Old Testament
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इब्रानियों 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सिद्ध बनकर*, अपने सब आज्ञा माननेवालों के लिये सदा काल के उद्धार का कारण हो गया। (यशा. 45:17)
इब्रानियों 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 12:2 (HINIRV) »
और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले* यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुःख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। (1 पत. 2:23-24, तीतु. 2:13-14)

इब्रानियों 2:10 (HINIRV) »
क्योंकि जिसके लिये सब कुछ है, और जिसके द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुँचाए, तो उनके उद्धार के कर्ता को दुःख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।

इब्रानियों 9:15 (HINIRV) »
और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ* है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्त विरासत को प्राप्त करें।
इब्रानियों 5:9 — संदर्भ और अर्थ
यह पद फर्माइशी रूप से बताता है कि यीशु मसीह ने अपने जीवन के तप और परीक्षा के बाद परम सेवक बनकर, वे सदा के उद्धार के लिए सदा के लिए पूरक मार्ग बना दिए। इस आयत में उद्धार की शास्त्रीय ढाल मिलती है: वह जन्म से नहीं, बल्कि परीक्षणों में विजय और आज्ञा मानने में पूर्ण बनाने के बाद उद्धार का कारण बन गया।
पद की Immediate Setting (आनुषंगिक संदर्भ)
यह वाक्य इब्रानियों के अध्याय 5 के मध्यम भाग से जुड़ा है, जहाँ लेखक यीशु के उच्च Priesthood के महत्व पर प्रकाश डालता है—कैसे वह शहादा करने के लिए नहीं बल्कि हमारे लिए पूर्णतया समर्पित होकर परमप्रियता के साथ प्रभुता धरते हैं। यहां “सिद्ध बनकर” से अर्थ है एक पवित्र, प्रेरित और पूर्ण रूप से मोहित व्यक्ति, जिसने मानवजाति के बंधन में रहते हुए भी अपने धार्मिक कर्तव्य को स्वयं पूरा किया।
क्या बताता है यह पाठ—ईश्वर और विश्वास के बारे में
वह उद्धारकर्ता जिसने अपने आज्ञा मानने में आदर्श स्थापित किया, वह आज भी हमारे लिए एक सन्देश बनकर खड़ा है: विश्वास का आलंबन, प्रत्यक्ष आस्था, और परमपवित्रता का उदाहरण। यह दिखाता है कि उद्धार एक गतिशील प्रक्रिया है—हमारे लिए वह एक निहित जीवन-शैली बन जाता है, न कि केवल एक इतिहासिक घटना।
शब्दों और प्रतिमाओं की स्पष्ट व्याख्या
“सिद्ध बनकर” का तात्पर्य है एक पूर्ण पवित्रता में स्थापित होना—जो पश्चाताप, विश्वास और आज्ञा मानना के नये जीवन का परिणाम है। “अपने सब आज्ञा माननेवालों के लिये” से उद्धार के विस्तार का संकेत मिलता है कि परमेश्वर के पास एक ऐसी योजना है जिसमें वे जो आज्ञाओं के अनुसार चलते हैं, उनके लिए उद्धार का मार्ग स्थिर है।
सम्बद्ध आयतें और उनका छोटा सार
यशायाह 45:17 में उद्धार के स्थायित्व का संदर्भ, और भजनों की प्रकृति भी इस विचार को पुष्ट करती है कि उद्धार केवल एक क्षण नहीं, बल्कि एक युग-पर्यन्त रहने वाला मार्ग है। साथ ही यह बताता है कि परमेश्वर की कृपा सभी के लिए है, परन्तु विश्वास और आज्ञा मानना उसे प्राप्त करने का मार्ग है।
आज के नैतिक-पाठ और उपयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
• मदत भजन 1-2 के समान विचार: धर्मनिष्ठता और धर्म के साथ जीवन की स्थिरता।
• रोमियों 8:30 में उद्धार की क्रमिकता का उल्लेख: जिसे बुलाया गया, उसे प्रतिष्ठित करते हैं; जो प्रतिष्ठित होते हैं, वे और बढ़ते हैं।
• 1 कुरिन्थियों 1:30 उद्धार के स्रोत के रूप में मसीह की भूमिका को स्पष्ट करता है।
एक सतर्क निष्कर्ष
यह पद हमें स्मरण दिलाता है कि उद्धार एक पुनर्स्थापना-यात्रा है, जिसमें यीशु के जीवन-युग के अनुसार आज्ञा मानना और पवित्र जीवन जीना आवश्यक है। पूर्व के वचन इस नये जीवन के प्रशस्त पथ को समेटते हैं; और हमारे हर दिन के निर्णयों में उद्धार की यह ताजा वास्तविकता दृष्टिगोचर होती है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन विचारों के छोटे संदर्भ संबोधनों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है।