Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 9:1 रोमियों 9:2 रोमियों 9:3 रोमियों 9:4 रोमियों 9:5 रोमियों 9:6 रोमियों 9:7 रोमियों 9:8 रोमियों 9:9 रोमियों 9:10 रोमियों 9:11 रोमियों 9:12 रोमियों 9:13 रोमियों 9:14 रोमियों 9:15 रोमियों 9:16 रोमियों 9:17 रोमियों 9:18 रोमियों 9:19 रोमियों 9:20 रोमियों 9:21 रोमियों 9:22 रोमियों 9:23 रोमियों 9:24 रोमियों 9:25 रोमियों 9:26 रोमियों 9:27 रोमियों 9:28 रोमियों 9:29 रोमियों 9:30 रोमियों 9:31 रोमियों 9:32 रोमियों 9:33



रोमियों 9:32 — क्या कारण था?
तथ्य यह है कि यह पद रोमियों के पाठ में भगवान के चुनाव और अत्याचार के प्रश्न से जुड़ा है; यहाँ प्रेरित पवित्र उदाहरण के रूप में इस बात को दर्शाते हैं कि इब्राहीम के पुत्रों की एकता में विश्वास से नहीं, बल्कि कर्मों से खोज करने वाले लोग ठोकर खाकर रह जाते हैं। पवित्रशास्त्री स्पष्ट करते हैं कि यह ठहराव उन लोगों के लिए है जो ईमान के बिना, केवल कर्मों की कुंजी से परमेश्वर के पक्ष में प्रयत्न करते हैं।
इस पाठ में परमेश्वर और विश्वास के बारे में जो उजागर होता है
पद बताता है कि भगवान के चयन और उद्धार की योजना मानव कर्म या पूर्वगति से नहीं, बल्कि विश्वास से चलती है। जो लोग मानते हैं, वे भी “तप” में नहीं फँसते; पर जो कर्मों के आधार पर मान लेते हैं, वे वास्तविक विश्वास की बुनियाद नहीं बनाते। यह विश्लेषण दिखाता है कि उद्धार का मार्ग ईमान की आश्रय में है, न कि आत्म-प्रतिष्ठा के कर्म-सोचे-समझे नियमों में।
“किस लिये? इसलिए कि वे विश्वास से नहीं, परन्तु मानो कर्मों से उसकी खोज करते थे” — शब्दों का स्पष्ट अर्थ
यह वाक्य दर्शाता है कि वे लोग परमेश्वर की righteousness को कर्म-प्रधान मानते हैं, ना कि विश्वास के आधार पर मिलती हुई अनुग्रह को। “ठोकर की पत्थर” का चित्रण इस आधार पर है कि ईश्वर की योजना एक ठोस, वास्तविक विश्वास पर टिकती है, न कि मानव के कर्म-उत्साह पर—यानी यीशु मसीह के द्वारा उद्धार का मार्ग, जो हमें विश्वस्त बनाता है, न कि हमारे खुद के कर्म-योग से।
प्रसंग-सम्बन्धी शब्दों की व्याख्या
अनुसंगत पवित्र ग्रंथ
बल्कि Romans 3:28 और Galatians 3:11 दिखाते हैं कि उद्धार विश्वास पर आधारित है, न कि कर्मों पर आधारित। यीशु मसीह में विश्वास से धर्मी ठहरना एक सामान्य धारा है, जो सभी जातियों के लिए समान है। यह संदर्भ बताता है कि कानून के अनुसार प्रमाणित होने वाले कर्म नहीं, बल्कि विश्वास द्वारा उद्धार मिलता है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
हममें से जो धार्मिक परिश्रम करते हैं, उन्हें यह स्मरण रहे कि हमारी पहुँच ईश्वर के अनुग्रह की मांग से अधिक: विश्वास के भीतर स्थायित्व बनाए रखना। किसी भी प्रकार के आत्म-उत्कृष्टि-योग न बनाएँ; बल्कि विश्वास के साथ प्रार्थना, बाइबल-पढ़ाई और समुदाय-जीवन से परमेश्वर के साथ संबंध में रहना उचित है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि उद्धार का केंद्र यीशु मसीह है—हम कर्मों से नहीं, बल्कि ईमान से उसे स्वीकारें, ताकि जीवन में उद्धार के पूर्ण अनुभव हो सके।
छोटा cross-reference
1) रोमियों 3:28 — उद्धार का आधार विश्वास है, कर्म नहीं। व्याख्या सार— विश्वास की भूमिका को स्पष्ट करता है।
2) गलातियों 3:11 — कर्मों के बजाय विश्वास से धर्मी ठहरना। व्याख्या सार— कानून के मान्यता के सामने विश्वास की महत्ता को रेखांकित करता है।
3) यह हीब्रों 11 का विश्वासी-जीवन—आस्था के मार्ग पर स्थिर रहना। व्याख्या सार—उद्धार के रास्ते के सच को इतिहास-उधृत उदाहरणों से संगठित करता है।
उद्धरणीय तत्व (public-domain commentators)
यह मार्ग सीधे-सीधे आधुनिक-निष्कर्ष नहीं, बल्कि पुराने कथनों के साथ समन्वय में प्रस्तुत किया गया है। नीचे केवल संक्षेप उल्लेख सेाना गया है:
Matthew Henry: “Faith is the instrument, not the merit; it lays hold on Christ and receives righteousness.”
Albert Barnes: “The entire argument rests on the principle that God saves by faith, not by works.”
Adam Clarke: “The stumbling is on account of relying on works; faith alone is the divine method.”
नोट: ऊपर के उद्धरण प्रचलित सार्वजनिक-डोमेन व्याख्याओं के मूल स्वर से प्रस्तुत हैं; अधिक विस्तार के लिए इन विद्वानों के व्यापक पाठ देखें।