Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 1:1 1 कुरिन्थियों 1:2 1 कुरिन्थियों 1:3 1 कुरिन्थियों 1:4 1 कुरिन्थियों 1:5 1 कुरिन्थियों 1:6 1 कुरिन्थियों 1:7 1 कुरिन्थियों 1:8 1 कुरिन्थियों 1:9 1 कुरिन्थियों 1:10 1 कुरिन्थियों 1:11 1 कुरिन्थियों 1:12 1 कुरिन्थियों 1:13 1 कुरिन्थियों 1:14 1 कुरिन्थियों 1:15 1 कुरिन्थियों 1:16 1 कुरिन्थियों 1:17 1 कुरिन्थियों 1:18 1 कुरिन्थियों 1:19 1 कुरिन्थियों 1:20 1 कुरिन्थियों 1:21 1 कुरिन्थियों 1:22 1 कुरिन्थियों 1:23 1 कुरिन्थियों 1:24 1 कुरिन्थियों 1:25 1 कुरिन्थियों 1:26 1 कुरिन्थियों 1:27 1 कुरिन्थियों 1:28 1 कुरिन्थियों 1:29 1 कुरिन्थियों 1:30 1 कुरिन्थियों 1:31



1 कुरिन्थियों 1:23 पर नज़र: क्रूस का संदेश—निष्ठा और विरोध का संतुलन
यह पद हमें यह समझाता है कि ईश्वर का योजनाबद्ध संदेश कैसे मानव बुद्धि के मानदंडों से पार जाता है। जो एक संदेश को “संक्रमण-कारक” बनाता है, वह मसीह का क्रूस है—एक कृपण-युक्त शुरूआती योजना जो ठेस पहुँचाती है, और एक ज्ञान जो सीधे उद्धार की राह दिखाती है। यहVerse इसलिए खास है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि प्रभु का चुनाव और संसार की समझ के बीच अक्सर टकराहट रहती है—जनमानस के दो केंद्र: नज़ीर यथा-लोक-शासन और मसीह में दिए गए मुक्तिपूर्ण परमात्मा का प्रकाश।
कौन सा संदर्भ?
शास्त्रकर्ता पवित्र ग्रंथ के समग्र संदर्भ में, पौलुस ने कुरिन्थों को एक सामान्य संदेश से विचलित नहीं होने के लिए प्रेरित किया: परमेश्वर ने जो 것을 संसार समझ नहीं पाती, उसे अपने प्रेरितों के प्रचार के द्वारा प्रकट किया। कुरिन्थ के गिरजाए में विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग थे—यही विविधता इस संदेश को अलग आकार देती है: यहूदी चिह्न में ठोकर और जातीयता के बीच की दूरी, जबकि अन्यजाति के बीच इसे मूर्खता कहा गया। परन्तु यही क्रूस, ईश्वर की शक्ति और बुद्धि का प्रमाण बन जाता है।
मुख्य संदेश
पौलुस का संदेश सरल है: मसीह crucified है—यह न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि ईश्वर के उद्धारकार्य की केन्द्र-रेखा है। यहूदियों के लिए क्रूस एक ठोकर है क्योंकि वे वैध प्रतीकों में महिमा देखते हैं; अन्यजातियों के लिए यह मूर्खता क्योंकि वे विद्वत्ता में आत्म-उन्नति को महत्व देते हैं। किन्तु ईश्वर की असाधारण चाला में, क्रूस परमेश्वर की शक्ति है और उसकी बुद्धि की गूढ़ता प्रकट करती है। इसलिए विश्व की मान्यता से ऊपर उठकर, क्रूस ही जीवन की दिशा है।
बाइबिल के भीतर अन्य प्रेरक सिद्धांत
क्रॉस-रेफरेंस और उनके छोटे सार
- रोमियों 1:16: पवित्र संदेश की शक्ति सीधे उद्धार के लिए है, न कि लोगों की समझ के अनुसार। इस संदर्भ से स्पष्ट होता है कि क्रूस का संदेश कितना सार्वभौमिक है।
- गलातियों 6:14: मसीह पर मेरे boasting ही सच्चा है; क्रूस से प्रेरित जीवन कैसे प्रभु की महिमा को केंद्र बनाता है।
- खाली-हाथ राष्ट्र-भक्ति बनाम क्रूस की भक्ति: कोलोसियों 2:14-15 के आलोक में यह दिखता है कि कैसे क्रूस ने न्याय-देह प्रथाों और शक्तियों पर विजय प्राप्त की है।
नीचे की प्रेरणात्मक reflexión
हमें यह समझना चाहिए कि क्रूस एक ऐसे मार्ग का संकेत है जो मानवीय कल्पनाओं से परे है। यह यीशु मसीह के साथ संबंध को गहराता है और विश्वासियों को यह कहने की प्रेरणा देता है कि जीवन की वास्तविक बुद्धि परमेश्वर के साथ जुड़ाव में मिलती है, न कि अपने विवेक की कसौटी पर। जब हम क्रूस के संदेश को अपनाते हैं, तो हम अपनी कमजोरियों को भी ईश्वर की शक्ति के एक अवसर के रूप में देखते हैं।
भाष्याधीन विचार: “हम उसे प्रसंगित करते हैं जो यहूदियों के लिए ठोकर और अन्यजातियों के लिए मूर्खता है”—यह पंक्ति हमें स्मरण कराती है कि ईश्वर की महिमा सदा मानवीय मानकों के खिलाफ उभरती है, और यही प्रेरणा है जो सच्चे विश्वास को परखती है, परिशुद्ध करती है और जीवन में परमेश्वर की योजना को सार्थक बनाती है।
छोटे उद्धरण (महत्वपूर्ण)
यदि आवश्यक हो, संक्षिप्त उद्धरण: “परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं” (पूर्वव्यावस्था के स्वर में प्रेरित-गायन की भावना के साथ), जो टकराव के बावजूद उद्धार का संदेश बनकर जीवित रहता है।