Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 1:7 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 1:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2 पतरस 1:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 12:10 (HINIRV) »
भाईचारे के प्रेम* से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।

1 थिस्सलुनीकियों 3:12 (HINIRV) »
और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए,

2 पतरस 1:7 — भक्ति, भाईचारा, प्रेम का क्रम
पवित्र पत्र 2 पतरस की पंक्तियाँ एक प्रेरक क्रम की ओर इशारा करती हैं: धर्मिता (भक्ति) से शुरू होकर भाईचारे और प्रेम तक पहुँचना, ताकि विश्वासी जीवन एक दृढ़, परस्परसमर्थक और अभिन्न प्रेम से भरा रहे। सुधरते चरित्र के लिए यह क्रम आवश्यक है। इस पद में विशेषकर भक्ति के परिणामस्वरूप एक सक्रिय भाईचारे की प्रीति और उसे बढ़ाने वाला प्रेम उद्धृत है।
मुख्य बात का संक्षेप
भक्ति से शुरू होकर भाईचारे की प्रीति आती है, और भाईचारे की प्रीति से प्रेम का विकसित होना परमेश्वर की वाणी में एक व्यवस्थित ईश्वर-आदेश है। यह केवल निजी पवित्रता नहीं है, बल्कि समुदाय के भीतर एक ऐसी जीवनचर्या है जिसमें एक दूसरे के साथ व्यवहार, सहानुभूति और सहयोग शामिल है।
मुख्य विषय
दो-तीन प्रमुख निष्कर्ष (Themes)
संदर्भ-पत्र (Cross-references) व उनके तात्पर्य
इन संदर्भों में दिखती है वही एकता और प्रेम की आंतरिक शक्ति—भक्ति से शुरू होकर प्रीति तक और फिर प्रेम में स्थिर रहते हुए समुदाय को मजबूत करना।
यथार्थ अनुप्रयोग (Practical Reflection)
आज के समुदाय में इसका अभ्यास कैसे हो?small steps से शुरू करें—रक्तपाती न हो, बल्कि पड़ोसी के लिए समय दें, आर्थिक सहायता दें, एक दूसरे के दुख-सुख में साथ दें। अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि एक सतत प्रेरणा जो रिश्तों को धारण करती है। यदि आप स्वयं में भक्ति को बढ़ाते हैं, तो आपके भीतर भाईचारे की प्रीति जड़ लेती है और प्रेम का प्रवाह स्वाभाविक बन जाता है।
संक्षिप्त समापन
2 पतरस 1:7 हमें याद दिलाता है कि एक संतुलित आध्यात्मिक जीवन तीन चरणों में मेल खाता है: भक्ति, भाईचारे की प्रीति, और प्रेम। यह क्रम नहीं टूटा चाहिए, क्योंकि हर चरण दूसरे को प्रेरित करता है और समुदाय के लिए स्थायित्व बनाता है।
पानीति टिप्पणी (Editorial Insights)
मथ्यू Henry, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रकाशनों में यह क्रम बार बार यही दिखाता है कि आंतरिक परिवर्तन कभी बाहरी व्यवहार से पृथक नहीं किया जा सकता। एक पवित्र जीवन एक सामाजिक उत्तरदायित्व भी बनता है। यदि भक्ति वास्तविक हो, तो भाईचारे के प्रति प्रीति और प्रेम सरल, स्वाभाविक और निरंतर बढ़ता है; वरना भक्ति दिखावे में सीमित रह जाएगी।
अनुदिष्ट उद्धरण: इस पंक्ति पर मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क की प्रत्यक्ष संपूर्ण पंक्तियाँ उद्धृत नहीं की गई हैं, पर उनके संयुक्त निष्कर्ष इस क्रम के वास्तविक प्रभाव और व्यवहारिक अनुप्रयोग के लिए उद्धरणों के अनुरूप हैं।