Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 15:1 यूहन्ना 15:2 यूहन्ना 15:3 यूहन्ना 15:4 यूहन्ना 15:5 यूहन्ना 15:6 यूहन्ना 15:7 यूहन्ना 15:8 यूहन्ना 15:9 यूहन्ना 15:10 यूहन्ना 15:11 यूहन्ना 15:12 यूहन्ना 15:13 यूहन्ना 15:14 यूहन्ना 15:15 यूहन्ना 15:16 यूहन्ना 15:17 यूहन्ना 15:18 यूहन्ना 15:19 यूहन्ना 15:20 यूहन्ना 15:21 यूहन्ना 15:22 यूहन्ना 15:23 यूहन्ना 15:24 यूहन्ना 15:25 यूहन्ना 15:26 यूहन्ना 15:27



यूहन्ना 15:16 — तुम्हें मैंने चुना है और ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ
आख्यान के तुरंत प्रसंग में यीशु अपने शिष्यों से कह रहे हैं कि उन्होंने उन्हें संसार से नहीं चुना, बल्कि वे स्वयं चुने गए हैं ताकि वे फल लाएं और उसका फल बना रहे। यह आवाज़ उद्धार के उद्देश्य को केंद्र में लाती है: दोस्ती, आशीर्वाद और सेवा को निरंतर फल देना, जो पिता के नाम से माँगे जाने वाले की मांग के अनुरूप हो।
इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या स्पष्ट होता है
यह छवि सज़ग करती है कि ईश्वर का प्रचार और प्रभाव पहले से चुने जाने वाले लोगों के लिए है—न कि मनुष्य की स्वेच्छा से। पिता द्वारा चयन और व्यवस्था, विश्वास के जीवन की प्रेरणा बनते हैं: उससे जुड़ाव एक स्थिर उद्देश्य देता है—प्राप्त करना, बढ़ना और ईश्वर की महिमा के लिए फलों को बढ़ना। यीशु यह भी संकेत करते हैं कि उनके नाम से माँगा गया कुछ भी पिता देता है, जो आत्मिक जीवन के फल के साथ जुड़ा है।
महत्वपूर्ण शब्दों व चित्रों की व्याख्या
संबंधित बाइबिल भाष्य के संकेत
• मैथ्यू हेनरी के अनुसार, चुने जाने का आशय यीशु के साथ निकट निर्भरता और प्रेम-निष्ठा के फल हैं; यह दायित्व बनाते हैं कि शिष्य उनके नाम से माँगे, ताकि परमेश्वर की इच्छा पूर्ण हो सके। “God’s appointment of them to be His ambassadors” (जनरल विचार).
• अॅल्बर्ट बार्न्स बताते हैं कि “तुम मुझे नहीं चुना” का तात्पर्य यह है कि शिष्य ईश्वर के कारण विश्वासी बनते हैं, और यह चयन स्वतः सेवा-उद्देश्य के साथ जुड़ा रहता है—फलों के द्वारा वे अपने जीवन को परमेश्वर की योजना में बनाते हैं।
• एडम क्लार्क कहते हैं कि यह वाक्य शिष्यत्व की निजी बुलाहट को दर्शाता है—ताकि वे यीशु के साथ गहरे सम्बन्ध और फल-उत्पादन द्वारा पिता के नाम की महिमा करें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त) और उनका संज्ञान
• यूहन् 6:44 — पिता जो मुझे भेजता है, वह मुझे खींचकर लाता है; यह चयन के पीछे आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाता है।
• मत्ती 28:19-20 — प्रेरितों के मिशन में फल लाने का उद्देश्य—जीवित प्रेरणा के साथ संसार में फैलना।
• यूहन्ना 17:6 — पिता ने जो मुझे दिया है, वे लोग जिन्हें मैंने दिए हैं, उनका परिचय देता है कि उन्होंने सत्य को पहचाना है।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
– आप जीवन के हर क्षेत्र में फल के दृष्टिकोण से अपनी राह तय करें: प्रेम, संतोष, और सेवाभाव के फल जो परमेश्वर के नाम को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।
– दुख या कठिनाई में भी यह स्मरण रखें कि ईश्वर ने आपको चुना है ताकि आप आस्था में स्थिर रहें और वह कर सके जो आपके जीवन में उसका उद्देश्य है।
– Pray में हर दिन ऐसा अनुरोध करें: “हे प्रभु, मेरे जीवन में जो फलों की वृद्धि हो, वही मेरे परिवार, मित्रों और समाज के लिए आशीष बने।”
छोटी सूची—फल के वास्तविक क्षेत्र:
नोट: उपरोक्त टिप्पणी में मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से संक्षिप्त सन्निवेश शामिल है; आवश्यकता पड़ने पर उनके प्रकाशित विचारों के उद्धरण में स्पष्ट संकेत दिए जाते हैं।