Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीइब्रानियों 4:16 बाइबल पद की व्याख्या
इब्रानियों 4:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट साहस बाँधकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
इब्रानियों 4:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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इब्रानियों 4:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 7:25 (HINIRV) »
इसलिए जो उसके द्वारा परमेश्वर के पास आते हैं, वह उनका पूरा-पूरा उद्धार कर सकता है, क्योंकि वह उनके लिये विनती करने को सर्वदा जीवित है। (1 यूह. 2:1-2, 1 तीमु. 2:5)

इब्रानियों 10:19 (HINIRV) »
इसलिए हे भाइयों, जब कि हमें यीशु के लहू के द्वारा उस नये और जीविते मार्ग से पवित्रस्थान में प्रवेश करने का साहस हो गया है,

इब्रानियों 4:16 — अनुग्रह के सिंहासन के निकट पहुँचने का साहस
पद का तात्पर्य और पृष्ठभूमि: यह पत्र नयी प्रतिज्ञा के प्रकाश में शास्त्रीय और आध्यात्मिक अनुभवों के संदर्भ में लिखा गया है। लेखक यह बताता है कि ईश्वर के राज्य के भीतर प्रवेश पाने के लिए हमें सीधे आकर अनुरोध करना चाहिए—अनुग्रह के सिंहासन के निकट, बिना भय के और निर्भय होकर। इस पद में “अनुग्रह के सिंहासन” एक उत्साहवर्धक चित्र है जो परमेश्वर की कृपा और माफी को दर्शाता है, न कि किसी ढीले भाव के साथ ही प्रार्थना की अनुमति। हमारा साहस उसका एक बुलावा है कि हम आवश्यक समय पर उसकी सहायता पाएँ।
ईश्वर का एकत्व और विश्वास पर निर्भरता
यह वाक्य सिद्ध करता है कि विश्वासयोग्य व्यक्ति के लिए परमेश्वर approachable है—हम उससे सहायता मांगते हैं, वह हमें दया और समयानुसार मदद प्रदान करते हैं। यह न केवल दर्शनिक विचार है, बल्कि व्यवहारिक आयाम भी देता है: वास्तविक विश्वास में निराशा के क्षणों में भी दिल खोलकर उसनाथ प्रार्थना की जाती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध (cross-references) और उनका संयोग
इन तर्ज पर विचार करने योग्य कुछ अन्य पाठ ये हैं—
इन संदर्भों से ज्ञात होता है कि प्रार्थना एक जीवित संबंध है, जो भय से नहीं बल्कि विश्वास से आता है, और दया का भवन ईश्वर के पास है।
हेतु-आधार: आज के लिए कैसे लागू करें
समापन: एक संयुक्त विश्लेषण
यह पद हमें सुरक्षा देता है कि परमेश्वर के निकट पहुँचना किसी अपराधी-गंभीरता की नहीं, बल्कि प्रेम-आधारित विश्वास की प्रक्रिया है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रस्तुत सार विचारों के मिलन से एक स्पष्ट संदेश निकलता है: धार्मिक जीवन में दृढ़ विश्वास, निरंतर प्रार्थना, और जरूरत के समय पर उसकी कृपा में आश्रय—यही वास्तविक प्रवेश का मार्ग है। Henry कहते हैं कि विश्वास के स्थान पर साहस रखना अनिवार्य है; Barnes इसे दया और सहायता की निरंतर उपलब्धता से जोड़ते हैं; Clarke इसे ईश्वर की नित-नया कृपा स्रोत बताती हैं।