Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 8:12 का सीधा अर्थ
या कहें: जो बातें लोग राजद्रोह कहकर डराते हैं उन्हें राजद्रोह न समझो, और जो घटनाएं उनकी आँखों में भय बनती हैं, उनसे तुम भय न खाओ। यह संदेश परमेश्वर के प्रति विश्वास और सही निर्णय लेने की माँग है, न कि लोक-आडंबर की दोहराई गई घबराहट का भाग बनना।
संदर्भ परिचय
यशायाह की किताब में अजीबges् भय और विरोध के माहौल की बात है। इजराइल के लोगों के बीच अंधेरों, राजनैतिक दावे और बाहर के खतरे का प्रभाव था। यशायाह Prophet ने प्रेषित किया कि भय और राजनैतिक धूर्तता को अपना नैतिक मापदंड न बनाओ; बल्कि परमेश्वर के मार्ग पर भरोसा रखो।
व्याख्या के निदर्श点
व्याख्यात्मक संकेत (प्रकाशन हेतु)
1) यह वक्तव्य लोगों के दबाव के बीच आत्म-नियंत्रण और दृढ़ विश्वास की मांग करता है। 2) डर को नैतिक या धार्मिक प्रमाण के रूप में न मानना ही विवेकपूर्ण है। 3) परमेश्वर के सिद्धांतों से विचलन न करना, चाहे सामाजिक दबाव कितना भी बढ़े।
छोटे thematic सूची
अनुशंसित cross-references
कई अन्य संदर्भ बताते हैं कि आस्था में भय का स्थान छोटा होना चाहिए: - यूहन्. 14:27 में शांति की प्रेरणा है जो भय की जगह आराम देती है। - रोम 8:15-16 में आत्मा के पुत्रत्व के साथ भय-शिशुता से निकलकर प्रत्यक्ष परमेश्वर के विरुद्ध न डरने की सीख है। - इब्र 13:6 में “यह कहते हैं, न डरते रहो, क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूं” जैसे बोध दिए जाते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हर परिस्थिति में हमें डर के बजाय परमेश्वर के वचनों को आधार बनाकर निर्णय लेना चाहिए। राजनीतिक दवाब, निंदा या लोक-रटने के भाव से विचलित नहीं होना चाहिए; बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से सत्य का पालन करें, चाहे इसका दबाव कितना भी हो।
महत्वपूर्ण नोट्स
मैथ्यू हेनरी, आल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे पारंपरिक टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-domain विचारों में कहे गए बुनियादी सिद्धांत इस वचन के साथ संगत मिलते हैं—भय के साथ वास्तविक विश्वास की परीक्षा। उनके स्वर से यह सार निकलता है कि बाहरी ध्वनि और डर का उपाय परमेश्वर के वचन में है, न कि मानव-आडंबर में।
उद्धृत संकल्प: यदि आप इन्हीं टिप्पणीकारों के समान थोड़े शब्दों में कहा हुआ पाते हैं, तो वे कहते हैं कि भय की स्थिति में भी ईमानदारी और विश्वास ही मार्ग दिखाते हैं, न कि भय का सहारा।