Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीइब्रानियों 5:7 बाइबल पद की व्याख्या
इब्रानियों 5:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यीशु ने अपनी देह में रहने के दिनों में ऊँचे शब्द से पुकार-पुकारकर, और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई।
इब्रानियों 5:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
इब्रानियों 5:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यूहन्ना 17:1 (HINIRV) »
यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आँखें आकाश की ओर उठाकर कहा, “हे पिता, वह घड़ी आ पहुँची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे*,

मरकुस 14:32 (HINIRV) »
फिर वे गतसमनी नाम एक जगह में आए; और उसने अपने चेलों से कहा, “यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ।

लूका 22:41 (HINIRV) »
और वह आप उनसे अलग एक ढेला फेंकने की दूरी भर गया, और घुटने टेककर प्रार्थना करने लगा।
सीधा अर्थ (Meaning at a Glance)
इब्रानियों 5:7 में यीशु की पृथ्वी पर सांसारिक जीवन के अंतिम दौर में उनकी प्रार्थनाओं और विनतियों का उल्लेख उनके आर्त मन और अत्यन्त दबावपूर्ण अनुभवों के साथ है; वे परम पिता से भक्ति के कारण सुने गए। अर्थात जब वे दुःख और मृत्यु के भय से घबराए थे, तब उनकी मैनश से उठी विनय और विश्वासशैली ने उन्हें सहायता प्राप्त कराई।
पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य (Contextual Background)
यह पद यीशु के उच्च-आत्मिक प्रवृत्ति और सामान्य मानवता दोनों का संयोजन प्रस्तुत करता है—एक पाप-प्रधान दुनिया में ईश्वर के पुत्र का अनुभव, जिसमें वे एक ऐसे कठिन परीक्षण से गुजरते हैं जिसे वे दर्द, आंसू और विनती के साथ सामना करते हैं। लेखक इस अध्याय में बहिर्मुखी महिमा के विरुद्ध आंतरिक यथार्थ दिखाता है: यीशु उच्च-पद के अधिकारी थे, फिर भी उन्होंने गहराई से आत्मीय पश्चाताप, प्रार्थना और माता-पिता की भांति भक्ति-कार्य किया।
व्याख्यात्मक अवलोकन (Interpretive Observations)
थीमेटिक सूची (Thematic Highlights)
संबद्ध पद (Cross-References) और संक्षिप्त व्याख्या
याकूब 1:6 पर अवलोकन: विश्वास के साथ माँगना, बिना संदेह के; आध्यात्मिक दृढ़ता बनती है जब हम परमेश्वर की योजना पर निर्भर रहते हैं।
यूहना 11:41-42 पर अवलोकन: यीशु का आंसुओं के साथ प्रार्थना और पिता के प्रति विनय; परमेश्वर की महिमा के लिए विशिष्ट उत्तर।
य romans 8:26-27 पर अवलोकन: आत्मा हमारी कमजोरताओं में मदद करता है और परमेश्वर के अनुरूप प्रार्थना को गढ़ता है।
व्याख्यात्मक सार (Integrated Commentary Summary)
यह पद दिखाता है कि यीशु का जीवन उच्च आशीषों के साथ भी मानव अनुभवों से भरा था। आँसू और गर्व-रहित विनती उनके निर्भर-जीवन के प्रमाण हैं। भक्ति के कारण परमेश्वर की कृपा सुननी पड़ी—यह वही गवाही है जो भविष्य के संघर्षों में भी विश्वसनीय मार्गदर्शन देती है।
सारात्मक निष्कर्ष (Practical Takeaway)
उद्धृत टिप्पणीकारों के कुछ प्रभावी बिंदु (Note on Quotations)
मनोरम शब्दों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से प्रेरणा ली गई है। इस पंक्ति के संदर्भ में इन विद्वानों के विश्लेषणों के आधार पर, “भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” जैसी अनुभूतियाँ मानवीय विवेक और ईश्वर-आश्रितता की गहराई दिखाती हैं।