Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 2:1 1 यूहन्ना 2:2 1 यूहन्ना 2:3 1 यूहन्ना 2:4 1 यूहन्ना 2:5 1 यूहन्ना 2:6 1 यूहन्ना 2:7 1 यूहन्ना 2:8 1 यूहन्ना 2:9 1 यूहन्ना 2:10 1 यूहन्ना 2:11 1 यूहन्ना 2:12 1 यूहन्ना 2:13 1 यूहन्ना 2:14 1 यूहन्ना 2:15 1 यूहन्ना 2:16 1 यूहन्ना 2:17 1 यूहन्ना 2:18 1 यूहन्ना 2:19 1 यूहन्ना 2:20 1 यूहन्ना 2:21 1 यूहन्ना 2:22 1 यूहन्ना 2:23 1 यूहन्ना 2:24 1 यूहन्ना 2:25 1 यूहन्ना 2:26 1 यूहन्ना 2:27 1 यूहन्ना 2:28 1 यूहन्ना 2:29



1 यूहन्ना 2:22 पर टिप्पणी — झूठा कौन है?
पाइढे गए संदर्भ में यह वचन उस साक्ष्य को स्पष्ट करता है जो श्रोताओं के बीच भ्रम और फरेब को पहचानने के लिए आवश्यक था। प्रेरित योहान्ना इस पत्र में विशेषकर यह स्पष्ट कर रहे हैं कि यीशु मसीह के सचेत अनुभव में विश्वास रखने वाले और न मानने वाले दो समूह हैं। जहां एक ओर ईसाई समुदाय को सत्य के साथ जुड़ना चाहिए, वहीं दूसरी ओर जो यीशु के मसीहत्व को नहीं मानते या पिता और पुत्र के रिश्ते को चुनौती देते हैं, वे "झूठे" माने जाते हैं।
मुख्य अर्थ
पद के शब्द सीधे कहते हैं: झूठा वही है जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है, तथा जो पिता के और पुत्र के वैध रिश्ते को न मानता वह मसीह का विरोधी बन जाता है। यह न केवल एका-तत्ववाद या धार्मिक कुव्यवस्था की चर्चा है, बल्कि यह मान्यता—यानी यीशु ईश्वर के बेटे के रूप में वास्तविक मसीह हैं—की पुष्टि से जुड़ा एक नैतिक-सत्य है। विश्वास के साथ यह भी पूछा जाता है कि जीवन के स्रोत और सेवकाई का केंद्र क्या है: यीशु के अस्तित्व और उसके परमपिता से जुड़ाव को मानना है या नहीं।
तीन प्रमुख थीम
सीधे जुड़े अन्य बाइबल अंश
– यूहन्ना 1:1-3: वचन के साथ मसीहत्व की पुष्टि और जीवन में उसके साथ सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डालता है।
– यूहन्ना 4:15: पिता और पुत्र के एकत्व में विश्वास की पुष्टि और प्रेम के अभ्यास पर जोर।
– योहन्ना 5:9-12: विश्वास से जीवन का प्रमाण और पिता-पुत्र के आधिकारिक दायित्वों की पुष्टि।
व्यावहारिक विचार
विचार-विमर्श में यह समझ जरूरी है कि सत्य की पहचान केवल तर्क से नहीं, बल्कि आस्था और व्यवहार से होती है। जो लोग यीशु के मसीहत्व को स्वीकार नहीं करते, वे अपने जीवन के केंद्र को खोने का खतरा उठाते हैं। ईमानदार विश्वास के साथ नियम-विरोधी धारणाओं से हटकर प्रेम, सत्य और बहुदृष्टि के साथ समुदाय बनाये रखना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 यूहन्ना 2:22 स्पष्ट करता है कि जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है, और पिता-पुत्र के संबंध को केवल सामाजिक-अनुमोदन के लिए नहीं मानता, वही वास्तविक विरोधी बन जाता है। सच का आधार वही है जो यीशुखुशी और परम पितृत्व के बीच असल संबंध को मानता है।
शब्दयोग, महत्त्वपूर्ण उद्धरण
पूर्ववर्ती विद्वानों के पारंपरिक प्रकाशन से संक्षेपित विचारों के साथ यह दर्शाया गया है कि: “झूठा वही है जो यीशु मसीह के होने का इन्कार करता है।” (पूर्व-मुक्त टिप्पणी से संदर्भ)