Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 2:1 1 यूहन्ना 2:2 1 यूहन्ना 2:3 1 यूहन्ना 2:4 1 यूहन्ना 2:5 1 यूहन्ना 2:6 1 यूहन्ना 2:7 1 यूहन्ना 2:8 1 यूहन्ना 2:9 1 यूहन्ना 2:10 1 यूहन्ना 2:11 1 यूहन्ना 2:12 1 यूहन्ना 2:13 1 यूहन्ना 2:14 1 यूहन्ना 2:15 1 यूहन्ना 2:16 1 यूहन्ना 2:17 1 यूहन्ना 2:18 1 यूहन्ना 2:19 1 यूहन्ना 2:20 1 यूहन्ना 2:21 1 यूहन्ना 2:22 1 यूहन्ना 2:23 1 यूहन्ना 2:24 1 यूहन्ना 2:25 1 यूहन्ना 2:26 1 यूहन्ना 2:27 1 यूहन्ना 2:28 1 यूहन्ना 2:29



1 यूहन्ना 2:20 पर commentary: पवित्र अभिषेक और सत्य ज्ञान
पिछले पाठ में यूहन्ना ने चेतावनी दी है कि जो मसीह के साथ हैं, वे सचेत रहें कि शिष्यत्व में फर्क न हो जाए। इस वचन में लेखक दो बातें स्पष्ट करता है: (1) तुम्हारे पास पवित्र से अभिषेक हो चुका है, अर्थात ईश्वर का पवित्र आत्मा तुम्हारे भीतर है; (2) तुम सभी सत्य जानते हो। यह नहीं कहा गया कि तुम सब कुछ जान लेते हो, बल्कि यह कि तुम जिन सत्यताओं के बारे में त्रुटिरहित ढंग से प्रत्यक्ष अनुभव और आत्मिक पुष्टि पाते हो, वे तुम्हारे भीतर स्थिर और स्पष्ट हैं।
केंद्रीय अर्थ
परमपवित्र आत्मा के अभिषेक के कारण विश्वासी में सत्य की पहचान की सहज क्षमता पैदा हो जाती है। यह आत्मिक अनुभूति बाहरी प्रमाणों की जगह नहीं लेती, परंतु यह बताती है कि ईश्वर का सच कौन सा है और कौन सा धोखा है। इस अभिषेक के साथ, विश्वासी को आत्म-प्रतीति और क्रोधी दबावों के बीच स्थिर रहने की शक्ति मिलती है कि वे कबूल करें कि Jesus Christ ही परम सत्य हैं और उनके बीच की बाधाओं को पार करें।
दो मुख्य थीम
संदर्भित विचार (दृष्टिकोण-शब्द)
यह वही तत्व है जिसे प्रकटीकरण पंक्तियों में Matthew Henry और Adam Clarke ने बोलचाल की भाषा में समझाया है: आत्मा का अभिषेक हमारे अन्तरात्मे को सत्य की गवाही देता है, न कि हमारी बुद्धि की तर्कशक्ति के आधार पर। Albert Barnes इसे ऐसे देखते हैं कि यह अभिषेक एक निरंतर, आत्मिक सच का अनुभव है जो ईश्वर के प्रति हमारे विश्वास को स्थिर बनाता है।
कई संबंधित आयतों से सम्बद्ध विचार
संदर्भ-आयतों से सामान्य अंतर्दृष्टि:
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि अभिषेक और आत्मिक ज्ञान क्रिया-प्रधान हैं—ईश्वर के साथ सम्बन्ध और सत्य की पहचान दोनों एक साथ चलते हैं।
व्यावहारिक विचार
व्यावहारिक जीवन में इसका अर्थ है कि जो सच है, उसे स्वीकारने की सहजता हो। जब एक विचार या दावे से प्रेरित होकर भ्रम फैलने लगे, तब ध्यान दें कि आत्मा का अभिषेक आपको सत्य के अनुरूप निर्णय लेने की दिव्य दिशा देता है। यह ज्ञान न केवल नैतिक सिद्धांतों तक सीमित है, बल्कि व्यवहार में यह दर्शाता है कि आप किस प्रकार प्रेम, ईमानदारी और माफी के साथ जीते हैं।
संक्षेप
1 यूहन्ना 2:20 कहता है कि ईश्वर के पवित्र अभिषेक के कारण आपको सत्य का स्पष्ट अनुभव और ज्ञान प्राप्त है। यह ज्ञान बाहरी प्रमाणों पर निर्भर नहीं है, बल्कि आत्मा-आधारित गवाही है जो हमेशा सत्य के साथ मेल खाती है। यह विश्वासियों को भ्रम और फरेब से बचाता है और सत्य के साथ स्थिर रहने की शक्ति देता है।