Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीइब्रानियों 5:14 बाइबल पद की व्याख्या
इब्रानियों 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर अन्न सयानों के लिये है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियाँ अभ्यास करते-करते, भले-बुरे में भेद करने में निपुण हो गई हैं।
इब्रानियों 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 कुरिन्थियों 2:14 (HINIRV) »
परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उसकी दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उनकी जाँच आत्मिक रीति से होती है।

1 कुरिन्थियों 2:6 (HINIRV) »
फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होनेवाले हाकिमों का ज्ञान नहीं;

यशायाह 7:15 (HINIRV) »
और जब तक वह बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना न जाने तब तक वह मक्खन और मधु खाएगा।
हिन्डी टिप्पणी: इब्रानियों 5:14 का गूढ़ अर्थ
यह पद प्राचीन चर्च के भीतर बाइबल समझ के एक महत्त्वपूर्ण क्षण को दर्शाता है—आशिष्यों के धीरे-धीरे उन्नत आध्यात्मिक discernment की आवश्यकता। यहाँ कहा गया है कि अन्न (खाद्य) केवल बच्चों के लिए नहीं, बल्कि सयानों के लिए है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियाँ अभ्यास से भले-बुरे में भेद करने में निपुण हो गई हैं। यह विद्युत स्पष्टता ईश्वरीय उपदेशों और आशीर्वादों को सही ढंग से पहचानने की क्षमता पर केंद्रित है।
पहचान और संदर्भ: अध्याय और पाठ की स्थिति
यूहन्ना-धर्मग्रंथों के परिप्रेक्ष्य में इब्रानियों का लेखक बताता है कि मसीह के सुसमाचार को पूर्ण रूप से समझना तब संभव है जब हम गहरे आध्यात्मिक व्यवहार में स्थिर हों। अध्याय 5 के अंत में यह विचार उभरता है कि पवित्र दिव्य ज्ञान के लिए प्रारम्भिक वर्षों में पवित्र शास्त्रों की सरल बातें सीखना पर्याप्त हो सकता है, पर जैसे-जैसे विश्वासी बड़ा होता है, उसे गहरे सत्यों और नैतिक निर्देशों को भेदना सीखना पड़ता है।
मुख्य शिक्षण: भेद-ज्ञान की परिपक्वता
इस पद का मुख्य संदेश है—जैसे शाकाहारी भोजन बच्चों के लिए उपयुक्त होता है, वैसे ही धर्मी शिक्षित लोग परिपक्व, गहरे अध्यात्मिक निर्णयों और नैतिक discernment के लिये तैयार होते हैं। अभ्यास के कारण ज्ञानेन्द्रियाँ उत्तरोत्तर स्पष्ट होती जाती हैं। निपुणता केवल ज्ञान का प्रश्न नहीं, बल्कि व्यवहार का परिणाम है—आचार-व्यवहार, इमानदार निर्णय और सत्य के प्रकाश में निर्णय लेना।
पवित्र-टीका से संगत विचार
टिप्पणीकार Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के विचार इस धारणा को उजागर करते हैं कि आत्मिक वृद्धि का संकेत मात्र पवित्र उपदेश सुनना नहीं, बल्कि उसका प्रभावी अभ्यास है। Henry कहते हैं कि परमेश्वर के वचन के गहरे भाग तब समझ में आते हैं जब व्यक्ति उसे आत्म-उत्प्रेरणा के साथ व्यवहार में उतारता है। Barnes इस बात को प्रमुखता देते हैं कि भेद केवल ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिक विवेक है—जो भलाई और बुराई के अंतर को जीवन में प्रकट करता है। Clarke समाहित करते हैं कि ज्ञान-आचार का यह तुलनात्मक परीक्षण शिष्य की स्थिरता और दृढ़ता के साथ जुड़ा है—जो अभ्यास से विकसित होता है।
संक्षेप में, यह पद यह बताता है कि ईश्वर के सच के गहरे आयामों को समझना तब संभव है जब विश्वासी दृढ़ अभ्यास के साथ सदा-सदा के निर्णयों में सत्यता एवं नैतिक विवेक को प्राथमिकता दें।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में) और उनका योग
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप सार
इब्रानियों 5:14 यह बताता है कि विश्वास-यात्रा में मaturity के साथ ही भेद-ज्ञान आता है—भले-बुरे का सही निर्णय, नैतिक विवेक और दयालु चरित्र का मिश्रण। पूर्व के ज्ञान से आगे बढ़ना, अभ्यास से समर्थ बनना, और हर परिस्थिति में परमेश्वर के वचन को लागू करना इसे संभव बनाता है।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):
Matthew Henry: “परमात्मा के वचन के गहरे भाग तब समझ में आते हैं जब व्यक्ति उसे आत्म-उत्प्रेरणा के साथ व्यवहार में उतारता है।”
Albert Barnes: “भेद केवल ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिक विवेक है—जो भलाई और बुराई के अंतर को जीवन में प्रकट करता है।”
Adam Clarke: “ज्ञान-आचार का यह तुलनात्मक परीक्षण शिष्य की स्थिरता और दृढ़ता के साथ जुड़ा है—जो अभ्यास से विकसित होता है।”