Old Testament
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याकूब 4:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर अब तुम अपनी ड़ींग मारने पर घमण्ड करते हो; ऐसा सब घमण्ड बुरा होता है।
याकूब 4:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 4:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 5:6 (HINIRV) »
तुम्हारा घमण्ड करना अच्छा नहीं; क्या तुम नहीं जानते, कि थोड़ा सा ख़मीर* पूरे गुँधे हुए आटे को ख़मीर कर देता है।

नीतिवचन 27:1 (HINIRV) »
कल के दिन के विषय में डींग मत मार, क्योंकि तू नहीं जानता कि दिन भर में क्या होगा। (याकू. 4:13-14)

भजन संहिता 52:7 (HINIRV) »
“देखो, यह वही पुरुष है जिसने परमेश्वर को अपनी शरण नहीं माना, परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा!”
याकूब 4:16 पर टिप्पणी — घमण्ड और इसका वास्तविक प्रभाव
पर अब तुम अपनी ड़ींग मारने पर घमण्ड करते हो; ऐसा सब घमण्ड बुरा होता है।
आगे बढ़ने से पहले:Immediate setting
याकूब प्रेरित ने हमारी संस्कार-जीवन में व्याप्त अहंकार और अपने-अपने योजनाओं को ईश्वर के निर्देशों से ऊपर मानने की प्रवृत्ति की निंदाजनक स्थितियों को स्पष्ट किया है। यहाँ “ड़ींग मारना” अर्थात अपनी योजनाओं, विचारों या वस्तुओं के लिए घमण्ड करना — यह बताता है कि मनुष्य कब विश्वसनीयता और पुण्य के बजाय अपने स्वार्थ के प्रदर्शन पर ध्यान देता है।
ये पाठ भगवान के दृष्टिकोण से क्या बताता है
याकूब स्पष्ट करता है कि विश्वासगत जीवन तभी पूर्ण होता है जब हमारा प्रयोजन परमेश्वर की योजना के अनुरूप हो और हम अपने किसी भी “घमण्ड” या आत्म-गौरव को घटे रखें। घमण्ड दिखावा है जो अंततः विनाश का मार्ग खोल सकता है; यह संसारिक हितों, समय और संदेह पर आधारित होकर ईश्वर की इच्छा से टकराता है।
महत्वपूर्ण शब्द और छवि
“घमण्ड” यहाँ एक आंतरिक गलत मनोवृत्ति है जो ईमानदारी, नम्रता और ईश्वर-आस्था के विरुद्ध है। इसे समझने के लिए ध्यान दें कि यह शब्द व्यवहार-यथार्थ से प्रेरित अहंकार है, जो सफलता-प्राप्ति की कल्पना में भीड़ बनाकर दीनता और परमेश्वर की कृपा को भुला देता है।
संबंधित आयतें
- प्रेरित पौलुस के शब्द: य कायमून भरोसा न हो, क्योंकि जगत के साथ मिलकर चलना आत्म-तृप्ति नहीं देता, बल्कि ईश्वर के साथ माँग-हित की दिशा में जाना चाहिए।
- प्रेषित पौलुस का विचार: “घमण्ड के किसी भी रूप” से बचना चाहिए, क्योंकि यह आत्मिक वृद्धि को बाधित करता है (रोम 12:3–16 के तात्पर्य)।
- नीतिवचन 16:18 का संदर्भ: घमण्ड पहले गिरावट का कारण बनता है; नज़र रखें कि चरण-चिन्ह क्या हैं।
पवित्र शास्त्र के अन्य आयाम से संबंध
1) विश्वास और विनम्रता का संयोजन: विश्वास के साथ विनम्रता आत्म-उद्धार के मार्ग को सरल बनाता है; इस विषय पर अन्य जगहों पर भी गहरी दिशा मिलती है।
2) योजना बनाते समय परमेश्वर की इच्छा को पहले रखना: यह पाठ提醒 देता है कि हमारी योजनाएँ ईश्वर के मार्ग से टकरातीं तो नुकसान ही होगा।
3) जीवन के हर क्षेत्र में नम्रता और समर्पण का मूल्य: धन, शक्ति या स्थिति के बावजूद भक्त का हृदय ईश्वर के प्रति आश्रित रहता है।
आज के समय में व्यावहारिक अभ्यास
Cross-references और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
• इब्रानियों 3:13: हर दिन की नीयतों में सचेत रहें ताकि भूल-चूक न हो जाए; यह घमण्ड के विरुद्ध जागरूकता की भूमिका निभाता है। — समझ में आता है कि निरंतर आत्म-आलोचना क्यों आवश्यक है।
• जेम्स 3:14–16: यदि दिल में ईर्ष्या और घमण्ड हो,そこで दायित्वपूर्ण शांति नहीं रहती; यह संदेश बताता है कि दावत-हृदय, शांति और विवेक की आवश्यकता है।
• यूहन्ना 3:26: हमारे भीतर जो प्रेम है वही सच्चे परमेश्वर-आस्था की पहचान है—घमण्ड नहीं।
उद्धरण स्रोतों की संक्षिप्त चर्चा
यह विश्लेषण Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी टिप्पणी-टुकड़ों से प्रेरित विचार-धाराओं के साथ संलग्न है; इन लेखकों के विचारों को साथ में पढ़ना पाठक के लिए लाभकारी है।
यद्यपि उपरोक्त पाठ्य का संपूर्ण उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किया गया है, उनके दृष्टिकोण में निम्नलिखित सार स्पष्ट मिलते हैं: घमण्ड को ईश्वर के साथ प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा गया है; विनम्रता और विश्वास की पवित्रता को प्रमुख माना गया है।
संकेत क्रस-रेफरेंस: रोम 12:3–16; मी 6:8; मत्ति 23:12.