Old Testament
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इब्रानियों 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और इसलिए उसे चाहिए, कि जैसे लोगों के लिये, वैसे ही अपने लिये भी पाप-बलि चढ़ाया करे। (लैव्य. 16:6)
इब्रानियों 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 7:27 (HINIRV) »
और उन महायाजकों के समान उसे आवश्यक नहीं कि प्रतिदिन पहले अपने पापों और फिर लोगों के पापों के लिये बलिदान चढ़ाए; क्योंकि उसने अपने आप को बलिदान चढ़ाकर उसे एक ही बार निपटा दिया। (लैव्य. 16:6, इब्रा. 10:10,12,14)

लैव्यव्यवस्था 9:7 (HINIRV) »
तब मूसा ने हारून से कहा, “यहोवा की आज्ञा के अनुसार वेदी के समीप जाकर अपने पापबलि और होमबलि को चढ़ाकर अपने और सब जनता के लिये प्रायश्चित कर और जनता के चढ़ावे को भी चढ़ाकर उनके लिये प्रायश्चित कर।” (इब्रा. 5:3)

लैव्यव्यवस्था 16:6 (HINIRV) »
और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा चढ़ाकर अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्चित करे। (इब्रानियों. 5:3, इब्रा. 7:27)
पाठ-भूमिका और संक्षेप
इब्रानीय 5 अध्याय के भीतर यह पाठ बताता है कि उच्च priesthood वाले यीशु के पहले आगमन से पूर्व, उद्धारकर्ता के रूप में प्राकृत-प्रधान पवित्र पदवी के अनुरूप, उन्हें स्वयं के लिये भी पाप-बलि चढ़ानी चाहिए थी। यह तुलना लैवीय व्यवस्था के पुराने उच्चयज्ञ से करके दिखाती है कि प्रभु यीशु ने मानवता के पाप के लिए एक पूर्ण, सार्वभौमिक बलिदान प्रस्तुत किया; न कि केवल एक बार, बल्कि पूर्णता के अनुसार परमेश्वर की इच्छा के अनुसार।
आख्यान का संदर्भ
पद कहता है: “और इसलिए उसे चाहिए, कि जैसे लोगों के लिये,वैसे ही अपने लिये भी पाप-बलि चढ़ाया करे।” यह विचार पुराने नियम के बलिदान विधान—विशेषकर पाप-बलि के पीछे के उद्देश्य को उद्धृत करता है: पाप से मोक्ष पथ को खोलना, पर्व-त्याग आदि के साथ-साथ चेतनात्मक स्वीकृति देना।
पर्दे के पीछे का तात्पर्य
यह पद मुख्य रूप से एक उच्चयज्ञ के प्रकार और उसकी पूर्णता के बीच की तुलना दिखाता है: जो लोग पाप-बलि चढ़ाते हैं, उनके लिये भी अपनी आत्मा-स्वीकृति की आवश्यकता होती है ताकि बलिदान वास्तविक प्रभावी बन सके। परन्तु नये प्रमाण में यीशु स्वयं इस भूमिका में एकदम अपरिहार्य हैं—वे न केवल एक योनि बलिदानी हैं, बल्कि अपने आप को एक दूसरे प्रकार की व्यवस्था के अनुसार समर्पित करते हैं ताकि मानवता के पाप की समस्या का संपूर्ण समाधान हो सके।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) उद्धार का योग: Jésus के बलिदान ने पुराने नियम की प्रकार-उलाहना को पूरा किया। 2) पहचान की आवश्यकता: केवल बलिदान देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे आत्मिक उद्देश्य के साथ स्वीकारना भी आवश्यक है। 3) साक्षी-विश्वास: यीशु के बलिदान से हमारी आस्था को नया जीवन मिलता है—परमेश्वर के साथ पुनर्संपर्क।
अनुशासित तुलना
यह पाठ लैव्य 16:6 से प्रेरणा ग्रहण करता है, जहां उच्चयज्ञ की अभिकथा में स्पष्ट है कि पाप-बलि केवल एक दिखावा नहीं, बल्कि पाप के लिए वास्तविक उपाय है। साथ ही प्रेरितों के लेखन में यीशु को “उच्च याजक” के रूप में प्रस्तुत किया गया है—जो शास्त्र से मेल खाता है कि वह अपने लिये भी बलिदान देता है ताकि मानवता के लिए मार्ग प्रशस्त करे।
कथन-प्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त अर्थ
1) राज-यज्ञ की समाप्ति: पुराने नियम में बलिदानों का क्रम—परन्तु नया विधान बताता है कि वास्तविक उद्धार का मार्ग केवल यीशु के बलिदान से खुलता है।
2) एक उच्चयाजक का अवतरण: यीशु को परमेश्वर के समीप रहने के लिए मनुष्य-स्वरूप माना गया ताकि वह हमारे दोषों का भार अपने ऊपर ले सके।
3) विश्वास के द्वारा जीवन-परिवर्तन: बलिदान की याद से हम अपनी राह को शुद्ध और पवित्र बनाते हैं, क्योंकि हमने प्रेम और पवित्रता से प्रेरित जीवन चुना है।
प्रयोगात्मक निष्ठा
हम कैसे अपने जीवन में इस पाठ को लगाते हैं? यह प्रश्न हमारे दैनिक आचरण में उतरता है—यानी जब भी हमें व्यक्तिगत गलतियों के सामने समझ आए, तो हमें याद रहे कि यीशु के बलिदान ने पथ साफ किया है। साथ ही, पवित्र जीवन के लिए प्रेरणा बनता है कि परमेश्वर के सामने ईमानदारी से उपस्थित हों और दूसरों के लिए भी उद्धार-प्रेरणा को जगाने का प्रयास करें।
सारांश
इब्रानियों 5:3 यह स्मरण कराता है कि धर्मी बलिदान एक पूर्ण और समर्पित उत्तर-demand करता है—हर पाप-संहार के लिए मानव बनकर प्रभु यीशु ने अपने लिये भी बलिदान चढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत किया। पुराने नियम की यथार्थता को उसने अपने ही पूर्णता से पूरा किया, ताकि विश्वासियों को शुद्धता और निर्भयता मिले।
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों से संगत संकेत मिलते हैं; जहाँ भी उद्धरण आये हों, वे संक्षेप में उल्लेखित हैं, और पूर्ण पाठ उद्धरण नीचे नहीं दिया गया है।