1 यूहन्ना 2:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैंने तुम्हें इसलिए नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिए, कि तुम उसे जानते हो, और इसलिए कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं।

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1 यूहन्ना 2:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का संक्षेप परिचय

1 यूहन्ना 2:21 में प्रेरित योहन्ना पाठक को स्पष्ट कर रहे हैं कि उन्होंने सत्य के बारे में पूछा नहीं, ताकि वे सत्य से अनजान रहें, बल्कि इस लिए कि वे जानते हैं, और इसलिए कि कोई झूठ सत्य से नहीं जुड़ सकता। यह-वाक्य मूल रूप से जीवन-सत्य की पुष्टि और झूठ के विरुद्ध दृढ़ विश्वास को प्रकट करता है: ईश्वर की रोशनी में आकर सच मानना और शील के साथ आत्मविश्वास रखना।

पद का पाठ-सम्बद्ध पृष्ठभूमि

यह पत्र प्रेरित यूहन्ना के उत्तर-आधुनिक संदर्भ में लिखी गई है, जहाँ धार्मिक भेदभाव और वास्तविक पहचान की माँग है। 2:18–23 के प्रसंग में झूठे शिक्षकों ने कहा कि मसीह अभी नहीं आया है; पर यूहन्ना प्रगट करते हैं कि जो सच को जानता है, उसे सत्य की पुष्टि मिलती है। 2:21 इस नज़रिए को साफ करता है कि वे पहले से सत्य जानते हैं—झूठ उनकी दिशा में नहीं आ सकता।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

इस verse का मुख्य पाठ यह है: सत्य की वेदना नहीं, बल्कि सत्य की सुरक्षा। विश्वासी को ईश्वर के सत्य के साथ स्थित होना चाहिए; बरकत यही है कि गलत-विचार उसे नहीं छू पाते। झूठ वही है जो ईश्वर के प्रकाश से दूरी बनाता है; जो सत्य में है, उसे झूठ से अलग किया जा सकता है। यह हमें यीशु मसीह के प्रमाणीकरण के संगत रहने के लिए संकेत देता है—यही कारण है कि सच जानना और उसे मानना आवश्यक है।

अन्य बाइबल अंशों से संगति

  • यूहन्ना 8:32 — "और तुम सत्य को जानोगे, और सत्य तुमको मुक्त करेगा"। यह दर्शाता है कि सत्य से आज़ादी मिलती है, जबकि झूठ जंजीर बनता है।
  • यूहन्ना 14:6 — यीशु का उद्घोष: 'मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ'। सत्य का केन्द्र ईसा मसीह हैं; उनके बिना सत्य के पथ का ज्ञान अधूरा रहता है।
  • 1 थिस्सलु.nic 5:21 — "पर जांचो सब बातों को; जो शुभ लगे, उसे ग्रहण करो"। सत्य को स्वीकारना और झूठ की जाँच करना आवश्यक नैतिक पक्ष है।

छोटा-सा व्यावहारिक अनुप्रयोग

पाठ के भीतर का एकीकृत निष्कर्ष

1 यूहन्ना 2:21 कहता है कि सत्य को पहचानना और उसे पकड़ना एक ईश्वरीय कृपा है। इससे यह अनुमान होता है कि हमारा आचरण सत्य के अनुरूप होना चाहिए, और झूठ से सावधान रहना चाहिए, ताकि हमारी आस्था वास्तविक और जीवंत रहे।

संक्षेप में

जो सत्य को जानता है, उसे झूठ से नहीं जोड़ा जा सकता। यह वाक्य, सत्य की दिव्यता को मानते हुए, विश्वासियों को उनकी पहचान की पुष्टि कराता है और झूठ के चित्र से दूर रहने की प्रोत्साहना देता है।

Cross-references (संयुक्त மேற்கोण)

यूहन्ना 8:32 — सत्य से मुक्त होना; यूहन्ना 14:6 — ईसा ही सत्य है; 1 थिस्सलु.nic 5:21 — सत्य की जाँच करना और पालना करना।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 2:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 पतरस 1:12 (HINIRV) »
इसलिए यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उसमें बने रहते हो, तो भी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूँगा।

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यहूदा 1:5 (HINIRV) »
यद्यपि तुम सब बात एक बार जान चुके हो, तो भी मैं तुम्हें इस बात की सुधि दिलाना चाहता हूँ, कि प्रभु ने एक कुल को मिस्र देश से छुड़ाने के बाद विश्वास न लानेवालों को नाश कर दिया। (इब्रा. 3:16-19, गिन. 14:22-23,30)

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नीतिवचन 9:8 (HINIRV) »
ठट्ठा करनेवाले को न डाँट, ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे, बुद्धिमान को डाँट, वह तो तुझ से प्रेम रखेगा।

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