Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 9:1 रोमियों 9:2 रोमियों 9:3 रोमियों 9:4 रोमियों 9:5 रोमियों 9:6 रोमियों 9:7 रोमियों 9:8 रोमियों 9:9 रोमियों 9:10 रोमियों 9:11 रोमियों 9:12 रोमियों 9:13 रोमियों 9:14 रोमियों 9:15 रोमियों 9:16 रोमियों 9:17 रोमियों 9:18 रोमियों 9:19 रोमियों 9:20 रोमियों 9:21 रोमियों 9:22 रोमियों 9:23 रोमियों 9:24 रोमियों 9:25 रोमियों 9:26 रोमियों 9:27 रोमियों 9:28 रोमियों 9:29 रोमियों 9:30 रोमियों 9:31 रोमियों 9:32 रोमियों 9:33



रोमियों 9:17 — पवित्रशास्त्र का संदेश और विश्वस्त परमेश्वर
इस प verse में पवित्रशास्त्र बताता है कि परमेश्वर ने प्लेग-व्यवस्था और फिरौन के बारे में कहा है कि उन्होंने उसे खड़ा किया ताकि उसकी सामर्थ्य प्रकट हो और उसका नाम समूची पृथ्वी पर प्रचारित हो। यह संदर्भ निर्गम 9:16 से लिया गया है, जहां परमेश्वर कहता है कि उसने फिरौन को नियुक्त किया ताकि उसकी प्रभुता और दया-दृष्टि का प्रदर्शन हो।
की पहली चीज जो यह दिखाती है
भगवान का उद्देश्य केवल दयालुता या दया नहीं, बल्कि उसकी पवित्र सत्ता का उद्घाटन है। इतिहास के किसी भी मोड़ पर परमेश्वर अपने वचन के अनुसार आगे बढ़ते हैं, ताकि आदमियों को उनकी पाप-बाधा से जागरूक किया जा सके और विश्वास की राह खुल सके। यह उद्धार के मार्ग को स्पष्ट करने के लिए एक चेतावनी भी है कि सत्ता परमेश्वर के हाथों में है, और मनुष्यों की स्थिति उसी अनुसार तय होती है।
शब्द-विशेष और कल्पनाओं को स्पष्ट करना
संबद्ध गै़ह्नियाँ
1) निर्गम 9:16 — परमेश्वर की प्रत्यक्ष योजना और पदचिह्न, जिसमें वह फिरौन के माध्यम से अपनी महिमा को दिखाते हैं।
2) रोमियों 9:18 — “परमेश्वर जो भी चाहे दयालु बनाता है और जो चाहे कठोर।” यह बताता है कि परमेश्वर की इच्छा कैसे सत्ता-प्रदर्शनों के पीछे प्रेरक है।
3) यूहन्ना 12:32 — यीशु का शब्द, जो पृथ्वी पर चढ़कर सभी को उसकी ओर खींचता है; यह विश्व-स्तर पर नाम का प्रचार कैसे होता है, इसे संकेत देता है।
मैथ्यू हार्ने (Matthew Henry) और एडम क्लार्क (Adam Clarke) से संक्षेप उद्धरण
Matthew Henry ने कहा है कि परमेश्वर की उच्च व्यवस्था में कभी भी अन्याय नहीं है; वह अपने उद्देश्य के अनुसार क्रिया-क्रिया करते हैं ताकि शाश्वत न्याय और महिमा स्थापित हो।
Adam Clarke ने नोट किया है कि फिरौन के माध्यम से परमेश्वर ने दिखला दिया कि मानव इतिहास उसकी इच्छा के अनुसार चल रहा है, और उसका नाम सबकी भाषा-भाषी श्रवण में आएगा।
यथार्थ अभ्यास—आज की撞
- विश्वास में हम यह समझें कि परमेश्वर की योजना कभी अचानक नहीं घटती; वह हर परिस्थिति में अपनी महिमा और धैर्य को दिखाते हैं।
- कठिनाई या दुख के समय भी हम यह याद रखें कि परमेश्वर की सत्ता सब जगह है; उसका नाम और महिमा सर्वत्र फैलना ही उसकी योजना है।
प्रमुख क्रॉस-रेफरेंसेस
1) निर्ग. 9:16 — परमेश्वर का लक्ष्य और उसकी शक्ति का प्रदर्शन। यह रोमियों 9:17 के पवित्र उद्गाटन की पृष्ठभूमि स्थापित करता है।
2) रोमRomans 9:18 — “क्योंकि परमेश्वर जो चाहे दयालु बनाता है और जो चाहे कठोर।” यह दिखाता है कि उसकी चयनीति के पीछे पूर्ण न्याय और उद्देश्य है।
3) यूहन्ना 12:32 — “मैं पृथ्वी से ऊपर उठाया जाऊँगा”— महिमा प्रदर्शक नाम का सार्वत्रिक प्रभाव।
आज की प्रायोगिक सीख
- शासन और उपस्थिति के बारे में विश्वास रखें: परमेश्वर अपने समय-सारिणी में सत्ता दिखाते हैं।
- प्रजा के भीतर समर्पण: जब परमेश्वर किसी के जीवन में ऊपर उठते हैं, तो उसका नाम महिमा पाता है और हमारे विश्वास की जड़ें मजबूत होती हैं।