Old Testament
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इब्रानियों 5:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और वह अज्ञानियों, और भूले भटकों के साथ नर्मी से व्यवहार कर सकता है इसलिए कि वह आप भी निर्बलता से घिरा है।
इब्रानियों 5:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 5:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 2:18 (HINIRV) »
क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुःख उठाया, तो वह उनकी भी सहायता कर सकता है, जिनकी परीक्षा होती है।

इब्रानियों 7:28 (HINIRV) »
क्योंकि व्यवस्था तो निर्बल मनुष्यों को महायाजक नियुक्त करती है; परन्तु उस शपथ का वचन जो व्यवस्था के बाद खाई गई, उस पुत्र को नियुक्त करता है जो युगानुयुग के लिये सिद्ध किया गया है।

इब्रानियों 4:15 (HINIRV) »
क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुःखी न हो सके*; वरन् वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तो भी निष्पाप निकला।
वंदनीय पाठ का संक्षेप और उसका विश्वव्यापी पाठ
इब्रानियों 5:2 में कहा गया है कि वह पुरोहित "अज्ञानियों, और भूले भटकों के साथ नर्मी से व्यवहार कर सकता है" क्योंकि वह स्वयं निर्बलताओं से घिरा है। यहाँ लेखक यह बताने का प्रयत्न करता है कि यीशु के उच्च पुजारित्व का एक ठोस पक्ष यह है कि वह हमारी कमजोरियों को समझते हैं और सहानुभूतिपूर्वक हमारी दशाओं में प्रवेश करते हैं। यह verse भगवान के प्रेम और करुणा का गहरा परिचय देता है कि वह दोषीपन और अज्ञान के कारण दंड नहीं देते, बल्कि सहायता और मार्गदर्शन देते हैं।
पाठ का अध्यायगत स्थान और मूल विचार
इस पंक्ति को इब्रानियों के अध्याय 5 में पढ़ना उचित है, जहाँ लेखक यीशु के महायाजकत्व की योग्यता और उससे जुड़े अनुभवों पर रोशनी डालता है। यहाँ उद्धारकर्ता के पुजारी होने का कारण यह है कि वह हमारी कमजोरियों को पहचानता है और उसी तरह प्रेम से उत्तर देता है जैसा एक क्षमा करने वाला मित्र देता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है: परमेश्वर का अगुआपन हमारे लिए यदि हम कमजोरी में हैं, तो भी उसे समझने और सहयोग करने का पथ खोलता है। यीशु ने यह नहीं कहा कि वह कठिनाई से अछूता है; बल्कि उसने अनुभव किया है कि कैसे भावनात्मक, बौद्धिक और नैतिक सीमाओं के भीतर मनुष्य जीवन जीता है। इसलिए अज्ञानियों और भूले भटकों के प्रति नर्मी, करुणा, और सहनशीलता प्रदर्शित की जा सकती है।
अन्य पवित्र शास्त्रों से तुलना
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रभु की सहायता में कमजोरियों के प्रति नर्मी का तत्व एक सतत क्रम है जो विश्वासी को सुरक्षा और दिशा देता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संदर्भ-विवेचन और उद्धरण
यदि आप प्राचीन टिप्पणियों के सहारे गहराई पाना चाहें, तो मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से यह विचारूमुख मिलता है कि येशु ने हमारी कमजोरियों को सहन किया और हमें प्रत्यक्ष सहायता दी। नीचे 2-3 पंक्तियाँ कुरान नहीं, बल्कि वेब टिप्पणियाँ हैं जिनमें वे सामान्यतः यही संदेश दोहराते हैं:
मैथ्यू हेनरी की टिप्पणी से: “उनकी नर्मी वही है जो अज्ञानियों के लिए सहायता बनती है; क्योंकि वह स्वयं भी मानवीय दशाओं से परिचित है।” (सारांश)
एल्बर्ट बार्न्स की टिप्पणी से: “प्रिय उद्धारकर्ता का उच्च पुजारीत्व हमें विश्वास देता है कि हम हर कमजोरी के बीच विश्वास से आ सकते हैं।” (सारांश)
एडम क्लार्क की टिप्पणी से: “क्रिस्टोबल करुणा के माध्य से विचलित नहीं होते, बल्कि सहनशीलता और प्रेम से पढ़ाते हैं।” (सारांश)
नोट: ऊपर उद्धृत पंक्तियाँ उपयुक्त सार हैं; पूर्ण उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तब नीचे उद्धृत नहीं होते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त)
याकूब 5:11: धैर्य और परमेश्वर की करुणा का पाठ; यह हमारे लिए प्रेरणा है कि कैसे विपत्ति के बीच भी विश्वास पर टिके रहें।
कुरिन्थियों 2:7-8: क्षणिक अस्फुटता के बावजूद मसीह की करुणा की महिमा; क्षमा और विनम्रता के साथ जीवन जिएं।
यूहन्ना 1:9: सच समझ और प्रकाश में आना; अज्ञान के बीच भी परमेश्वर निकट रहता है।
संक्षेप
इब्रानियों 5:2-के भाव से यह स्पष्ट है कि यीशु का उच्च पुजारीत्व हमारी कमजोरियों से परिचित है और अज्ञानियों के साथ सहानुभूति उसके प्रेम का प्रमाण है। यह शिक्षा विश्वासियों को हिम्मत देती है कि वे अपने डर और गलतियों के साथ भी उनके पास जा सकें, और धीरे-धीरे ईश्वर की कृपा से मार्गदर्शन पाएँ।