Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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इब्रानियों 7:25 का अर्थ सरल शब्दों में
इस पद का सार यह है: यीशु मसीह के Mediator के रूप में परमेश्वर के पास आते हुए हर प्रकार के उद्धार की गारंटी है; वह हमारे लिए सभी आवश्यकताओं के साथ जीवित रूप से प्रायश्चित और विनय करता है, इसलिए जो उसे अपनाते हैं, उनका उद्धार सुरक्षित और पूर्ण है।
संदर्भ-स्नippet और पृष्ठभूमि
इब्रानियों के लेखक कहता है कि यीशु आदर्श याजक के पद पर है—जो बार-बार बलिदान नहीं करता, बल्कि एक बार उसकी आत्मीय देह के बलिदान से कार्य पूरा कर देता है। यहाँ 7:25 बताता है कि यीशु हमारे लिए परमेश्वर के पास जाकर हमारे उद्धार के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रार्थना करते रहते हैं, इसलिए हमारे उद्धार को अक्षुण्ण बनाए रखते हैं। 1 यूह मुझे बताता है कि हम में एक सच्चे समर्थक–विनयकर्ता है, जो हमारी दुर्दशा के समय भी मदद करता है; 1 तीमुथियुस 2:5-6 में एक ही Mediator के बारे में बात है। इन आयतों से स्पष्ट होता है कि उद्धार एक निरंतर, जीवित क्रिया है, जो यीशु के माध्यम से क्रमिक नहीं रुकती।
interpretive observations
संक्षिप्त थीम नोट
अनुगमनीय क्रॉस-रेफरेंस
1) 1 यूह 2:1-2 – यीशु हमारे लिए वकील हैं और हमारे पापों के लिए क्षमा प्रदान करते हैं; यह विलय दर्शाता है कि उद्धार एक दृढ़ और स्थिर मध्यस्थता से जुड़ा है।
2) 1 तीमुथियुस 2:5-6 – एक Mediator के स्पष्ट उल्लेख से यह समझना आसान होता है कि प्रभु यीशु ही वह एक मार्ग-नियामक हैं जो सभी के लिए उद्धार का प्रयत्न करते हैं।
3) याकूब 4:8 – परमेश्वर के पास आना पक्का और जीवित संबंध बनाता है, यह दर्शाता है कि हमारी विनती और विश्वास एक प्रश्न नहीं, बल्कि जीवित क्रिया है।
पाठ-संदेश से व्यावहारिक निष्कर्ष
जब हम आत्म-ख़ुदी से डरते हैं या संकट में होते हैं, तो शब्दों की बजाय यीशु की जीवित मध्यस्थता आश्वासन देती है कि उद्धार कभी रुकता नहीं; वह हर स्थिति में हमारे लिए समर्थ है। आत्म-विश्वास बनाये रखें: हमारे पास भरोसा है कि वह हमारे लिए प्रतिदिन विनती करते हैं और हमारे उद्धार की दिशा को बनाए रखते हैं।
नोट: इस पाठ से जुड़ी क्लासिकल टिप्पणीकार-रोशनी के भीतर, मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से मुलायम संकेत मिलते हैं कि यीशु की मध्यस्थता और उद्धार का स्थायित्व एक निश्चित परमावश्यकता है, जिसे वे अपने अपने तरीके से व्याख्यात्मक रूप से स्पष्ट करते हैं, परन्तु यहां सार यही है कि उद्धार एक जीवित, निरंतर क्रिया है जो यीशु से जुड़ी है।