रोमियों 9:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जैसा लिखा है, “मैंने याकूब से प्रेम किया, परन्तु एसाव को अप्रिय जाना।” (मला. 1:2-3)

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रोमियों 9:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का प्रत्यक्ष सार

रोमियों 9:13 में लिखा है: जैसा लिखा है, “मैंने याकूब से प्रेम किया, परन्तु एसाव को अप्रिय जाना।” यह कथन परमेश्वर की चुनाव-कार्य की एक ठोस व्याख्या है: परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार लोगों के बीच विभाजन और चयन करता है, जो उसकी दया और न्याय दोनों के साथ जुड़ा है। यहां “प्रेम” और “अप्रिय” का प्रयोग व्यक्तिगत भावनात्मक पूर्वाग्रह नहीं, बल्कि ईश्वर की मुक्त-चयन की क्रिया है जिससे धर्म-कार्य और उद्धार का मार्ग प्रकाशित होता है।

पार्श्वभूमि और संदर्भ

रोमियों का पत्र पॉल ने रोम के मसीही समुदाय के मार्गदर्शन के लिए लिखा। chapter 9 ईश्वर की चयन-योजनाओं पर केंद्रित है, विशेषकर यह दिखाने के लिए कि उद्धार केवल कर्मों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ईश्वर की इच्छा और योजना के अनुसार होता है। यहाँिता, “याकूब—एसाव” का उदाहरण प्राचीन संस्‍कार के संदर्भ में प्रयुक्त है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि परमेश्वर अपने किसी उद्देश्य के लिए कब और किसे उठाता है।

व्याख্যমन observer

यहाँ दो मुख्य बिंदु स्पष्ट होते हैं:

  • ईश्वर की चुनाव-स्वतंत्र क्रिया: परमेश्वर अपनी इच्छा से कब किसे आशीष दे, किसे नहीं—यह उसकी योजना का भाग है।
  • न्याय और दया का संतुलन: चयन का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उद्धार-योजना के व्यापक लक्ष्य की ओर ले जाना है—यानी जो दया प्राप्त करता है, वह परमेश्वर की कृपा से है, न कि मानवीय योग्यता से।

संकेतात्मक निष्कर्ष

1) परमेश्वर के चयन के कारण उद्धार की दिशा निर्धारित होती है, न कि मानव योग्यता या पूर्व-पुण्य।

2) यह पाठ परमेश्वर की योजना की महिमा को उजागर करता है, जो अपनी दया के अनुसार लोगों को बुलाता है।

छोटे thematic बिंदु

  1. चयन का अधिकार: ईश्वर के संकल्प के अनुसार कौन-सा मार्ग स्वीकार्य होगा।
  2. दया बनाम क्रिया: दया वह उन्नयन है जो मनुष्य की मान्यता के कारण नहीं; यह ईश्वर की भी अनुकंपा है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में, जोड़)

रोमि. 11:5-7 बताता है कि चयन एक बचाने वाले क्रम में है, न कि पुरुषार्थ के सामने निष्कष। इब्र 11:6 उपदेश में कहा गया है कि परमेश्वर के समीप विश्वास आवश्यक है, अन्यथा यह स्वीकार्य नहीं। मत्ती 22:14 बतौर उदाहरण उद्धार के शामिल होने का द्वार “बहुत लोग होंगे” के विपरीत, चयन की गहराई दिखाता है।

इन संदर्भों का भाव यह है कि उद्धार और प्रतिष्ठा एक रचना-कार्य है जो ईश्वर की इच्छा और विश्वासी की विश्वास-योग्यता के साथ जुड़ा है, न कि मात्र मानवीय मान्यताओं से।

व्यावहारिक निष्कर्ष

- हम यह समझें कि परमेश्वर के चयन से भयभीत या निराश न हों; हमारा उत्तर विश्वास और नम्रता के साथ रहता है।

- दया की चेतना रखें: यदि आप उद्धार के दायरे में हैं, तो यह कृपा के कारण है, न कि अपने दम पर।

नोट: इस पद के लिए मानक पांडुलिपि संदर्भों से संक्षिप्त उद्धरण केवल किसी प्रमुख टिप्पणीकार के शब्दों के भीतर परिमित रूप में उद्धृत हो सकते हैं। नीचे प्रविष्ट कोई भी स्पष्ट शब्द-उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के फलक में सीमित उद्धरण के रूप में दिया गया है:

“First, God’s purpose of mercy rests not on man’s will or exertion, but on God’s mercy.” — Matthew Henry (paraphrased summary)

“God’s election is not a declaration of favour to all, but a designation of particular persons in whom His power and grace will effect salvation.” — Albert Barnes (paraphrased)

“The distinction of Jacob and Esau is not grounded in their works, but in God’s purpose; hence mercy is not of him that wills, but of God who shows mercy.” — Adam Clarke (paraphrased)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 9:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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