Old Testament
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2 पतरस 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उसमें बने रहते हो, तो भी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूँगा।
2 पतरस 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 यूहन्ना 2:21 (HINIRV) »
मैंने तुम्हें इसलिए नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिए, कि तुम उसे जानते हो, और इसलिए कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं।

रोमियों 15:14 (HINIRV) »
हे मेरे भाइयों; मैं आप भी तुम्हारे विषय में निश्चय जानता हूँ, कि तुम भी आप ही भलाई से भरे और ईश्वरीय ज्ञान से भरपूर हो और एक दूसरे को समझा सकते हो।

फिलिप्पियों 3:1 (HINIRV) »
इसलिए हे मेरे भाइयों, प्रभु में आनन्दित रहो*। वे ही बातें तुम को बार-बार लिखने में मुझे तो कोई कष्ट नहीं होता, और इसमें तुम्हारी कुशलता है।
मुख्य बिंदु
2 पतरस 1:12 में प्रेरित पतरस स्पष्ट कहते हैं कि धारणा और प्रेरणा के सत्य वचनों के बारे में हमें यथार्थ ज्ञान है, फिर भी वे क्रिया-व्यवहार में बने रहने, प्रचारित सचेत सतर्कता के लिए सदा तैयार रहते हैं। यह शिक्षार्थी को स्थायित्व और निरंतर चौकसी का संदेश देता है: आध्यात्मिक वृद्धि तभी मान्य होती है जब हम वादे के अनुसार कर्म में उद्धृत सत्य को व्यवहार में बाँधते हैं।
साहित्यिक संदर्भ (Literary Context)
यह श्लोक पतरस द्वितीय की पहली अध्याय की पंक्तियों का भाग है, जहाँ वह उज्जवल गुणों की सूची देता है—विश्वास, धर्म, संयम, ज्ञान, विवेक, धैर्य, भक्ति, प्रेम—और बताता है कि ये गुण हमारे भीतर कैसे फलित होते हैं। पतरस का लक्ष्य है कि विश्वासी अपने अनुभव-सत्य के साथ पूर्णता की ओर बढ़ते रहें, ताकि विश्वास में दृढ़ता बनी रहे।
धार्मिक-तत्व (Theological Significance)
पतरस स्वीकार करते हैं कि जो सत्य वचन मिला है, वह हमारे विश्वास का आधार है। वे कहते हैं कि ज्ञान और अनुभव के साथ सतत बने रहना परमेश्वर की बुलाहट है—यानि यह नितांत व्यक्तिगत संचय नहीं, बल्कि समुदायिक और क्रियात्मक सुधार की दिशा है। यह शिष्यत्व की जीवित प्रकृति को दर्शाता है कि ज्ञान निष्क्रिय नहीं रहता, वह कार्यशील हो उठता है।
Cross-reference संबंध (Cross references)
व्यावहारिक संबंधों में: पतरस का आग्रह है कि ज्ञान और अनुभव सम्बन्धी सतर्कता से जीवनभर के पथ पर चलते रहें—ताकि विश्वास न डगमगाए और न मिथ्या आशाओं से भ्रमित हो।
चिंतन के प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यदि तुम जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है उसमें बने रहते हो, तो भी पवित्रता की दिशा में सतत चेतना और तैयार रहना आवश्यक है। पतरस का संदेश है कि ज्ञान का स्थायित्व तब फल देता है जब वह व्यवहार में विकसित होता है। यह विश्वासियों को स्मरण कराता है कि सतत बनाए रखना ही जीवन की वास्तविक प्रगति है।
इतिहास-चर्चित उद्धरण (Public-domain insights)
यह विचार प्रेरित पतरस के संदेश से गहराई पाता है कि विश्वास के साथ कर्म और सतत बने रहने का सम्मिलन आवश्यक है। नीचे दिए गए सारांश नीचे की टिप्पणीकार-स्रोतों के समान दृष्टिकोणों के अनुरूप हैं:
“यद्यपि तुम ये बातें जानते हो... तो भी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूँगा”—यह वाक्यांश पतरस की निष्ठ और प्रेम-युक्त देखभाल को दर्शाता है कि वे शिष्यों के प्रति कितने समर्पित हैं।
सूत्र-संग्रह में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारियों के विचारों से संकेत मिला है कि वचन-धारण और कर्म-प्रयोग एक दूसरे के पूरक हैं, और जीवन-यात्रा में यह सतत सचेत रहने का आग्रह है।
नोट: विशेष उद्धरण के लिए उद्धृत डोमेन स्रोतों के क्लासिक पाठों के अनुसार संक्षिप्त स्वर में ही उपयोग किया गया है।