Old Testament
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याकूब 4:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे भाइयों, एक दूसरे की निन्दा न करो, जो अपने भाई की निन्दा करता है, या भाई पर दोष लगाता है*, वह व्यवस्था की निन्दा करता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था पर चलनेवाला नहीं, पर उस पर न्यायाधीश ठहरा।
याकूब 4:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 4:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 140:11 (HINIRV) »
बकवादी पृथ्वी पर स्थिर नहीं होने का; उपद्रवी पुरुष को गिराने के लिये बुराई उसका पीछा करेगी।

याकूब 5:9 (HINIRV) »
हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, न्यायाधीश द्वार पर खड़ा है।

याकूब 4:11 का परिचय एवं संदर्भ
पत्र का यह भाग भाइयों के बीच निन्दा और दोषारोपण के विरुद्ध स्पष्ट चेतावनी देता है। याकूब यहाँ न सिर्फ बाहरी व्यवहार की रोकथाम करते हैं, बल्कि हृदय के अयथार्थ प्रतिस्पर्धी रवैये का भी संकेत देते हैं। जो निन्दा या दोषारोपण करता है, वह विश्वास की सच्चाई से दूर हटकर परमेश्वर की व्यवस्था पर ही चोट कर बैठता है।
यह पाठ परमेश्वर के संदर्भ में क्या बताता है
इस आयत में ईमानदार आचरण और एक दूसरे के प्रति मर्यादा बनाए रखने की महता प्रकट है। ईमानदारी से जीवन बिताने के लिए स्वर्गीय कानून के साथ hwnd; समान रूप से अपने भाइयों की गरिमा की कदर आवश्यक है। निन्दा करना या एक-दूसरे पर दोषारोपण करना, विरोधाभासी है जो कि परमेश्वर की व्यवस्था—जो प्रेम, संयम, और निष्पक्ष निर्णय पर टिकी है—की उसूलों के खिलाफ है। ऐसे रवैये से हम व्यवस्था पर चलनेवाला नहीं, बल्कि न्यायाधीश बन जाते हैं; जबकि प्रभु ही न्याय करता है और वही कानून का सही पाठ्यक्रम दिखाते हैं।
पद के शब्दार्थ और imagery की स्पष्टता
संबंधित आयतें और दृष्ट्रि
1) भेदभाव और आलोचना से बचने की शिक्षा (याकूब 3:9-10) के साथ यह चेतावनी जुड़ी है कि प्रत्येक व्यक्ति एक ही ईश्वर से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बोलता है।
2) प्रेम के उच्चतम नियमों की याद दिलाने वाले द्योतक: पड़ोस के प्रति प्रेम और भाईपन का निर्वहन।
3) दया और निष्पक्षता के साथ जीवन बिताने की प्रेरणा: अगर कोई धन-राज्य या मान-सम्मान के आधार पर निर्णय ले, तो वह परमेश्वर के शासन के अनुरूप नहीं रहता।
20-30 शब्दों में छांटा गया स्पष्ट निष्कर्ष
हमारा आचरण यह दर्शाए कि हमने ईमानदारी से परमेश्वर के नियमों को अपनाया है: निन्दा और दोषारोपण से बचना; और एक दूसरे की गरिमा बनाए रखना।
दिनचर्चे में प्रायोगिक Application
Cross-references के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
• कुलुस्सियों 3:13— एक दूसरे के प्रति दया दिखाने और चोट पहुँचाने से बचने की exhortation; एक ही परिवार के सदस्य के रूप में क्षमा और चेतावनी-परामर्श का संतुलन।
• रोमी 14:19— शांति और कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा; अन्यायपूर्ण निन्दा के बजाय समुदाय के पुनर्स्थापन को प्राथमिकता देता है।
• मत्ती 7:1-2— निन्दा या दोषारोपण का स्थान नहीं होना चाहिए; न्यायसंहिता के बजाय प्रेम और आत्म-नियंत्रण को अपनाने का सिद्धांत।
मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संकलित विचार (संक्षेप)
इन स्तंभों के अनुसार याकूब 4:11 की शिक्षा में प्रावधान है कि विश्वास के साथ-साथ पवित्रता और भाइयों के प्रति कोमलता अनिवार्य है। यह बताता है कि निन्दा से दूर रहना, ईश्वर की व्यवस्था के प्रति सम्मान दिखाने की पहिलो चेष्टा है; अन्यथा हमारा आचरण स्वर्गीय विधान की कसौटी से गिर सकता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: यदि उपलब्ध हो, तो नीचे के तीन प्रामाणिक अंशों में से exact छोटे उद्धरण उद्धृत किए जा सकते हैं—
“जो अपने भाई की निन्दा करता है, या भाई पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था की निन्दा करता है”
इनमें से Nashville/लिखित सार में फोकस यह है कि व्यवस्था को मानना ही वास्तविक विश्वास का परीक्षण है; निन्दा और आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए।