Old Testament
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इब्रानियों 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसी प्रकार वह दूसरी जगह में भी कहता है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये याजक है।”
इब्रानियों 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 110:4 (HINIRV) »
यहोवा ने शपथ खाई और न पछताएगा, “तू मलिकिसिदक की रीति पर सर्वदा का याजक है।” (इब्रा. 7:21, इब्रा. 7:17)

इब्रानियों 7:17 (HINIRV) »
क्योंकि उसके विषय में यह गवाही दी गई है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।”

इब्रानियों 7:21 (HINIRV) »
क्योंकि वे तो बिना शपथ याजक ठहराए गए पर यह शपथ के साथ उसकी ओर से नियुक्त किया गया जिस ने उसके विषय में कहा, “प्रभु ने शपथ खाई, और वह उससे फिर न पछताएगा, कि तू युगानुयुग याजक है।”
इब्रानियों 5:6 — याजक मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये
पद के संदर्भ में यह वाक्य उस प्रसंग का हिस्सा है जिसमें लेखक यह समझाते हैं कि यीशु को मानवीय प्रवृत्ति और परमपित्री उत्तराधिकारी के रूप में महिमा दी गई है। याकूब के पढ़े जाने वाले दैवीय आह्वान में पहले से वर्णित उच्च याजक व्यवस्था से प्रेरित होकर लिखा गया है कि जीवित परमेश्वर के पुत्र के रूप में यीशु का दायित्व अनंत और अपरिवर्तनीय है, न कि केवल पृथ्वीपर लोक में सीमित। यहाँ “तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये याजक है” यह दर्शाता है कि यीशु की याजकता एक नये कट्टर या स्थायी स्वरूप में है, जो मनुष्यों के लिए उद्धार की चढ़ाई बनती है.
मुख्य विचार
दो-तीन प्रमुख विषय
1) परमेश्वर की योजना में निरंतरता: पुराने प्रतीकों के पीछे भी नया विधान है; मलिकिसिदक एक प्रभावशाली संकेतक थे, परन्तु यीशु की याजकता उसे पार कर देती है क्योंकि वह अनंत है।
2) उद्धार के माध्यम का नया आयाम: यीशु की याजकत्वता पाप के लिए क्षमा नहीं रहती, बल्कि उसे दूर करने और एक नया संपर्क स्थापित करने की व्यवस्था को स्थिर बनाती है।
Related passages (संक्षिप्त सन्दर्भ) और समझ
1) कौल 7:17-21— मलिकिसिदक की रीति में स्थिरता का संकेत; 2) रोम 8:34— यीशु का मध्यस्थत्व आकाश में पिता के सम्मुख है; 3) हेब 7:24-28— यीशु की याजकत्व की अनंत योग्यता और उसकी प्रेरणा।
इन संदर्भों में पाया जाता है कि सत्य ईश्वर के साथ हमारे संबंध का आधार नहीं टूटता और यीशु केवल सांसारिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आध्यात्मिक न्याय-निर्वहन में अटल है।
व्यावहारिक विचार
क्या आप अपनी दैनिक विश्वास-जीवन में यीशु के याजकत्व को अनुभव करते हैं? यह पद提醒 देता है कि हमारी उम्मीद एक ऐसे मध्यस्थ पर है जो हर प्रकार की कठिनाई और पाप से ऊपर उठकर हमारे साथ रहता है। उसे पितृवत प्रेम, दया, और सत्य के साथ आगे बढ़ते हुए देखें; वह हमारी कमजोरी के बीच में भी स्थिर है।
छोटा समापन
इब्रानियों 5:6 हमें बताता है कि यीशु का याजकत्व मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये है—यानी वह हमारे लिए एक अविनाशी, पूर्ण और प्रभावशाली उद्धारकर्ता है। यह अवधारणा पुराने प्रतीकों से आगे बढ़कर हमें विश्वास की मजबूती और परमेश्वर के चिरस्थायी प्रेम की गारंटी देती है।
Cross-references
• रोम 8:34— यीशुediatric मध्यस्थ है जो परम-पिता के सामने हमारे पक्ष में है; यह दर्शाता है कि उद्धार का मार्ग दिव्य पुनर्गठन से स्थिर रहता है।
• हेब 7:24-28— यीशु की याजकत्व की अनंतता और उसकी पूर्णता; वह न कभी अपर्याप्त था न कभी बदला जाएगा।
• कौल 7:17-21— मलिकिसिदक-रीति की स्थिरता और नये विश्वास के परिप्रेक्ष्य में यीशु का प्रमुख स्थान।
कुल मिलाकर यह पाठ बताता है कि यीशु का याजकत्व, मलिकिसिदक की उच्च रीति के बाहर जाकर, हमारे लिए सदा के लिए उद्धार का आधार बनता है।