Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
इब्रानियों 7:1 इब्रानियों 7:2 इब्रानियों 7:3 इब्रानियों 7:4 इब्रानियों 7:5 इब्रानियों 7:6 इब्रानियों 7:7 इब्रानियों 7:8 इब्रानियों 7:9 इब्रानियों 7:10 इब्रानियों 7:11 इब्रानियों 7:12 इब्रानियों 7:13 इब्रानियों 7:14 इब्रानियों 7:15 इब्रानियों 7:16 इब्रानियों 7:17 इब्रानियों 7:18 इब्रानियों 7:19 इब्रानियों 7:20 इब्रानियों 7:21 इब्रानियों 7:22 इब्रानियों 7:23 इब्रानियों 7:24 इब्रानियों 7:25 इब्रानियों 7:26 इब्रानियों 7:27 इब्रानियों 7:28



इब्रानियों 7:18 पर टिप्पणी — एक नई दृष्टि के साथ समझना
इस विचारशील पाठ में लेखक बताता है कि परम पुरानी व्यवस्था के एक नियम का औचित्य क्षीण पड़ गया है; क्योंकि यह पहली आज्ञा निर्बल और निष्फल हो गई है। अधिक स्पष्ट करें तो यह संदेश है कि नई व्यवस्था ने पुरानी के कमजोर स्थानों और उसके पूर्ण होने की आवश्यकता को उजागर किया। यह पाठ ईश्वरीय प्रतिज्ञाओं के सच को बनाए रखते हुए पुराने मंदिर-नियमों की सीमा दिखाता है और हमें यीशु मसीह के उद्धार पर ध्यान केन्द्रित करने को कहता है।
पल्ले में अध्याय के भीतर यह verse
7वीं अध्याय में लेखक एक क्रम के भीतर दो बातों पर प्रकाश डालते हैं: (1) पुरानी व्यवस्था के उच्च priesthood का अस्थायी एवं अपर्याप्त होना; (2) उसके स्थान पर एब्राहीम के घृणित वंश के माध्य ter से आने वाले नया priesthood, जो उद्धार की पूर्णता देता है। इस verse में स्पष्ट किया गया है कि पहली आज्ञा निर्बल है और निष्फल हो गई, अर्थात् यह व्यवस्था अपनी सीमा के कारण पूर्ण नहीं हो सकती।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
मुख्य संदेश यह है कि जिस प्रकार पुराने कानूनों का परमेश्वर के लक्ष्य तक पहुँचना कठिन था, उसी प्रकार उनमें मानव-निर्वाह की कमियाँ भी थीं। यीशु मसीह के आने के बाद, विश्वास के द्वारा उद्धार की पूर्णता मिलती है; पुरानी व्यवस्था की “निर्बलता” और “लोप” उसे पूर्ण ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं थी। ईश्वर का उद्देश्य नये विधान के द्वारा साकार हुआ—जहाँ पूर्णता और स्थिरता केवल उद्धारकर्ता में है।
समान विचार के बहन-रेफरेंस-तुलना
उपरोक्त cross-reference बताते हैं कि पुरानी व्यवस्था की निर्बलता से उभरकर नया विधान कैसे उद्धार और पवित्र जीवन के लिए आधार बनता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
हम कैसे इसे अपने जीवन पर लागू करें? पहले, जो पुरानी सोच हमारे भीतर “सब कुछ किसी एक नियम से हो जाएगा” जैसी सोच दे देती है, उसे सौंप दें—यीशु के कारण वास्तविक परिवर्तन आता है। दूसरे, विश्वास-आधारित जीवन जीना सिखें: उद्धार का स्रोत और विश्वास की सफलता यीशु के पास है, न कि अपने पिछले रीति-रिवाजों के प्रदर्शन पर। तीसरे, दूसरों के साथ धैर्य और करुणा से प्रस्तुत हों, क्योंकि ईश्वर ने हमें एक नई प्रतिज्ञा दी है जो स्थिर और पूर्ण है।
संक्षेप
7:18 में स्पष्ट किया गया है कि पुरानी व्यवस्था की पहली आज्ञा निर्बल और निष्फल हो गई; इसका मर्म यह है कि उद्धार के लिए नया, स्थिर और पूर्ण priesthood आवश्यक था। इसके पीछे का परम संदेश है—यीशु मसीह के माध्यम से ही हमारी पाप-रिपोषण और परमेश्वर के साथ पुनः संवाद संभव है। यह समझ हमें अद्भुत विश्वास की नई दिशा देता है, जिसमें हम पुराने नियमों को सहयोगी दृष्टि से देखते हैं और उनके पूर्ण उद्देश्य तक पहुँचते हैं।
कोट-उद्धरण (ऐतिहासिक Commentary से): - Matthew Henry: “...the first commandment is weak, and is abolished because of its infirmities.”
एडम क्लार्क/आल्बर्ट बार्न्स के संकेत: - Adams Clarke और Albert Barnes के आलोचनात्मक संकेत पुरानी व्यवस्था की कमजोरी और नए पुनीत appointed priesthood की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं; विशिष्ट शब्द-रचना का संक्षिप्त सार नीचे दिया गया है.
स्पष्ट cross-रेफरेंस: रोमियों 8:3-4; हेब्रियंस 9:11-15; याकूब 1:25