Old Testament
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आसरभ है स्पष्टार्थ
याजकों के यहूदियों के संदर्भ में इब्रानियों 7:23 कहता है कि बहुधा कई याजक बनते आए, क्योंकि मृत्यु उन्हें टिके रहने नहीं देती थी। इसका सामान्य अर्थ है कि पूर्वी विधान के याजक मृत्यु के कारण अपने पद से हट जाते थे; इसलिए एक समान याजक की निरन्तरता संभव न थी। इसके विपरीत मसीह हमारे लिए अदृश्य रूप से एक अटूट याजक हैं, जो मृत्यु से ऊपर हैं और वैधानिक अधिकार के साथ पन्नों में स्थिर रहते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद इब्रानियों की पुस्तक में स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के नए विधान के भीतर किस प्रकार यीशु मसीह एक विशिष्ट उच्च याजक के रूप में आता है, जो कि पैगम्बरों और मूर्तियों के यज्ञों से बढ़कर है। पुराने सुसमाचारिक व्यवस्था में याजक एक क्रमिक श्रृंखला के अनुसार पद पर रहते थे; उनकी मृत्यु के कारण उनके स्थान भरते रहते थे।
व्याख्यात्मक बिंदु
थीमेटिक सारांश
कcross-References (संक्षेप व्याख्या)
1) याकूब 1:6–7— विश्वास और स्थिरता में प्रकटन; यह दिखाता है कि आस्था में स्थायित्व का महत्व है, जैसे उच्च याजक के स्थायित्व से सेवकत्व का विश्वास बढ़ता है।
2) रोम 8:34— मसीह हमारे पक्ष में intercede करते हैं; यह हमारे लिए प्राथमिक सुरक्षा का प्रमाण है, कि वह मृत्यु से ऊपर हैं।
3) Heb 9:11–12— मसीह नई और परम चित्त की व्यवस्था के आरम्भकर्ता हैं, जिसमें रक्त के बिना याजकत्व की अपेक्षित पूर्णता मिलती है।
व्यावहारिक Takeaway
विश्वासी को यह स्मरण रखना चाहिए कि पुराने याजकों की परिवर्तनशीलता 우리의 सुरक्षा की कुंजी नहीं है; यीशु मसीह एक अचल आधार हैं जिनके द्वारा हमारा दोष-रहित पाप-सुधार संभव होता है। आत्म-विश्वास में स्थिर रहें और क्योंकि वह हमारे लिये बार-बार नहीं मरते, इसलिए हम उद्धार की पूरी आशा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
इस पाठ से स्पष्ट होता है कि मसीह एक अद्वितीय उच्च याजक हैं जिनकी सेवा मृत्यु से बाधित नहीं होती; यही उनके और पुराने याजकों के बीच मुख्य विभेद है।
याद दिलाने योग्य उद्धरण (अगर उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के खुले उद्धरण यदि स्थान मिलें तो—“याजक मृत्यु से बंधे रहते थे”; “मसीह के योग्य याजकत्व का स्थायित्व”; “नए विधान के पूर्णता में उनका कार्य समाप्त नहीं होता।”