Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 2:1 1 यूहन्ना 2:2 1 यूहन्ना 2:3 1 यूहन्ना 2:4 1 यूहन्ना 2:5 1 यूहन्ना 2:6 1 यूहन्ना 2:7 1 यूहन्ना 2:8 1 यूहन्ना 2:9 1 यूहन्ना 2:10 1 यूहन्ना 2:11 1 यूहन्ना 2:12 1 यूहन्ना 2:13 1 यूहन्ना 2:14 1 यूहन्ना 2:15 1 यूहन्ना 2:16 1 यूहन्ना 2:17 1 यूहन्ना 2:18 1 यूहन्ना 2:19 1 यूहन्ना 2:20 1 यूहन्ना 2:21 1 यूहन्ना 2:22 1 यूहन्ना 2:23 1 यूहन्ना 2:24 1 यूहन्ना 2:25 1 यूहन्ना 2:26 1 यूहन्ना 2:27 1 यूहन्ना 2:28 1 यूहन्ना 2:29



पाठ का सरल परिचय (1 यूहन्ना 2:26 वाणी)
इस व verse में प्रेरित यूहन्ना हमें सचेत रहने की चेतावनी देते हैं कि जो कुछ भी हमें “भरमाते” हैं या गलत मार्ग दिखाते हैं, उनसे सचेत रहें। यह पाठ परमपवित्र के प्रकाश में हमारे विश्वास की सच्चाई की परीक्षा की ओर इंगित करता है—यही कारण है कि हम जान लें कि वे हमारे साथ नहीं, बल्कि भ्रम पैदा करने में प्रयासरत हों।
पाठ के भीतर विचार (चैप्टर-के संदर्भ के साथ)
1 यूहन्ना 2 अध्याय में चेतावनियाँ बहुत स्पष्ट हैं: ऐसा नहीं कि हम संसार के दर्शन से आँखें मोड़ लें, परन्तु जो शिक्षाएं सत्य के हिसाब से नहीं है, उन्हें पहचाने और उनसे दूर रहें। इस आयत में लेखक स्पष्ट रूप से उन लोगों के बारे में बात करते हैं जो “भरमाते” हैं—यानी गलत मार्ग दिखाते हैं जो न केवल सच से भिन्न हो बल्कि विश्वास के लिए खतरा बन जाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ (मुख्य सीख)
अन्य बाइबिल पाठों से संकलन तुलना
– यीशु के उपदेशों के साथ संगतता: दृढ़ विश्वास के लिए सत्यान्वेषण और सत्यान्वेषी शिक्षाओं की पहचान।
– याकूब 1:16-26 जैसे सत्यान्वेषण के साथ काम करना और दुष्प्रचार से बचना।
व्यावहारिक आवेदन
हम किस प्रकार पहचाने कि कोई教श教 गलत मार्ग दिखा रहा है? नीचे के बिंदु मार्गदर्शक हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षिप्त संबंध-विवरण)
• युहन्ना 4:1 — बहकाने वाले स्वभाव के विरुद्ध सच की परीक्षा।
• 1 योहन्ना 4:1-3 — आत्माओं की पहचान के लिए परीक्षण के उपाय।
• 2 जुलाई 3:7 — विश्वास में स्थिर रहने की सीख।
संक्षेप निष्कर्ष
1 यूहन्ना 2:26 कहता है कि हमने जो लिखा है वह उन लोगों के बारे में है जो आपको भरमाते हैं। यह खतरे की सचेतता के बारे में है—हमारे विश्वास की पहचान सत्य से करनी चाहिए और भ्रमित करने वाले संदेशों से बचना चाहिए। यहीं हमारा स्थिरता और विश्वास की सुरक्षा है: सत्य को पकड़ना और प्रेम से व्यवहार करना।
शब्द-शैली में प्रसिद्ध रौशनियाँ (संक्षिप्त उद्धरण)
यदि आवश्यक हो तो हि: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियाँ से प्रेरणा ली जा सकती है, परन्तु यहाँ हमने मूल विचारों को प्रकाश में रखा है ताकि पाठक सीधे संदर्भ को समझ सकें।