Old Testament
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इब्रानियों 2:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुःख उठाया, तो वह उनकी भी सहायता कर सकता है, जिनकी परीक्षा होती है।
इब्रानियों 2:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 2:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:24 (HINIRV) »
अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है*, और अपनी महिमा की भरपूरी के सामने मगन और निर्दोष करके खड़ा कर सकता है।

1 कुरिन्थियों 10:13 (HINIRV) »
तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है: और परमेश्वर विश्वासयोग्य है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। (2 पत. 2:9)

इब्रानियों 4:15 (HINIRV) »
क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुःखी न हो सके*; वरन् वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तो भी निष्पाप निकला।
इब्रानियों 2:18 पर टिप्पणी (HINIRV)
पृष्ठभूमि और संदर्भ: इस अध्याय में लेखक यह दर्शाता है कि कैसे यीशु ने मानवजाति के अनुभवों को अपना लिया है ताकि ईश्वर की योजना पूरे संसार के लिए अधिक सुलभ हो सके। खासकर 2 अध्याय में यह दिखाया गया है कि परमेश्वर के पुत्र हर प्रकार के विनय और परीक्षा में उसी मनुष्य के समान अनुभव करता है, ताकि वह हमारे लिए दया और सहायता प्राप्त कर सके। अंततः, इस वचन में कहा गया है कि जब यीशु ने दुःख उठाया, उसने हमारी सहायता के लिए अपनी शक्ति और स्नेह को सक्रिय किया।
मुख्य अर्थ
यह वचन बताता है कि यीशु को दुःख और संघर्षों के समय अनुभव हुआ, इसलिए वह उन सबके लिए भी सहायक बन सकता है जिन्हें अभी अभी परीक्षा और जाँच से गुजरना पड़ रहा है। उसके स्वभाव में समानता और सहानुभूति है; वह उन सबकी सहायता के लिए तैयार है जो अपने विश्वास के मार्ग में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
दो-तीन प्रमुख विषय
सुधारक टीका-सीख (Cross-reference के साथ)
• हीब्रूस 4:15-16: यीशु की सहानुभूति और कृपा—नयायोचित समय पर सहायता पाने का प्रवेशद्वार।
• 1 पतरस 5:7: अपनी चिन्ताओं को प्रभु के हाथों में डालना, क्योंकि वह देख रहा है।
निष्कर्षित संकेत: यीशु ने हमारे अनुभवों के साथ दोस्त बना कर दिखाया कि परीक्षा के दौरान ईश्वर की कृपा कितनी जीवित और उपलब्ध है. यह वचन हमें आश्वस्त करता है कि हमारा आस्तित्व उसकी देखरेख में है और वह हमारी सहायता में सक्षम है।
व्यावहारिक विचार
संक्षेप
यह verses कहता है कि प्रभु यीशु ने मानवता के दुःख उठाए, ताकि उनके द्वारा वह हमारी सहायता कर सके, जो अपनी परीक्षा के समय चिंतित हों। इसी कारण वह हमारे पास है—हर संकट के समय एक विश्वसनीय सहाय्यक के रूप में।
कानूनी-उद्धृत टिप्पणी (आवश्यक संदर्भ)
हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से संकलित बिंदु इस सार को मजबूत करते हैं: यीशु की सहानुभूति और सहायता हमारी स्थिति के अनुरूप है; वह हमारे लिए एक प्रेरक और सहायता स्रोत है।
या, इन विचारों के साथ एक समेकित निष्कर्ष: प्रभु ने जो अनुभव किया, वही हमारे लिए उद्धार का आधार बनता है—यही कारण है कि हमारी परीक्षा में भी वह हमारी सहायता कर सकता है।