Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 2:1 1 यूहन्ना 2:2 1 यूहन्ना 2:3 1 यूहन्ना 2:4 1 यूहन्ना 2:5 1 यूहन्ना 2:6 1 यूहन्ना 2:7 1 यूहन्ना 2:8 1 यूहन्ना 2:9 1 यूहन्ना 2:10 1 यूहन्ना 2:11 1 यूहन्ना 2:12 1 यूहन्ना 2:13 1 यूहन्ना 2:14 1 यूहन्ना 2:15 1 यूहन्ना 2:16 1 यूहन्ना 2:17 1 यूहन्ना 2:18 1 यूहन्ना 2:19 1 यूहन्ना 2:20 1 यूहन्ना 2:21 1 यूहन्ना 2:22 1 यूहन्ना 2:23 1 यूहन्ना 2:24 1 यूहन्ना 2:25 1 यूहन्ना 2:26 1 यूहन्ना 2:27 1 यूहन्ना 2:28 1 यूहन्ना 2:29



सीधा अर्थ: आरम्भ से जो सुना वही आपका जीवन बने
1 यूहन्ना 2:24 का संदेश कहता है कि ईश्वर की शुरूआती शिक्षा, जो हमने आरम्भ से सुनी है, उसी को हमारे भीतर स्थिर और जीवित बनाए रखना चाहिए। यदि वही ठहराव हमारे में रहता है, तो हम पुत्र और पिता के साथ बने रहते हैं, अर्थात हमारे संबंधों का स्थायित्व और विश्वास की स्थिति मजबूत होती है।
पात्रभूमि और संदर्भ
यह पत्र यीशु के आत्मिक प्रमाण और विश्वास की परीक्षा के साथ जुड़ा है—लेखक कहता है कि जो शिक्षा apostolic समय से चली आ रही है, वह अब भी सच है और वैसी ही बनी रहे। 2:24-25 में आरम्भ से सुने की स्मृति और उसके अनुसार जीवन जीने की बात पुनः ऊँची कही गई है। यह चेतावनी है कि यदि हमने वही बात नहीं पकड़ी, जो आरम्भ में थी, तो हमारी आस्था अस्थिर हो सकती है।
interpretive observations
तत्संप्रेरक थीमैटिक बिंदु
अन्य उद्धरण-सम्वन्धित अंश
वस्तुनिष्ठता के लिए: परमेश्वर की आरम्भक शिक्षा पर टिके रहना हमें आस्तिक जीवन के एकत्व की ओर ले जाता है।
पवित्र पठन-सम्बन्धी संदर्भ
भरोसे को गिनती में रखने वाले अन्य ग्रंथों से सपष्ट संकेत मिलते हैं, जैसे:
व्यावहारिक_takeaway
1) आरम्भ से सुने संदेशों को याद रखें और नए अनुभवों में उन्हें जिंदा रखें। 2) अपने व्यक्तिगत जीवन में विश्वास-कार्यों का समन्वय करें ताकि आपका संबंध पिता के साथ मजबूत हो। 3) चर्च-जीवन और पवित्र आचरण में स्थिरता बनाकर एक सच्चे पुत्र की तरह बढ़ें।
कॉपीराइट-उद्धरण नोट
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी सतही उद्धरणों के स्पष्ट छोटे अंश देखते हैं, वे यहाँ सीधे उद्धृत नहीं हैं; केवल उनके विचारों की प्रकृति के अनुरूप संकेत दिए गए हैं।
संक्षेप में, यह वचन हमें याद दिलाता है कि आरम्भ से सुना गया सच हमारे भीतर जीवंत रहने पर ही पूर्ण आयाम पाता है—तब ही हम परम पिता और पुत्र के साथ स्थिर संबंध में रहते हैं।