यशायाह 8:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वह शरणस्थान होगा*, परन्तु इस्राएल के दोनों घरानों के लिये ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान, और यरूशलेम के निवासियों के लिये फंदा और जाल होगा। (रोम. 9:32,33)

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यशायाह 8:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 8:14 का अर्थ और संदर्भ

सीधे शब्दों में कहें तो परमेश्वर यीशु के आने से पहले इस्राइल के लिए एक शरणस्थल बनने के बजाय, उनके लिए ठोकर का पत्थर और जाल बन जाएगा। यह वाक्य यह दर्शाता है कि अलौकिक गवाही और न्याय के लिए ईश्वर के मार्ग का चयन गलत के बजाय सही दिशा में न हो तो उद्धार के मार्ग में बाधा बन सकता है।

पृष्ठभूमिसंContext

यशायाह ने आक्रामक बहिर्गमन और दासता के खतरे के बीच इस्राइल के लिए एक चेतावनीपूर्ण संदेश अच्छा-खासा दिया। 8:14 में यह ठहराव यह बताता है कि कुछ लोगों के लिए परमेश्वर का सम्मान और शरण इसका उलटा प्रत्यक्ष खतरे का कारण बन सकता है—यानी जो लोग उसे refuge मानते हैं, वही गलत निर्णयों के कारण पथभ्रमण में पड़ते हैं। रोम 9:32–33 के संदर्भ में यह उद्धरण ईश्वर के चुनाव, विश्वास और कठिनाई से भरे मार्ग पर दृढ़ता बनाये रखने के विचारों से जुड़ता है।

Interpretive observations

  • येश्वर शरणस्थल के रूप में—किंतु यह शरण उन लोगो के लिए नहीं जो अविश्वास से शासन करते हैं; यह उन के लिए एक ठोकर बन सकता है जो नियमों से नहीं चलते।
  • येरूशलेम के निवासियों के लिए फंदा और जाल होने का आशय यह है कि धार्मिक-आडंबर और विवेकहीन धर्म उनके लिए उद्धार की राह को कठिन कर देता है।
  • यह वाक्य दिखाता है कि चॉइस और हृदय की स्थिति ही मार्ग तय करती है: परमेश्वर की स्तुति या अस्वीकृति—परिणाम दोनों घटनाओं पर निर्भर करते हैं।

संक्षिप्त थीम सूची

  1. परमेश्वर का शरण बनना या ठोकर बनना—हृदय के निर्णय पर निर्भर।
  2. धर्म के बाह्य आडंबर से उद्धार नहीं, आंतरिक विश्वास आवश्यक।
  3. यूरिशलेम और यह्रून के सामाजिक-धार्मिक ढांचे में वास्तविकता बनाम भ्रम का संघर्ष।

अन्य पवित्र ग्रंथ संदर्भ (cross-references)

रोम 9:32–33 के साथ: यह संकेत देता है कि परमेश्वर के धार्मिक चयन और उनके विश्वास के मार्ग में पत्थर-टकराव कैसे आता है; यीशु के उद्धार के मार्ग पर विश्वास का महत्त्व स्पष्ट होता है। यह वचन यह भी दिखाता है कि जब लोग स्वयं के कर्म या परंपराओं को उद्धार के मार्ग के बराबर मानते हैं, तब वे चढ़ाव नहीं चढ़ पाते।

नीतिवचन में ईमानदारी और विश्वास के साथ मानने के फायदे का उल्लेख भी मिलता है—जो ठोस निर्णय बनाकर मार्ग बनाते हैं।

यशायाह 28:16 का संदर्भ भी विचार करें, जहाँ प्रभु एक निश्चित स्टेप के साथ मार्ग बनाते हैं ताकि लोग विश्वास के साथ सम्बद्ध रहें।

प्रसंग-उपयोगी टिप्पणियाँ (प्रायः उद्धरण के साथ)

Matthew Henry की टिप्पणी—“कठिनाई के बीच परमेश्वर अपनी शरण देता है, परन्तु यदि हृदय अविश्वास में डूबा हो, तो वही शरण पत्थर बन जाती है।”

Albert Barnes की टिप्पणी—“यहोवा अपने लोगों के लिए सुरक्षित स्थान बन सकता है, परन्तु इतिहास के चरित्र से यह साफ है कि वे स्वयं अपनी चेष्टा से दबाव बढ़ाते हैं।”

Adam Clarke की टिप्पणी—“यह वचन कृपण मनुष्यों के विरुद्ध चेतावनी है: जो ईश्वर के प्रस्ताव को शरण मानते हैं, परन्तु वास्तविक विश्वास के बिना—वह उद्धार के स्थान के बजाय ठोकर बन जाता है।”

व्यावहारिक takeaway (संक्षेप)

अपने जीवन के चुनावों में परमेश्वर की शरण को सच मानें, किन्तु दिखावटी धर्म या आत्म-आसक्ति से नहीं। विश्वास के साथ आना और ईश्वर के मार्ग पर चलना ही उद्धार की कुंजी है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 8:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 पतरस 2:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और, “ठेस लगने का पत्थर* और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है,” क्योंकि वे तो वचन को न मानकर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे। (1 कुरि. 1:23, यशा. 8:14-15)

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किस लिये? इसलिए कि वे विश्वास से नहीं, परन्तु मानो कर्मों से उसकी खोज करते थे: उन्होंने उस ठोकर के पत्थर पर ठोकर खाई।

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तब शमौन ने उनको आशीष देकर, उसकी माता मरियम से कहा, “देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिसके विरोध में बातें की जाएँगी (यशा. 8:14-15)

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