Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 15:1 यूहन्ना 15:2 यूहन्ना 15:3 यूहन्ना 15:4 यूहन्ना 15:5 यूहन्ना 15:6 यूहन्ना 15:7 यूहन्ना 15:8 यूहन्ना 15:9 यूहन्ना 15:10 यूहन्ना 15:11 यूहन्ना 15:12 यूहन्ना 15:13 यूहन्ना 15:14 यूहन्ना 15:15 यूहन्ना 15:16 यूहन्ना 15:17 यूहन्ना 15:18 यूहन्ना 15:19 यूहन्ना 15:20 यूहन्ना 15:21 यूहन्ना 15:22 यूहन्ना 15:23 यूहन्ना 15:24 यूहन्ना 15:25 यूहन्ना 15:26 यूहन्ना 15:27



मुख्य अभिलक्षण: ईश्वर के नाम के कारण प्रतिकूलता में विश्वासयोग्यता
यूहन्ना 15:21 में यीशु ईसवीय समर्थनों के कारण शिष्य समुदाय को सचेत करते हैं कि वे उनके नाम के कारण ही সुकृतियाँ और खतरे पायेंगे। उनका संदेश है कि जिस अवसर पर उनके भेजने वाले को न पहचाना जाए, उसी समय गवाहियाँ, उपहास और दुराचार सामने आ सकता है। यह वाक्य शिष्य-जीवन में जागरूकता और धैर्य की मांग करता है: अगर संसार हमारे कारण हमला करता है तो वह Jesus के भेजने वाले को नहीं जानते होने के कारण है।
साहित्यिक संदर्भ के अनुसार पवित्र पाठ का चित्रण
यह वाक्य जुदा-उत्पादन नहीं है, बल्कि यीशु के नेत्रित प्रेम, तटस्थता और सत्य की रक्षा के नाते है। शिष्य यीशु के दृष्टिकोण से विचलित नहीं होते, बल्कि हर प्रकार के विरोध का सामना करते समय एक नया दृष्टिकोण अपनाते हैं—क्योंकि वे जिसे जानते हैं वही उद्देश्य है। इस वाक्य में विश्व के साथ पृथक, सांसारिक उलझनों के बीच शिष्यत्व की सच्ची पहचान को रेखांकित किया गया है: वे मेरे नाम के कारण ही सतर्क रहें, क्योंकि वे मेरे भेजनेवाले को नहीं जानते।
जातीय-धार्मिक और theological significance
यह कथन परमेश्वर के पुत्र के भेजे जाने की पहचान और उन पर विश्वास की मांग को दर्शाता है। apostolic testimony में जो विरोध आता है, वह केवल यीशु के नाम के कारण आता है—जो प्रभु के प्रतिनिधि के रूप में उनकी पहचान पर प्रश्न खड़ा करता है। इसलिए विश्वासियों के लिए यह आग्रह है: संसार की नज़रों में अस्वीकृति से डरना नहीं, बल्कि सत्य की गवाही को दृढ़ता के साथ रखना।
अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकारों के संकलन से संकेत
मैथ्यू हेनरी और एडम क्लार्क के पारिवारिक अंशों में यह संकेत मिलता है कि शिष्य सभी प्रकार के विरोधों का सामना करते समय भी प्रभु के नाम की महिमा के लिए खड़े रहे। उनके विचारों के अनुसार, अगर संसार हमारे कारण दण्डित होता है, तो वह उस कारण से है कि वे यीशु के संदेश और उसके भेजे जाने की वास्तविकता को नहीं समझते।
इन पंक्तियों के साथ प्राचीन टिप्पणीकारों के संकेत—जिन्होंने यह दर्शाया कि शिष्यत्व में किस प्रकार की निर्भयता और धैर्य अपेक्षित है—हमारी योजना में संगठित रूप से समाहित होते हैं, ताकि लेखन एकीकृत और सुसंगत बने।
क्या कहे उत्तरदायित्वपूर्ण प्रश्न?
Cross-reference विचार
- मत्ती 10:22: विश्व की प्रताड़नाओं के संदर्भ में धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता। यह बताता है कि शिष्य कैसे endure करे जब संसार उन्हें दोषी ठहराए।
- यूहन्ना 16:3: अज्ञान के कारण लोग यीशु और उसके भेजनेवाले को नहीं जान पाते, और इसलिए वे प्रबल विरोध दिखाते हैं।
- एफेसियों 6:19-20: सुसमाचार की गवाही के लिए प्रेरणा और साहस की प्रार्थना, ताकि परमेश्वर का संदेश निर्भीकता से कहा जाए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह शास्त्रीय वाक्य हमें याद दिलाता है कि शिष्यत्व इस दुनिया के मानदंडों से ऊपर है। संसार अगर हमारे कारण प्रताड़ित भी करे, तो कारण वही है—हम यीशु के नाम के साथ उसे प्रकट करते हैं, क्योंकि वे उसके भेजनेवाले को नहीं जानते। धैर्य, सत्य की गवाही, और प्रेमपूर्ण निर्वाह हमारी सबसे बड़ी सहायता बन जाती है।