Old Testament
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1 पतरस 1:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि “हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
1 पतरस 1:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 1:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 40:6 (HINIRV) »
बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, “प्रचार कर!” मैंने कहा, “मैं क्या प्रचार करूँ?” सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है।

याकूब 4:14 (HINIRV) »
और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो धुंध के समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। (नीति. 27:1)

1 पतरस 1:24 का सरल अर्थ
इस पद का केंद्र है—मानवीय जीवन की अस्थायित्वता और प्रभु की अनंत स्थिरता। पवित्र वचन कहता है कि हर प्राणी घास के समान है, और उसकी शोभा घास के फूल के समान है; घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है। इसका सीधा मतलब है: मनुष्य कितना भी पवित्र, ऊँचा या सफल क्यों न दिखे, प्रकृति की दृष्टि से उसका जीवन एक क्षणिक है; परन्तु परमेश्वर का वचन और उसके उद्धार का आश्वासन अडिग बना रहता है।
संक्रमणीय पृष्ठभूमि
पतरस ने यह पत्र ईश्वर-विश्वासियों को अस्थिरता भरे समय में स्थिर रहने के लिए लिखा। शिल्प में घास-फूस की प्रतिमा प्रकृति के परिवर्तन को दिखाती है: घास उगती है, फूल खिलते हैं, पर कुछ ही समय में ये सब मुरझा कर verschwinden हो जाते हैं। इस तरह पतरस चेतावनी देता है कि सांसारिक वैभव, वीर्य या जन्म-जन्मान्तरिक प्रतिष्ठा भी मनुष्य के भीतर का ईश्वर-आधार नहीं बना सकता।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
अनुसंधान-प्रेरक cross-references
• योहान 1:14 के अनुरूप—देहधारी ईस्वरूप कृपा और महिमा से भरा है; परन्तु संसार का राजा बन कर नहीं रहता। यह दिखाता है कि प्रकृति और सृष्टि की महानता के बजाय कृपा का स्थायित्व है।
• वाक्य 2:6-7 (याकूब/संदर्भ) के साथ—जीवन की अस्थायित्वता पर प्रभु के विश्वासयोग्य आशीर्वाद का स्थायित्व; विश्वासियों को विवेकपूर्वक जीना सिखाता है।
• मिन्ही 3:7 (भविष्यदर्शी चेतावनी) के साथ—जब लोग स्वयं को स्थिर मान लेते हैं, तब परमेश्वर का वचन ही हमारी नींव है।
पतरस-स्टाइल के दीर्घ विचार
यह पंक्ति जीवन के तात्कालिकता से जुड़ाव सिखाती है—हमारी सिरीयो-शोभा, धन-सम्पदा या पद-प्रतिष्ठा क्षणभंगुर हैं; जबकि ईश्वर के विचार और उद्धार का आश्वासन अमर हैं। इसलिए विश्वासियों को अपनी आशा को सांसारिक गुणों पर नहीं, बल्कि अजन्मे सत्य पर रखना चाहिए: पवित्रता, विश्वास और परमेश्वर के उद्देश्य की पूरी तयारी।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
सीधी टिप्पणी
यह पाठ हमें याद दिलाता है कि हर चीज जो दिखती है, वह क्षणभंगुर है; पर जो ईश्वर के वचन पर टिका है, वही अचल रहता है। हमारी आशा यदि उद्धार के वास्तविक स्रोत—येशू मसीह के कार्य—पर हो, तो जीवन की अस्थायिता भी सुसंगत उद्देश्य के साथ स्वीकार योग्य हो जाती है।
एतिहासिक टीका के अनुसार (एडम क्लार्क, मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स) इस प्रकार के पद एक द्वंद्व प्रस्तुत करते हैं: पृथ्वी-संबंधी उत्साहों के रहते भी आंतरिक परिवर्तन और ईश्वर से मिलने का अवसर बना रहता है; उद्धार का अपरिवर्तनीय सत्य हमें स्थिरता देता है।
नोट: 1) “हर एक प्राणी घास के समान है” उपमा स्पष्ट करती है कि सभी सांसारिक जीवन क्षणभंगुर है; 2) “घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है”—शोभा और आदर्श समय के साथ समाप्त होते हैं; 3) यहpoir हमें सचेत करता है कि हमारे जीवन के लक्ष्य ईश्वर के राज्य के अनुरूप होने चाहिए।