Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 9:1 रोमियों 9:2 रोमियों 9:3 रोमियों 9:4 रोमियों 9:5 रोमियों 9:6 रोमियों 9:7 रोमियों 9:8 रोमियों 9:9 रोमियों 9:10 रोमियों 9:11 रोमियों 9:12 रोमियों 9:13 रोमियों 9:14 रोमियों 9:15 रोमियों 9:16 रोमियों 9:17 रोमियों 9:18 रोमियों 9:19 रोमियों 9:20 रोमियों 9:21 रोमियों 9:22 रोमियों 9:23 रोमियों 9:24 रोमियों 9:25 रोमियों 9:26 रोमियों 9:27 रोमियों 9:28 रोमियों 9:29 रोमियों 9:30 रोमियों 9:31 रोमियों 9:32 रोमियों 9:33



रोमियों 9:33 पर टिप्पणी (HINIRV)
पैराग्राफिक संदर्भ: रोमियों के पाठ में पवित्रशास्त्री पॉल यह बता रहे हैं कि इस्रायल के कई लोग परमेश्वर के उद्धार-योजन को स्वीकार नहीं करते, फिर भी परमेश्वर की योजना न्यायसंगत और पूर्ण है। वह उद्धार उन लोगों के लिए खुला है जो प्रभु यीशु के सामने मान, विश्वास और निर्भयता के साथ आते हैं। उद्धार का एक ठोस आधार, पथ पर एक ठेस है जो आत्म-आनन्द या मानव-उच्च सोच के कारण नहीं गिरता, बल्कि यह एक चेतावनी के रूप में है कि विश्वास के बिना उद्धार संभव नहीं। इस वचन में यशायाह 28:16 के साथ एक सामान्य ईश्वर-उद्धार की योजना स्थापित है।
मुख्य अर्थ
“देखो मैं सिय्योन में एक ठेस लगने का पत्थर, और ठोकर खाने की चट्टान रखता हूँ, और जो उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।” इसे पाठक को यह स्मरण कराता है कि यीशु मसीह विशुद्ध पत्थर हैं परन्तु जो उन्हें स्वीकारते नहीं, वे ठोकर खाते हैं; सत्य यह है कि वह शास्त्र-उद्धार का एक कठोर, पर न्यायपूर्ण मार्ग हैं। विश्वास उनकी चट्टान है, जो उद्धार के रास्ते को स्थिर बनाती है, और जो इस पत्थर पर टिका रहता है, उसे कभी शर्म का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दो–तीन प्रमुख विषय
अनुशासन के साथ जुड़े पार関連 पाठ
• यशायाह 28:16 — भविष्यवाणी से प्रेरित एक ठोस पत्थर का चित्रण, जो नयी प्रतिज्ञा के साथ मेल खाता है। इसके साथ जुड़ी प्रेरणा यह है कि परमेश्वर का उद्धार-योजना पुरानी पवित्र वचनों से प्रतिफलित है।
• रोमियों 10:4 — मसीह सत्य है, कानून की पूर्णता नहीं; विश्वास के मार्ग से उद्धार मिलता है।
• 1 पतरस 2:6 — मसीह को ठोस ईश्वर का पत्थर कहा गया है, जो πιστι द्वारा חיים का आधार बनता है।
व्यावहारिक विचार
जीवन के निर्णयों में क्या मैं स्वयं को “ठेस लगने” वाले पत्थर की परीक्षा से बचाने के बजाय उसे स्वीकार कर रहा हूँ? क्या मेरी आस्था सच्ची है—क्योंकि विश्वास से ही उद्धार संभव है—या मैं मानव-परंपरा और स्व-उद्धार के उपायों पर निर्भर हूँ? यह पाठ जगाकर कहता है: यदि तुम मसीह पर टिकते हो, तो शर्म नहीं होगी; पर यदि तुम उसे केवल एक विचार कहकर छोड़ देते हो, तो तुम ठोस मार्ग से चूक जाते हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 9:33 हमें याद दिलाता है कि प्रभु यीशु एक ठेस लगने वाला पत्थर हैं—जो इसे स्वीकारते हैं वे उद्धार पाते हैं, और जो छोड़ देते हैं वे लज्जित होते हैं। विश्वास मानव-तरीके से नहीं, बल्कि ईश्वर की ओर से दिया गया विश्वास है। इस सच पर केंद्रित होकर ही हम सच्चे जीवन के पथ पर चल सकते हैं।
नोट्स और उद्धरणs
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द चाहते हों, यहाँ कुछ संक्षेप उल्लेख हैं: - Matthew Henry: “God’s plan of salvation centers in Christ, and those who stumble at Him, stumble at life.” (सार-संकेत) - Albert Barnes: “The stone of stumbling is Christ; faith in Him produces life.” (सार-संकेत) - Adam Clarke: “The rock of offence signifies rejection by those who refuse the gospel.” (सार-संकेत)
ध्यान दें: यहाँ दिये उद्धरण संक्षेप रूप में हैं; पाठ के उद्धरण पूर्ण नहीं हैं, और मूल भाष्यों के स्वरूप में हैं।