Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 1:1 1 कुरिन्थियों 1:2 1 कुरिन्थियों 1:3 1 कुरिन्थियों 1:4 1 कुरिन्थियों 1:5 1 कुरिन्थियों 1:6 1 कुरिन्थियों 1:7 1 कुरिन्थियों 1:8 1 कुरिन्थियों 1:9 1 कुरिन्थियों 1:10 1 कुरिन्थियों 1:11 1 कुरिन्थियों 1:12 1 कुरिन्थियों 1:13 1 कुरिन्थियों 1:14 1 कुरिन्थियों 1:15 1 कुरिन्थियों 1:16 1 कुरिन्थियों 1:17 1 कुरिन्थियों 1:18 1 कुरिन्थियों 1:19 1 कुरिन्थियों 1:20 1 कुरिन्थियों 1:21 1 कुरिन्थियों 1:22 1 कुरिन्थियों 1:23 1 कुरिन्थियों 1:24 1 कुरिन्थियों 1:25 1 कुरिन्थियों 1:26 1 कुरिन्थियों 1:27 1 कुरिन्थियों 1:28 1 कुरिन्थियों 1:29 1 कुरिन्थियों 1:30 1 कुरिन्थियों 1:31



1 कुरिन्थियों 1:26 पर नयी दृष्टि
इस छोटे वचन् में पौलुस ख्याति, शिक्षा या सामाजिक स्थिति की बजाय ईश्वरीय बुलाहट के असाधारण मानदंड बतला रहे हैं। प्रमाण स्वरूप वे कहते हैं कि परमेश्वर ने “बुलाए जाने” को पृथ्वी की दृष्टि से सामान्य मानकों—यथा बुद्धिमत्ता, शक्ति, कुलीनता—के आधार पर नहीं चुना। यह पाठ आत्म-निर्भरता के बजाय ईश्वरीय कृपा की महत्ता पर जोर देता है।
पाठ का संदर्भ और अध्यायगत तात्पर्य
1 कुरिन्थियों का पत्र विशेष रूप से चर्च के भीतर विभाजन, आचार-संहिता और मसीही जीवन के व्यवहार से जुड़ा है। इस वचनों का केंद्र यह है कि ईश्वर अपने चुने हुओं को सांसारिक दृष्टि से दुर्बल या सामान्य मान सकता है—ताकि परमेश्वर की महिमा स्पष्ट हो। जहां लोगों को महिमा पाने के लिए बाहरी गुण चाहिए होते हैं, वहाँ परमेश्वर की योजना भीतर की परिवर्तन, विश्वास और प्रेम पर टिकी होती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह वचन तीन बुनियादी सच दर्शाता है:
पवित्र शास्त्र से की गई तुलनाएं
• रोमियों 9:11–12 जैसे प्रमाण बताते हैं कि परमेश्वर किसे और कैसे बुलाते हैं, वह मानव मानदंडों से मुक्त है।
• याकूब 2:5-7 में दिखता है कि विश्वसनीयता न सही साधन पर है, बल्कि ईश्वर की कृपा और आस्था पर निर्भर है।
• मत्ती 11:25 में यीशु यह दर्शाते हैं कि ज्ञानी दुरूहों के बजाय बालकों की सरलता और अभिवादन उनके लिए आध्यात्मिक समझ लाती है।
व्यावहारिक आवेदन
- चर्च के सदस्य के रूप में हमारे लिए संकेत है कि हमें अपने नेता या प्रभाव के लिए सांसारिक पदों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
- स्वयं को तौलना तो है, पर मूल्यांकन ईश्वर के दयालुCalling के अनुसार हो; आपकी शिक्षा, धन, या सामाजिक स्थिति से नहीं।
- व्यक्तिगत अहंकार छोड़कर, क्रियात्मक प्रेम, सेवाभाव और एकता को प्राथमिकता दें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संकेत
• रोमियों 12:3—हर एक को दी गई मात्रा के अनुसार विवेकपूर्ण समझ के साथ आना चाहिए।
• 2 कुरिन्थियों 12:9—क्योंकि परमेश्वर की शक्ति कमजोरी में प्रशंसा पाती है।
• मत्ती 20:16—अंत में जिनका पहला स्थान नहीं, वे सबसे अधिक बनते हैं; ईश्वर की गिनती उलटी हो सकती है।
सारांश
1 कुरिन्थियों 1:26 हमें याद दिलाता है कि ईश्वर बुलाहट की कसौटी सांसारिक मानदंड नहीं, बल्कि उसकी कृपा, विश्वास, और परमेश्वर की शांति के साथ जीवन जीने की क्षमता है। यह संदेश हर जगह सच है—चाहे शिक्षा कम हो, धन अधिक हो, या सामाजिक पद कम/ज्यादा हो—ईश्वर अपनी योजना के अनुसार व्यक्ति चुनते हैं ताकि सारी महिमा उसे ही जाए।
कथन-संरक्षण (पूर्व-प्रकाशित टीकाएँ)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-आयुरेशन के छोटे उद्धरण इस पाठ के तात्त्विक संदेश को संवारते हैं: “ईश्वर की शक्ति कमजोरी में बलवान होती है।” यह पाठ भी उसी धारा से जुड़ता है—परमेश्वर की बुलाहट मानवीय गरिमा से स्वतंत्र है और वह छोटे, साधारण लोगों को चुनकर भी महान कार्य कराता है।