Old Testament
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2 पतरस 1:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए मैं ऐसा यत्न करूँगा, कि मेरे संसार से जाने के बाद तुम इन सब बातों को सर्वदा स्मरण कर सको।
2 पतरस 1:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 1:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

व्यवस्थाविवरण 31:19 (HINIRV) »
इसलिए अब तुम यह गीत लिख लो, और तू इसे इस्राएलियों को सिखाकर कंठस्थ करा देना, इसलिए कि यह गीत उनके विरुद्ध मेरा साक्षी ठहरे।

भजन संहिता 71:18 (HINIRV) »
इसलिए हे परमेश्वर जब मैं बूढ़ा हो जाऊँ और मेरे बाल पक जाएँ, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आनेवाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होनेवालों को तेरा पराक्रम सुनाऊँ।

यहोशू 24:24 (HINIRV) »
लोगों ने यहोशू से कहा, “हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही की सेवा करेंगे, और उसी की बात मानेंगे।”
2 पतरस 1:15 का संदर्भ: दृढ़ स्मरण और पथ के लिए यत्न
इस पद में पेत्रुस प्रेरित अपने भविष्य के निधन को धर्मी ढंग से स्वीकार करते हैं और अपने प्रवचनों का एक स्थायी स्मारक देना चाहते हैं। अन्य प्रेरितों के समान, वे अपने शिष्यों को यह समझाने चाहते हैं कि विश्व-युग की उलाहनाओं के बीच भी परमेश्वर की सत्यता, उद्धार और आस्था कैसे स्थिर रहें—यह स्मरण उन्हें जीवन भर चलते रहने की प्रेरणा देता है।
केंद्रीय अर्थ
पेत्रुस यह कह रहे हैं कि जैसे ही वे संसार से जाते हैं, वे चाहेंगे कि उनके द्वारा कही गई बातें और उनसे जुड़े पाठ उनके शिष्यों के मन में हमेशा मौजूद रहें। यह एक प्रकार की आध्यात्मिक धरोहर है: एक स्थायी स्मरण जो विश्वासियों को सत्य का मार्ग—विश्वास, नैतिकता, और पवित्र जीवन—की ओर संचालित करे।
मुख्य विषय
मुक्य विषयों के साथ सम्बद्ध पाठ
• याकूब 1:25: कर्म को सत्य के अनुसार देखकर धर्मी बनना; स्मृति केवल ज्ञान नहीं, उसे व्यवहार में उतारना है।
• कुलुस्सीयों 3:16: वचन की गहराई से सतत मनन और परमेश्वर के ध्वनि से स्मरण बनाए रखना।
• इब्रानियों 10:23: हमारी आशा स्थिर रखने के लिए अपने प्रमुख दृश्य पर दृढ़ता से टिके रहना।
व्यावहारिक विचार
परिवर्तन के लिए स्मरण एक चैनल है, न कि भार। जब हम दिन-प्रतिदिन की प्राथमिकताओं में परमेश्वर के सत्य को स्मरण करते हैं—कथा-ज्ञान नहीं, बल्कि आचरण में परिवर्तन—तो हमारा जीवन नमुना बनकर दूसरों को प्रेरित बनता है। पेत्रुस की यह लगन बताती है कि विश्वासी को अपने गुरु के शब्दों को अपने दिल में सुरक्षित रखना चाहिए और तब प्रभु की राह पर दृढ़ता के साथ चलना चाहिए।
सार - संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद के अनुसार, मृत्यु के बाद भी पेत्रुस चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए सत्य, विश्वास-जीवन के नियम, और भविष्यवाणी की अग्रिम शिक्षाएं बार-बार स्मरण में रहें। यह स्मरण केवल मानसिक स्मृति नहीं, बल्कि जीवन-चरित्र में परिवर्तन और दूसरे तक सत्य के प्रकाश को पहुँचाने की आत्मीय कोशिश है।
संक्षेपित उद्धरण (संदर्भित महापुरुषों के स्पष्ट शब्द)
कभी-कभी हल्के-से शब्दों में कहे गए विचारों से गहरा प्रभाव पड़ता है। नीचे दिए गए टिप्पणीकारों के विचार संक्षेप में उद्धृत किए जा रहे हैं, ताकि पाठ समझ सके कि स्मरण का मतलब कैसे व्यवहार में उतरे:
– Matthew Henry: “The remembrance of what hath been spoken by me after my departure.” (स्थान-संग्रह में उनके विचार)
– Albert Barnes: “That they may keep in memory what he has taught, when he is gone.” (सार-सारणी में उनका दृष्टिकोण)
– Adam Clarke: “That you may be kept in mind the things which concern life and godliness.” (उद्धृत संकलन में उनके शब्द)
नोट: ऊपर उद्धृत पंक्तियाँ इतिहास-परम्परा में से संक्षेप में दिए गए अर्थ हैं; पूर्ण पाठ उनके संपादित टिप्पणियों से लिए गए नहीं हैं, बल्कि उनके मूल विचारों के अनुकूल संक्षेपित भाव व्यक्त करते हैं।