इब्रानियों 5:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि हर एक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है, और मनुष्यों ही के लिये उन बातों के विषय में जो परमेश्‍वर से सम्बन्ध रखती हैं, ठहराया जाता है: कि भेंट और पापबलि चढ़ाया करे।

इब्रानियों 5:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

इब्रानियों 5:1 पर टिप्पणी (HINIRV)

पद का संदर्भ- वाक्य: "क्योंकि हर एक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है, और मनुष्यों ही के लिये उन बातों के विषय में जो परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं, ठहराया जाता है: कि भेंट और पापबलि चढ़ाया करे।" यह पंक्ति नये अनुबंध में महायाजक की भूमिका की स्थापना करती है। लेखक यह दर्शाता है कि महायाजक एक मानवीय गतिविधि के भीतर कार्य करता है—वह भी इसलिए ताकि परमेश्वर के सामने पापों के लिए भेंट और बलिदान दे सके।"

संोजन और केंद्रीय अर्थ

यह पद बताता है कि महायाजक मनुष्य जाति से चुना गया है ताकि वह अपनी ही प्रकृति के समान अनुभवों के बावजूद परमेश्वर के सम्मुख व्यवहार कर सके। उसका मुख्य कत्र्तव्य है—भेंट और पापबलि की व्यवस्था निभाना। यह व्यवस्था महायाजक को भगवान के बारे में गहरे ज्ञान और दिखावे के साथ पाप-स्वीकृति के लिए एक मध्यस्थ बनाती है।

मुख्य विषय

  • मानवीय व सौंपे गए दायित्व: महायाजक होना एक मानवीय बुलावा है न कि किसी दैवीय आत्मशक्ति का स्व-उल्लेख। यह भूमिका मित्रता, संवेदना और अनुभव के आधार पर समझ विकसित करती है ताकि वह जन के दुःखों को समझ सके।
  • उद्धार की मध्यस्थ भूमिका: भेंट और पापबलि की व्यवस्था के द्वारा महायाजक परमेश्वर और लोगों के बीच एक सेतु बनता है।
  • आत्म-प्रतिपादन और अनुशासन: यह पद विधान-नियम के अनुसार सेवा करने की जिम्मेदारी को दर्शाता है, जिसमें पाप की क्षमा और भेंट के मेल को संतुलित करना है।

संबद्ध अंश और क्रॉस-रेफरेंसेज

— ईब्र 4:14-16: भय और आश्वस्ति के साथ पाश्चात्य मध्यस्थ के रूप में यीशु मसीह की भूमिका की तैयारी। यह दिखाता है कि यीशु ने मानवजाति के बीच नहीं सेतु रचा बल्कि हर प्रकार के उन्नति-आवेग से ऊपर उठकर शुद्धता प्रदान की।

— लीवा आदेशों के संदर्भ में हर एक महायाजक के उदाहरण पर विचार: वाचा और बलिदान की व्यवस्था को बराबर बनाए रखना, ताकि लोगों के पापों के लिए क्षमा संभव हो।

— रोम 8:26-27: आत्मा की सहायता से महायाजक की कमी-पर्दारी के समय भी परमेश्वर की इच्छा पूरी होती है।

praktical reflection

आज के पाठक के लिए यह शब्द एक संतुलन सिखाता है—हम दूसरों के लिए कैसे मध्यस्थता कर सकते हैं और कैसे परमेश्वर के साथ सीधे संबंध बनाए रखें। समाजिक दायित्वों में भी, दूसरों के दुःखों के प्रति संवेदनशीलता और सहायता का भाव रखना चाहिए; यह ईश्वर के सामीप्य को प्रकट करता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इब्रानियों 5:1 मठीय-नीति की प्रेरणा देता है कि ईश्वर के सामने सेवा कैसे करनी है—मनुष्यों की ओर से चुना गया महायाजक, जो भेंट और पापबलि के विषय में जिम्मेदारी उठाता है, ताकि परमेश्वर के पवित्र नियमों के अनुसार मध्यस्थता संभव हो सके। यह पवित्रता और करुणा के संतुलन की याद दिलाता है, जो आगे चलकर चरितार्थ होता है जब यीशु मसीह इस भूमिका को पूर्णता में निभाते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल यदि उपलब्ध हों)

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलनों से जो सीधे पंक्तियों के लिए उल्लेखित हो सके, वहां उनके शब्दों के छोटे-सटीक अंश शामिल किए जा सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

इब्रानियों 5:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि हर एक महायाजक भेंट, और बलिदान चढ़ाने के लिये ठहराया जाता है, इस कारण अवश्य है, कि इसके पास भी कुछ चढ़ाने के लिये हो।

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और हर एक याजक तो खड़े होकर प्रतिदिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते; बार-बार चढ़ाता है। (निर्ग. 29:38-39)

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और उन महायाजकों के समान उसे आवश्यक नहीं कि प्रतिदिन पहले अपने पापों और फिर लोगों के पापों के लिये बलिदान चढ़ाए; क्योंकि उसने अपने आप को बलिदान चढ़ाकर उसे एक ही बार निपटा दिया। (लैव्य. 16:6, इब्रा. 10:10,12,14)

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