Old Testament
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इब्रानियों 2:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि वह तो स्वर्गदूतों को नहीं वरन् अब्राहम के वंश को संभालता है। (गला. 3:29, यशा. 41:8-10)
इब्रानियों 2:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 2:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 3:29 (HINIRV) »
और यदि तुम मसीह के हो, तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।

रोमियों 4:16 (HINIRV) »
इसी कारण प्रतिज्ञा विश्वास पर आधारित है कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि वह सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसके लिये जो व्यवस्थावाला है, वरन् उनके लिये भी जो अब्राहम के समान विश्वासवाले हैं वही तो हम सब का पिता है

रोमियों 2:25 (HINIRV) »
यदि तू व्यवस्था पर चले, तो खतने से लाभ तो है, परन्तु यदि तू व्यवस्था को न माने, तो तेरा खतना* बिन खतना की दशा ठहरा। (यिर्म. 4:4)
3) इब्रानियों 2:16 का अर्थ
यह पद स्पष्ट करता है कि ईश्वर ने लोगों की मुक्ति के लिए दूत-सम्बन्धी सत्ता नहीं बल्कि अब्राहम के वंश पर विशेष ध्यान दिया है। यहाँ कहा गया है कि वह “स्वर्गदूतों को नहीं वरन् अब्राहम के वंश को संभालता है।” इसका अर्थ है कि यीशु मसीह का उद्धारककार्य और प्रेरणा ब्रह्माण्ड के उच्चतम सिद्धांतों से नहीं, बल्कि चुने हुए वंश और कथित पितृपरंपरा से जुड़ा है—यानी यह चिह्नित करता है कि परमेश्वर की योजना मानवजाति के लिये व्यक्तिगत और पारिवारिक पंक्ति के भीतर पूरी होती है, जो अब्राहम से शुरू होकर आगे चलती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इब्रानियों के लेखक यह दर्शाते हैं कि उद्धार का कार्य मानव-शरीर में आने वाले मसीह के द्वारा निभाया गया है—not merely देवदूतों के माध्यम से. यह दयालुता और वचन के अनुसार है कि परमेश्वर ने अब्राहम की वंशावली को चुना जिसे पुरानी प्रतिज्ञाओं में महत्व दिया गया था (गला. 3:29; यशा. 41:8-10 का संदर्भ)।
interpretive observations
थीमेटिक सार
संबंधित पवित्र ग्रंथ
• गला. 3:29: जो लोग मसीह में हैं, वे अब्राहम के वंश और आशिष की धारा में जुड़े रहते हैं। यह बताता है कि परमेश्वर की योजना कितनी व्यापक है और विश्वासियों को भी उसे साझा करना है।
• यशा 41:8-10: अब्राहम के वंश से प्रेरित गवाही और परमेश्वर का समर्थन—यह सूची मसीह के गहरे संबंध को पुष्ट करती है कि उद्धार का दायरा व्यक्तिगत वंश से आगे बढ़कर पूरे समुदाय तक जाता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
1) हमारे विश्वास की जड़ें स्पष्ट परिवारिक-योजनाओं में हैं; इसलिए हम अपने विश्वास-परंपरा और समुदाय से जुड़े रहें।
2) उद्धार का केंद्र मसीह हैं—हम दूतों के बजाय उसकी वचनों और प्रेरणा पर टिके रहते हैं।
3) परमेश्वर के वादे एक समुदाय से बढ़कर विश्वव्यापी बनते हैं; हम भी उसी आशीर्वाद के भागीदार हों।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत
यदि चाहें, तो आप Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विवेचनाओं से इस पाठ की पार्श्व-धाराओं को देख सकते हैं; परन्तु यहाँ विशिष्ट उद्धरण के लिए संक्षेप स्वीकार्य है।