1 कुरिन्थियों 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कि उसमें होकर तुम हर बात में अर्थात् सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए।

1 कुरिन्थियों 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 1:5 — संपूर्ण प्रेरणा की अनुभूति: हर बात में धनी किया गया

पद संदर्भ में प्रेरित पवित्रात्मा से प्रेरित पवित्रता और कृपा का आशय स्पष्ट है: मसीही विश्वासी हर बात में, विशेषकर वचन और ज्ञान के क्षेत्र में, परमेश्वर की कृपा से धनी होते हैं। इसे पॉल ने कुरिन्थियों के चर्च के संदर्भ में लिखा ताकि वे इस बात को न भूलें कि यीशु में उनकी भागीदारी सभी प्रकार के लाभ और अधिकारों को जन्म देती है—हर प्रकार के बंटवारे से परे, जीवन के हर दृष्टिकोण में।

मुख्य अर्थ

यह verse बताती है कि मसीही जीवन में प्रवेश के साथ परमेश्वर की कृपा कर्मशः उतरती है: ज्ञान, मंचन और भाषण—ये सब कुछ यीशु मसीह में पूरी समृद्धि से प्राप्त होते हैं। “इसके माध्यम से” वे हर प्रकार की कमी से धनी होते हैं; यह केवल मानवीय गुण नहीं, बल्कि दिव्य बारिश से स्मृतियों, समझ-बूझ और धारणा की विस्तृत सम्पन्नता है।

प्रमुख थीम

  • पवित्रात्मा के साथ एकत्व के कारण विश्वासियों में परमेश्वर की कृपा और शक्ति प्रकट होती है, न कि केवल सांसारिक ज्ञानेन्द्रियों पर निर्भरता से।
  • ज्ञान का ठेका हमारे अपने तर्क से नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रकाश और प्रेरणा से आता है; यह धरोहर चर्च के समुदाय को एकजुट और मजबूत बनाता है।
  • यह धनी होना दैवीय अधिकार है, जिसे अपनाने पर हम हर क्षेत्र में उत्तरदायित्वपूर्ण बनते हैं—उद्धार, जीवन शैली, और सेवा के लिए समर्थ बनना।

क्रॉस संदर्भ (संदर्भित विचार)

• रोमियों 8:28-30 में कहा गया है कि परमेश्वर जो कुछ अच्छा बनाता है, वह सब के लिए है; विश्वासियों को अनुग्रह में इन बहुविध धारणाओं की अनुभूति होती है।

• 2 कुरिन्थियों 12:9-10 में कहा गया है कि परमेश्वर की शक्ति दुर्बलताओं में भी समर्थ होती है; यही धनी होना भी एक प्रकार की दिव्यता है जो हमारे सीमाओं को पार कर देती है।

• यूहन्ना 1:16 में यीशु में भी अनुग्रह के सदा भरपूर अंश मिलते हैं; पहले से भी अधिक कृपा मिलती है—ताकि हम पूर्णता के साथ जीवित सेवक बन सकें।

व्यावहारिक विचार

  • अपने अनुभवों में विश्वास रखें कि परमेश्वर की कृपा हर क्षेत्र में पर्याप्त है—वचन, धारणाएँ, और भाषण सहित।
  • चर्च समुदाय के भीतर आपसी भागीदारी से ज्ञान और समझ में वृद्धि हो; यह व्यक्तिगत क्षमता से कहीं अधिक सामूहिक समृद्धि है।
  • कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखें और परमेश्वर के उद्धार के उद्देश्य को केंद्र में रखें; यही वास्तविक समृद्धि है।

संक्षेप

1 कुरिन्थियों 1:5 यह स्मरण कराता है कि मसीही जीवन की वास्तविक समृद्धि परमेश्वर की कृपा से आती है। हर बात—वचन, ज्ञान, और प्रभाव—यीशु मसीह में संपूर्ण रूप से उपलब्ध है, जिससे विश्वासियों को सारी कमी से धनी किया गया है। इस धनीपन को पहचानकर हमें नम्री और सेवा‑भाव से जीना है।

कथन-सार: इस वाक्य से हमें यह मिलती है कि क्रूस के भीतर मिली कृपा और ज्ञान हर क्षेत्र में हमारी समर्थता का स्रोत है, और यह दिव्य संपदा चर्च के भीतर बांटी जाती है ताकि प्रभु की महिमा बढ़े।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्‍वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ।

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पर जैसे हर बात में अर्थात् विश्वास, वचन, ज्ञान और सब प्रकार के यत्न में, और उस प्रेम में, जो हम से रखते हो, बढ़ते जाते हो, वैसे ही इस दान के काम में भी बढ़ते जाओ।

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जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे हुए हैं।

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