Old Testament
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इब्रानियों 2:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर हम यीशु को जो स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुःख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से वह हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे।
इब्रानियों 2:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 2:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 2:7 (HINIRV) »
वरन् अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया*, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।

प्रकाशितवाक्य 5:9 (HINIRV) »
और वे यह नया गीत गाने लगे, “तू इस पुस्तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तूने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है। (प्रका. 5:12)

1 यूहन्ना 4:9 (HINIRV) »
जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इससे प्रगट हुआ कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ।
इब्रानियों 2:9 पर समग्र विवेचन
यह पद परमेश्वर के महान उद्धारकार्य के चरित्र को उजागर करता है: ईश्वर-रत्न यीशु मसीह की विनम्रता और महिमा का संगम। पाठक को बतलाता है कि प्रभु ने मनुष्यों के लिए मृत्यु का स्वाद चखा ताकि उनकी दशा परिवर्तनशील हो सके। इस आयत में दया, उद्धार और परम प्रेम का ठेका स्पष्टतया अभिव्यक्त होता है।
कथन का परिचय—पुट और संदर्भ
पंक्ति “पर हम यीशु को जो स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुःख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं; ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से वह हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे” में लेखक यह दर्शाता है कि यीशु ने मानवजाति की स्थिति को अपनाया, मृत्यु को सहा, और इसीलिए वह महिमा और आदर के योग्य बन गए। यह घटना ईश्वरीय योजनाओं की पूर्णता की पुष्टि है: जैसे-जैसे वह विनम्र बना, वैसे-वैसे वह मृत्यु पर विजय प्राप्त कर क्रोधी नहीं, बल्कि करुणा से भरा मार्गदर्शक बन गये।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) विनम्रता से महिमा तक का परिवर्तन: ईश्वर के पुत्र को मानवीय कष्टों में लाकर उद्धार की योजना पूरी की गई। यह दिखाता है कि स्वर्गीय महानता मानवता के लिए क्यों धारण की गई—मतलब यह कि परमेश्वर की उद्धारकारी शक्ति दया से जुड़ी है, न कि केवल शक्तिशाली हक़ के प्रदर्शन से।
2) मृत्यु का स्वाद स्वरूप में शामिल है: यीशु ने मृत्यु को सहन किया ताकि मृत्यु के पाश में फंसी दुनिया मुक्त हो सके। इससे यह पुष्टि होती है कि उद्धारकर्ता ने वास्तविक मानवीय अनुभव वहन किया, ताकि हम भी उस पर विश्वास कर सकें।
अन्य बाइबल अंशों के साथ तुलनात्मक दृष्टिकोण
इन उद्धरणों से स्पष्ट होता है कि यीशु के मृत्यु-स्वीकारण का लक्ष्य केवल दर्द का अनुभव नहीं था, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह को हर एक मनुष्य तक पहुँचाना था ताकि पुनर्ज्ञान संभव हो सके।
जीवन पर अनुप्रयोग
- विश्वासियों के लिए प्रेरणा: कठिनाइयों के बीच भी सम्मान और विनम्रता बनाए रखना। यीशु की तरह, हम भी परिश्रम, दया और सेवाभाव से जुड़ें, ताकि हमारे जीवन में महिमा प्रकट हो।
- मृत्यु के भय से मुक्त होना: क्राइस्ट के मार्ग पर चलना मृत्यु के भय को कम करता है, क्योंकि हमें वह मार्ग दिखाता है जो शाश्वत जीवन की ओर ले जाता है।
क्रॉस-रेफरेंस के साथ सरल संबंध
1) याकूब 4:10—नम्र रहना परमेश्वर के favor को आकर्षित करता है; यीशु की विनम्रता इसी ध्येय को मूर्त करती है।
2) 1 पतरस 1:3—कृपा से नया जीवन मिलना; उद्धार की सफलता यह प्रमाण है कि मृत्यु पर विजय मिली है।
3) रोमियों 5:8—परमेश्वर ने我们 के लिए प्रेम दिखाया जब हम अभी पाप में थे; यीशु के मृत्यु-स्वीकारण से यह प्रेम स्पष्ट होता है।
संक्षेप-निर्णय
इब्रानियों 2:9 हमें विश्वास कराता है कि मसीह ने स्वर्गीय महिमा को स्वीकार कर मानव-स्थिति का अनुभव किया, ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से 모든 के लिए मृत्यु का स्वाद खोली जाए। यह संदेश न केवल सच्चाई है, बल्कि जीवन-परिवर्तन का पुकार भी है: स्वर्गीय महिमा और पृथ्वी की करूणा एक साथ मिलकर उद्धार बनाते हैं।
सूत्र उद्धरण (केवल जहाँ उपलब्ध):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से मौजूदा मौलिक विचारों के भीतर संक्षेप-उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो पंक्तिबद्ध रूप नहीं दिए गए हैं—परन्तु उनके विचारों के संगत सार यहाँ एकीकृत रूप में प्रस्तुत हैं।