Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 15:1 यूहन्ना 15:2 यूहन्ना 15:3 यूहन्ना 15:4 यूहन्ना 15:5 यूहन्ना 15:6 यूहन्ना 15:7 यूहन्ना 15:8 यूहन्ना 15:9 यूहन्ना 15:10 यूहन्ना 15:11 यूहन्ना 15:12 यूहन्ना 15:13 यूहन्ना 15:14 यूहन्ना 15:15 यूहन्ना 15:16 यूहन्ना 15:17 यूहन्ना 15:18 यूहन्ना 15:19 यूहन्ना 15:20 यूहन्ना 15:21 यूहन्ना 15:22 यूहन्ना 15:23 यूहन्ना 15:24 यूहन्ना 15:25 यूहन्ना 15:26 यूहन्ना 15:27



यूहन्ना 15:9 का मूल अर्थ
यूहन्ना 15:9 कहता है: जैसा पिता ने मुझसे प्रेम रखा, वैसे ही मैंने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। इसका मतलब है कि यीशु का प्रेम वही राजमार्ग है जो पिता के प्रेम से प्रेरित होकर हमारे जीवन में स्थिर रहता है; यहां प्रेम का लक्ष्य प्रेम में स्थिरता और भाईचारे के रिश्ते का निर्माण है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह उद्धरण ईसा मसीह के अंतिम दोहरे संदेश के दौरान आता है—उनके पुनःस्थापित प्रेम और उनसे जुड़ाव की बुलाहट। वह उद्धार के संदेश के साथ अपने अनुयायियों के बीच एक गहरे प्रेम-संबंध की मांग कर रहे हैं, ताकि उनके जाने पर भी वे उसी प्रेम को थामे रहें। यह अध्याय 15 में, दाख का वृक्ष-परिकल्पना (येसु वृक्षों के साथ अपने अनुयायियों के रिश्ते) के आलोक में दिया गया है, जहाँ प्रेम की कड़ी बनती है, सेवा की डगर खुलती है और फल देने की प्रेरणा मिलती है।
व्याख्यात्मक बोध
- पिता के प्रेम में रहने का आशय है कि हमारे जीवन की आधारशिला वही प्रेम है जो प्रभु यीशु में प्रकाशित हुआ है। हमारे संबंधों का ढांचा इसी प्रेम के अनुरूप होना चाहिए।
- यीशु ने जो प्रेम दर्शाया है, वही प्रेम उनके अनुयायियों के बीच आदर्श बनकर चलता है—स्वार्थ-रहित, सेवा-प्रधान,故सीसी।
- प्रेम में बने रहना शारीरिक नहीं, बल्कि आस्था, विवेक और कर्म में कठोरता-रहित, परिशुद्धता के साथ जीवित रहना है।
मुख्य विचार (संक्षिप्त सूची)
अन्य उपमा-ग्रंथों के साथ सम्बद्धता
– यूहन्ना 13:34–35: नए commandment के अनुसार प्रेम एक-दूसरे के प्रति यही पहचान है कि हम एक-दूसरे से प्रेम करें। इसका लिंक यहीं दिखता है कि पिता के प्रेम से प्रेरित प्रेम ही वास्तविक एकता बनाता है।
– रोमियों 5:5: हमारे दिलों में प्रेम का अभिषेक होता है, जो हमें परीक्षणों में भी प्रभु के साथ स्थिर रहने के लिए प्रेरित करता है।
– गलातियों 5:22–23: फल के रूप में प्रेम की उपस्थिति जीवन में दिखती है और आत्मा के कामों को प्रमाणित करती है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
1) अपने संबंधों में प्रेम को प्राथमिकता दें; दूसरों के साथ सेवा और सहानुभूति दिखाएं।
2) मुश्किल समय में भी यीशु के प्रेम के मॉडल को याद रखें—स्वार्थ-रहित और उद्घाटन-योग्य प्रेम।
3) विश्वास में स्थिर रहते हुए जीवन के हर क्षेत्र में प्रेम के फल निकलने दें—धीरज, खुशी, संयम और विनम्रता द्वारा।
क्रास-रेफरेंस स्पष्टीकरण
– यूहन्ना 13:34–35: नया आदेश—एक दूसरे से प्रेम करना, जिससे संसार जान सके कि आप मेरे अनुयायी हैं। यह तुलना पिता-प्रेम और यीशु-प्रेम के संबद्धता को दर्शाती है।
– रोमियों 8:28–39: प्रेम में बनी रहने से विश्वासियों की सुरक्षा और आशा मजबूत होती है; प्रेम हमारी पहचान है।
इस पाठ में मैथ्यू हेनरी, अ্যাল्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संकलन विचारों का प्रयोग स्वाभाविक रूप से समाहित किया गया है, ताकि पाठक के लिए स्पष्ट और प्रैक्टिकल समझ बने। "जैसा पिता ने मुझसे प्रेम रखा, वैसे ही मैंने तुम से प्रेम रखा" का संदेश यीशु की दिव्यता और अब भी जीवित प्रेम का प्रत्यक्ष अनुभव कराता है।