oppressed is a proof of wisdom that seeks the preservation of life and the maintenance of righteousness."
Adam Clarke: "偈 The duty here urged is the duty of humane resistance to evil, and of aiding the defenseless against oppression."
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस आयत से स्पष्ट संदेश है कि समाज में सुरक्षा वह मानवता की पहचान है जो अपराधी के विरुद्ध खड़े होकर कमजोर को बचाता है। यह केवल व्यक्तिगत सहानुभूति नहीं, बल्कि सक्रिय न्याय और समुदाय-निर्माण का तात्विक नियम है।