यशायाह 25:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, तू मेरा परमेश्‍वर है; मैं तुझे सराहूँगा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा; क्योंकि तूने आश्चर्यकर्मों किए हैं, तूने प्राचीनकाल से पूरी सच्चाई के साथ युक्तियाँ की हैं।

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यशायाह 25:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 25:1 पर टिप्पणी — एक परमेश्वर-यज्ञ की महिमा

वह पवित्रता और साहस का मिला-जुला संदेश है जो परमेश्वर के अद्भुत कार्यों को प्रणाम करने को प्रेरित करता है। इस पद में यशायाह भगवान के बारे में उसकी महानता और उसकी योजनाओं की विश्वसनीयता को केंद्र में रखते हैं। यह अत्यंत प्रत्यक्ष है: प्रभु का नाम, उसकी प्रामाणिकता, और उसकी चमत्कारिक राहें—यही विश्वास की आधारशिला बनती हैं।

पद का पाठीनुकरण (पद-विन्यास)

हे यहोवा, तू मेरा परमेश्‍वर है; मैं तुझे सराहूँगा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूँगा; क्योंकि तूने आश्चर्यकर्मों किए हैं, तूने प्राचीनकाल से पूरी सच्चाई के साथ युक्तियाँ की हैं।

पाठ के भीतर विचार

यह वाक्य एक गहरे विश्वासी का ईश्वर के प्रति समर्पित रवैया प्रस्तुत करता है। तीन प्रमुख धारणाएं उभरती हैं:

  • परमेश्वर के नाम का सम्मान: प्रभु को “मेरा परमेश्वर” कहकर, द piccolo, एक व्यक्तिगत संबंध का संकेत है।
  • आत्मिक कृतज्ञता: “सराहूँगा” और “धन्यवाद करूँगा” से विश्वास-जीवन की निरंतर gratefulness दिखती है—कठिन समय में भी ईश्वर के गुणों की स्मृति बनी रहती है।
  • यथार्थ चमत्कार और शुद्ध सत्य: “आश्चर्यकर्मों किए हैं” और “युक्तियाँ की हैं” से प्रभु की बन्धनमुक्त योजनाओं पर विश्वास पक्का होता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

संक्षेप में कहा जाए, ईश्वर अपने आप में अत्यंत विश्वसनीय और पुरातन सत्य से परिपूर्ण हैं। उनकी योजनाएं वर्षों से चली आ रही हैं और वे जब-तब चमत्कारिक रूप से सिद्ध होती हैं। इस पद के अनुसार जीवन में सच्चे आराधन का आधार ईश्वर के गुण, उसकी नाम-युग्मता और उसकी ओर से मिलने वाला उद्धार है।

अन्य बाइबिल संदर्भों से तुलना

1) दानियेल 4:34–35 जैसी अभिव्यक्तियाँ भी ईश्वर की पुष्टि और उसकी सामर्थ्य पर अडिग विश्वास दिखाती हैं कि यहोवा ही सब कुछ नियंत्रित करते हैं।

2) भजन 100:4-5 में कहा गया है कि हमenter प्रभुकरण और नाम-शक्यता से प्रवेश करते हैं; उसकी सदा-सदा की कृपा और सत्य का स्मरण करना आवश्यक है।

3) मरकुस 2:5–12 जैसे चमत्कारों के साक्ष्य, जहां यीशु ने आत्मीय विश्वास के कारण चमत्कार किए, यह पाठ भी यह दर्शाता है कि परमेश्वर की योजनाओं में चमत्कारिक इतिहास प्रकट होता है।

व्यावहारिक आवेदन

  • परमेश्वर के नाम के प्रति कृतज्ञ रहें: हर दिन उसकी उपस्थिति और कृपा पर विचार करें।
  • चमत्कारिक ढंग से नहीं तो भी, उसकी पक्की सच्चाई पर विश्वास बनाए रखें—भरोसा उस शक्ति का प्रतीक है जो अतीत में काम करती रही है और भविष्य में करेगी।
  • संघर्ष के समय में स्मरण करें कि प्रभु ने पुरानी सच्चाई के साथ राह बनाई है; ऐसा विश्वास हमें धैर्य और आशा देता है।

क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त स्पष्टीकरण

• भजन 33:6–9 — ईश्वर की शब्द-शक्ति से सृष्टि बनती है; यह verse इस बात का समर्थन करता है कि भगवान के चमत्कार उसकी सच्चाई के परिणाम हैं।

• यशायाह 46:9–10 — पूर्वस्थापित योजना और उसकी पूर्णता पर जोर; यह दिखाता है कि परमेश्वर पुराने से नया तक अपनी सच्चाई को निभाते हैं।

• मरकुस 10:27 — मनुष्य के लिए असंभव वह परमेश्वर के लिए संभव है; यह verse इस पाठ की आश्वस्तता को पोषित करता है कि चमत्कार और सिद्धान्त एक ही स्रोत से आते हैं।

संक्षेप में

यशायाह 25:1 एक पवित्र-आश्वासन है कि परमेश्वर स्वयं अपने कामों के लिए केंद्रित है—उसकी महानता, सच्चाई, और चमत्कारिक मार्ग चुन-चुनकर दिखाते हैं कि वह हमारा ईश्वर है। इस संदेश का सार यह है कि हमारा आशीर्वाद और धन्यवाद उसकी मर्जी, उसकी योजनाओं और उसकी नित्यता के प्रति श्रद्धा में फंसा रहना चाहिए।

नोट: नीचे उद्धृत पदों से प्रेरणा लेते हुए हमने प्राथमिक विचारों को सरल, व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 25:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परमेश्‍वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उसे पूरा न करे? (रोम. 9:6-2, तीमु. 2:13)

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हे यहोवा, तू मेरा परमेश्‍वर है, मैं तेरा धन्यवाद करूँगा; तू मेरा परमेश्‍वर है, मैं तुझको सराहूँगा।

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यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है*, और वही मेरा उद्धार भी ठहरा है; मेरा परमेश्‍वर वही है, मैं उसी की स्तुति करूँगा, (मैं उसके लिये निवास-स्थान बनाऊँगा), मेरे पूर्वजों का परमेश्‍वर वही है, मैं उसको सराहूँगा।

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