Old Testament
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यशायाह 53:12 — अर्थ और संदर्भ
इस वचन में परमेश्वर का दयालु, बहुधा गुप्त रूप से चलने वाला कल्याण-योजना का चरित्र उभरकर सामने आता है: यह indicating है कि मसीह को मृत्यु के लिए उंडेलना, अपराधियों के साथ गिना जाना, और बहुतों के लिए पाप के बोझ को उठाना—इन सबका लक्ष्य बड़ा है: उसे महिमामय भागीदारी मिलती है और आत्म-त्याग से पहले से निर्धारित उद्धार का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रसंग और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह आयत यशायाह की महान पीड़ा-उद्धार योजना की एक केंद्रीय फिर है। परमेश्वर का सेवक—जो यहाँ sufferer-आकृति में प्रस्तुत है—को taken to be उतार-चढ़ावों के बीच मृत्यु तक उठना पड़ता है ताकि भविष्य में अविराम उद्धार संभव हो सके। यह पंक्ति, जो “बहुं के लिए प्रायश्चित्त” के रूप में परिचित है, पूर्वसूचना देती है कि दोषी मानवता के लिए दया का मार्ग कैसे खोला जाएगा—खासकर क्रूस के माध्यम से।
Interpretive observations
अनुश्रवणात्मक विचार
यह भविष्यवाणी क्रूस पर पूरे विश्व-आकार के उद्धार को संकेत करती है: भगवान के पवित्र दत्तक का बलिदान, और उसके द्वारा पाप के गहरे बंधन से मुक्ति की मांग। यह यथार्थ हमारे लिये प्रेरणा है कि सेवा और प्रेम में जीवन के अर्थ को कैसे पाया जा सकता है।
2–3 सुसंगत क्रॉस-व संदर्भ
ठोस निष्कर्ष और व्यवहारिक अनुप्रयोग
यशायाह 53:12 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना में लघु-जीवन नहीं, बल्कि अत्यंत विनम्र और बलिदानी प्रेम है। हमारी प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए कि हम भी ईश्वर के सेवक बने रहें, दूसरों के लिए प्रायश्चित-सहायता बनें, और अपराध के भार से मुक्त होने के लिए यीशु के उद्धार को अपने जीवन में स्वीकार करें।
कमेंटरी से मुख्य उद्धरण (संक्षेप)
मार्था हेन्री, अलबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क—इनमें से कुछ अनुभवी विचारधाराओं के सारग्रहण से यह स्पष्ट होता है कि सेवक का बलिदान; मृत्यु के लिए उसे उंडेलना; और बहुं के पाप का बोझ उठाने जैसी बातें एक गहरे मनोवैज्ञानिक-आध्यात्मिक परिवर्तन को प्रेरित करती हैं।
उद्धरण के लिए संक्षेप: ‘‘वह बहुं के लिए प्रायश्चित्त बना; कारण वह अपने प्राण मृत्यु के लिए देगा; अपराधियों के साथ गिना गया; और उसने बहुतों के पाप का बोझ उठा लिया।’’