Old Testament
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याकूब 4:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो धुंध के समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। (नीति. 27:1)
याकूब 4:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 4:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 1:24 (HINIRV) »
क्योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।

भजन संहिता 39:5 (HINIRV) »
देख, तूने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरा जीवनकाल तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तो भी व्यर्थ ठहरे हैं। (सेला)

भजन संहिता 102:3 (HINIRV) »
क्योंकि मेरे दिन धुएँ के समान उड़े जाते हैं, और मेरी हड्डियाँ आग के समान जल गई हैं*।
याकूब 4:14 पर टिप्पणी — जीवन की अस्थिरता और ईश्वर की योजना
सीधे अर्थ की पहचान: यह धरा है कि हमारा जीवन क्षणभंगुर और अनिश्चित है; हम नहीं जानते कि कल क्या होगा। हमारे जीवन को धुंध की नाईं समझना ठीक है— थोड़े समय में दिखाई देना और फिर लुप्त हो जाना।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब का पत्र विश्वासी समुदाय में व्यवहारिक विश्वास-जीवन पर केंद्रित है। चौथे अध्याय में वे ईर्ष्या, द्वेष और सीधे-सीधे ईश्वर के साथ अपने যুক্ত होने की कसौटी के बारे में बतलाते हैं। यह पद धार्मिक आत्म-विश्वास बनाम साज़िश-योजना के बीच संतुलन की बात करता है: मनुष्य कितना भाग्यशाली मान लें कि वे अपने योजनाओं के अनुसार जीवन चला पाएंगे, पर वास्तविकता में हम सभी के दिन परमेश्वर की योजना में रहते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
अनुदोषित क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में, स्पष्ट रूप से उद्धरण नहीं)
याकूब 4:14 के संदर्भ में नीचे दिए गए बाइबल अंश मिलते हैं जो जीवन के सीमित समझ को और ईश्वर की अनंत योजना को स्पष्ट करते हैं:
- परमेश्वर के ज्ञान और नियति के हिस्से के रूप में जीवन के अनिश्चित आचरण का दर्शन।
- नीति-पत्रों में बतलाया गया एक सामान्य सिद्धांत: कल क्या होगा, यह मनुष्य के वश की बात नहीं।
सूत्रधार विचार (संक्षिप्त संबंध और अंग)
1) दैनंदिन जीवन में अहंकार बनाम निर्भरता: संसारिक सफलताओं पर निर्भरता कम हो और परमेश्वर की कृपा में स्थिरता देखने की प्रेरणा मिले।
2) विनम्रता और प्रभु स्वीकार्यता: अपनी योजना बनाते समय प्रभु की इच्छा को प्राथमिकता दें; यह आस्तिक जीवन का वास्तविक मार्ग है।
3) प्रार्थना और ज्ञान: कल के लिए अज्ञानता को स्वीकार करते हुए, प्राथना और विनम्रता से मार्गनिर्देशन माँगा जाए।
छोटी नीतिकालीन सूची
तमाम संदर्भों से संगत निष्कर्ष
याकूब के इस पाठ के साथ अन्य उपदेशक टिप्पणियाँ यह दर्शाती हैं कि जीवन की नश्वरता हमें जीवन को परमेश्वर के चरणों में समर्पित करने को कहती है। जो लोग यीशु में विश्वास रखते हैं, वे अपने भविष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बल्कि ईश्वर की योजना के अनुसार देखते हैं।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
अपने योजनाओं के साथ धीर-गंभीर रहें, परन्तु परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हलचल करें। कल के बारे में अनिश्चितता को अपनाएं, और आज एक विश्वास-साहस के साथ जीयें। ईश्वर के नियंत्रण में अपने जीवन को समझें और उसकी दी हुई ljudi-आशीर्वाद का आभार मानें।