Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 1:21 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 1:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो।
1 पतरस 1:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 1:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 2:24 (HINIRV) »
परन्तु उसी को परमेश्वर ने मृत्यु के बन्धनों से छुड़ाकर जिलाया: क्योंकि यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता। (2 शमू. 22:6, भज. 18:4, भज. 116:3)

इब्रानियों 2:9 (HINIRV) »
पर हम यीशु को जो स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुःख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से वह हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे।

यूहन्ना 12:44 (HINIRV) »
यीशु ने पुकारकर कहा, “जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन् मेरे भेजनेवाले पर विश्वास करता है।
1 पतरस 1:21 पर टिप्पणी—क्यों यह वचन मायने रखता है
यह verse उस विश्वास के आधार को स्पष्ट करता है जो मसीह में जीवन के हर चरण को संचालित करता है—सम्भवत: अत्यंत कठिन समयों में भी। पतरस यह सच बताता है कि हमारे विश्वास का केन्द्र कैसे मूर्त लाभ पहुँचाता है: किसने हमें परमेश्वर पर अभिमानपूर्वक टिका दिया, जिसने मृतकों में से उसे जिलाया और महिमा दे कर दिखाया कि हमारी आशा वही है। यह वचन विश्वास को अनुभविक चेतना बनाता है—हमारा आश्रय और निराशाजनक परिस्थितियों में भी स्थिर रहने का कारण।
प्राथमिक संदर्भ और संदेश
यह पत्र 1 पतरस में प्रेरित पतरस ने उन शिष्यों को लिखा जो दासत्व, भेदभाव और परेशानियों के बीच जीवनयापन कर रहे थे। उनके लिए धर्मी जीवन की पुष्टि यह है कि हमारा विश्वास उन घटनाओं पर निर्भर नहीं है जो बाहरी स्थितियों को बनाती हैं, बल्कि उन घटनाओं पर जो ईश्वर के काम को साबित करती हैं—यानी मरे हुओं में से जिलाया गया यीशु और उसकी महिमा। अतः विश्वास और आशा परमेश्वर पर ही स्थिर रहते हैं, न कि हमारी परिस्थितियों पर।
मुख्य विचार
पवित्र शास्त्रीय themes और साथी विचार
जो बात यहाँ स्पष्ट है, वह यह कि मानवीय परिश्रम या दायित्व मात्र से नहीं, बल्कि परमेश्वर की बुलाहट और जी उठे हुए मसीह के प्रभाव से हमारा विश्वास पुष्ट होता है। यह दृढ़ीकरण हमें जान देता है कि हमारे जीवन का सुराग और उम्मीद ईश्वर के महिमामय कार्य से जुड़ा है—यही वजह है कि हमारे विश्वास में स्थिरता और आशा दोनों रहती हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षिप्त संदर्भ व तात्पर्य)
- रोम 8:24-25: आशा के लिए धैर्य और ईश्वर पर निर्भरता आवश्यक है, क्योंकि आशा हमारी वर्तमान अवस्था से परे एक वास्तविकता है।
- गलत-समझ से मुक्ति: 1 कुरिन्थियों 15:12-19 में मसीह के जी उठने से जीवन का मूल्य और विश्वास के उद्देश्य की पुष्टि मिलती है।
- इब्र 11:1: विश्वास का सार यह है कि वह जो कहा गया है, उसे सच मानना है, वह भी जो भविष्य में घटित होगा, वही सत्य है।
सूचनात्मक उद्धरण (पवित्र-व्याख्या से मिलते-जुलते बिंदु)
यहाँ उपलब्ध प्रसिद्ध और सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों को समेकित करते हुए, हमने ऐसे तत्व लिए हैं जो मूल पाठ की समझ को सुदृढ़ करते हैं:
– मैथ्यू हेनरी: “विश्वास के कारण हमारी संतुष्टि और आशा स्थिर रहती है, क्योंकि यह हमें उस दिव्य वस्तु पर टिकाए रखती है जिसे यीशु ने जी उठा कर महिमा दी।” (संकेतित विचार समानार्थी रूप में संकलित)
– अल्बर्ट बार्न्स: “मृत्यु के बाद की महिमा ही वह लक्ष्य है जो हमारे विश्वास को पुष्ट बनाती है; यह महिमा परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हमारी आशा को गहरा करती है।”
– एडम क्लार्क: “जो विश्वास करता है वह परमेश्वर के करुणा-पूर्ण रहस्य को अनुभव करता है—यही वह भूतपूर्व उद्धार का केंद्र है।”
व्यावहारिक देवotional विचार
जीवन के उन क्षणों में जब हमें लगता है कि दुनिया एक उलझन है, ईश्वर के द्वारा मृतकों से जिलाए जाने का सत्य हमारे भीतर जीवंत आशा को जगाता है। यह आशा हमें हर कठिनाई से पार पाने की दृढ़ता देता है—क्योंकि हमारा विश्वास उसी परमेश्वर पर है जिसने यीशु को जिलाया और उसे महिमा दी।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस verse का मूल संदेश है: ईश्वर पर अडिग विश्वास और उसे पाकर की जानेवाली आशा ही वह गहना है जो हमारे जीवन को स्थिरता और उद्देश्य से भर देता है। हमारी सहायता वही परमेश्वर है जिसने यीशु को जी उठा कर महिमा दी, ताकि हमारा विश्वास और आशा उसी पर टिके रहें।
संक्षिप्त संदर्भ
1 पतरस 1:21; रोम 8:24-25; इब्र 11:1