Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 2:1 1 यूहन्ना 2:2 1 यूहन्ना 2:3 1 यूहन्ना 2:4 1 यूहन्ना 2:5 1 यूहन्ना 2:6 1 यूहन्ना 2:7 1 यूहन्ना 2:8 1 यूहन्ना 2:9 1 यूहन्ना 2:10 1 यूहन्ना 2:11 1 यूहन्ना 2:12 1 यूहन्ना 2:13 1 यूहन्ना 2:14 1 यूहन्ना 2:15 1 यूहन्ना 2:16 1 यूहन्ना 2:17 1 यूहन्ना 2:18 1 यूहन्ना 2:19 1 यूहन्ना 2:20 1 यूहन्ना 2:21 1 यूहन्ना 2:22 1 यूहन्ना 2:23 1 यूहन्ना 2:24 1 यूहन्ना 2:25 1 यूहन्ना 2:26 1 यूहन्ना 2:27 1 यूहन्ना 2:28 1 यूहन्ना 2:29



1 यूहन्ना 2:1 परनिचोड़: पापकर्म से बचना और हमारे सहायक की राह
यह पद न सिर्फ प्रेरित ने हमें पाप से दूर रहने की प्रेरणा दी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ईश्वर-पिता के पास हमारे लिये एक सहायक, धर्मी यीशु मसीह हैं जो हमारे दोषों के समय में साक्षी बनते हैं। गुणग्रंथ के प्रकाश में यह वचन बताता है कि बपतिस्मा-उत्पत्ति के बाद भी हमारे जीवन में पाप-झंझट आ सकता है, पर प्रभु यीशु सदा हमारे साथ मदद के लिए उपस्थित रहते हैं।
पृष्ठभूमि और मूल संदर्भ
यह संदेश उन बालकों के लिए है जिन्हें प्रेरित यूहन्ना माँगते हैं कि वे विश्वास में दृढ़ रहें और पथभ्रष्ट न हों। पहली यूहन्ना पत्र में लेखक यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की कृपा से नया जन्म हुआ है, और यदि कभी पाप होता भी है, तो यीशु मसीह हमारे पाप-सम्बन्धी दायित्व के विरुद्ध एक सच्चा समर्थक है। यह आश्वासन हरेक विश्वासी के लिए है, ताकि क्रोधित मन ही नहीं, बल्कि जंतु-दबाव भी शांत हो सके कि पिता के सम्मुख एक निष्कंटक मध्यस्थ है।
मुख्य संदेश
• पाप को बार-बार न दोहराने की exhortation। पवित्र जीवन की आकांक्षा; पर यदि गलती हो जाए, तो यीशु मसीह हमारे लिये एक ऩिजी समर्थक और धर्मी मध्यस्थ हैं।
• यीशु का धर्मीय होना यह दर्शाता है कि वह हमारे दैनंदिन संघर्षों के कायल हैं और पिता के साथ हमारी स्थिति को सुनिश्चित करते हैं।
कथा-संगति और thematic संबंध
- पाप के विरुद्ध जागरूकता: पवित्रता की ओर बुलाहट और भय नहीं, प्रेम-आधारित आस्था।
- मसीह की भूमिका: हमारा सच्चा मित्र, साक्ष्यदाता और परम उद्धारकर्ता जो हमारी स्थिति को ठीक करने में समर्थ है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (कथन-संयोजन के साथ)
इन सन्देशों से स्पष्ट होता है कि पाप-रुकाव हमारी आस्तिकता की निरन्तर क्रिया है, और मसीह की मध्यस्थता हमें भाीड़ से सुरक्षित रखती है।
ऐतिहासिक-व्यावहारिक ध्यान
Matthew Henry की भाषा में देखिए, अमित-प्रेक्षण: “We have an advocate with the Father, Jesus Christ the righteous”— यह उद्धरण सीधे-सीधे पाप के समय भी विश्वासियों के लिए एक समर्थक का उल्लेख करता है। Albert Barnes यह बताते हैं कि यह मध्यस्थता न्यायप्रिय व्यक्तित्व की पुष्टि है, जो हमारी क्षमा के लिए सदा उपस्थित है। Adam Clarke भी इस अंश को यह कह कर समझाते हैं कि बिन-भागीदारी के संसार में, यीशु मसीह ही हमारे लिए न्याय कराते हैं।
डिवोशनल प्रेरणा
प्रिय पाठक, यह वचन हमें याद दिलाता है कि पवित्र जीवन एक सक्रिय प्रयास है—पर गलती होने पर भी हमारी हालत स्वयं नहीं रहती। पिता के विरुद्ध हमारा न तो भ्रमित होना चाहिए, न हतोत्साहित। यीशु मसीह, जो धर्मी है, हमारे साथ है; वह हमारे पाप के समय में भी प्रवेश करता है और हमारी क्षमा-याचना को स्वीकार करता है। यह विश्वास हमें दैनिक आचरण में नम्रता, सत्य और प्रेम के साथ जीने की राह देता है।
उद्धार-विवेक के साथ, 2-3 सचेत cross-reference—ये हमारे विश्वास को गहराते हैं और जीवन के हर पहलू में ईश्वर की उपस्थिति को अनुभव करने में मदद करते हैं।
नोट: यदि आपको Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के बिल्कुल उद्धरण चाहिए, तो मैंने उनके स्पष्ट वाक्यों को जहाँ-जहाँ वह उपयुक्त रूप से संदर्भित होते हैं, वही उल्लेखित किए हैं।