Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 53:6 का अर्थ
हम כולם भेड़ों के समान भटक गए थे; प्रत्येक ने अपना मार्ग लिया, पर यहोवा ने हमारे सभी के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया। यह वचनों के भीतर परम-करुणा और प्रत्यक्ष केंद्रबिंदु है: हमारे टकराव, हमारी ग़लतियाँ, और उसकी चुकौती जो एक रक्षक के रूप में सामने आती है।
पश्चिमी संदर्भ-प्रसंग (पृष्ठभूमि)
यशायाह का यह विभाग ईसाई परिप्रेक्ष्य में “कष्ट-योग्य दास” का वर्णन है—एक ऐसा दास जो जनता के पापों के समाधान हेतु अपने कष्टों के माध्यम से उद्धार लाता है। यह पाठ इतिहास-व्यवस्था में בני-अन्तरकथा के समय से लेकर भविष्य के उद्धारकर्ता के प्रतीक के रूप में देखने योग्य है। यहूदी tradition में यह दास सामान्यतः राष्ट्र-यशायह अनुसार समझा गया, पर नयी वाणी में इसे यीशु मसीह के कष्टपूर्ण प्रायश्चित्त के रूप में भी पढ़ा गया।
हिंदी पाठ के अंदरूनी अर्थ
भटकना बताता है कि मानव आत्मा और पन्नी-मानसिकता में एक अलग-थलग रास्ता अपनाते हैं—परिणामस्वरूप परमेश्वर के मार्ग से विचलन। “हम में से हर एक ने अपना मार्ग लिया” से यह स्पष्ट होता है कि यह एक साझा दोष-स्थिति है, न कि केवल एक व्यक्तिगत कमी। “यहोवा ने हम सभी के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” दिखाता है कि उद्धारकर्ता की कुंजी-कार्य परमेश्वर की योजना के अनुरूप है: दोष का बोझ एक जगह, एक व्यक्ति पर रखा गया ताकि सच्चा प्रयोजन पूरा हो सके।
interpretive observations
कथान्तर-संबंधित अंश (cross-references)
प्रेरितों के उपदेश में उद्धारकर्ता के कष्ट-कार्य का उल्लेख मिलता है:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पाप के बोझ के विरुद्ध एक सुरक्षित उद्धार-योजना थी, जिसे नये कराह-समय में पूरा किया गया।
प्राथमिक विचार-चलन (thematic takeaway)
व्यावहारिक अनुप्रयोग
जब हमारी आत्मा अपराध-हावभाव से जूझती है, तो याद रखें कि उद्धार का उपाय मानव-सीमा से बड़ा है। परमेश्वर की करुणा में भरोसा रखें और अपने मार्ग को उसकी आज्ञाओं के अनुसार समायोजित करें। दूसरे लोगों के बोझ को भी सहानुभूति से देखने की प्रेरणा मिले।
संक्षिप्त अध्याय-सार
53:6 में कहाता है कि सभी पाप-भार एक दास के ऊपर लादे गए—जो यहोवा के उद्देश्य के अनुसार स्वीकार कर लिया गया था, ताकि उद्धार संभव हो सके। यह पाठ हमें उद्धारकर्ता की महान करुणा की याद दिलाता है और हमारी राह पर न्याय के साथ दया का संतुलन दिखाता है।