Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 1:20 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 1:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर पहले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी की अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती।
2 पतरस 1:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 1:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 पतरस 3:3 (HINIRV) »
और यह पहले जान लो, कि अन्तिम दिनों में हँसी-उपहास करनेवाले आएँगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।

रोमियों 12:6 (HINIRV) »
और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न-भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिसको भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।

रोमियों 13:11 (HINIRV) »
और समय को पहचान कर ऐसा ही करो, इसलिए कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्योंकि जिस समय हमने विश्वास किया था, उस समय की तुलना से अब हमारा उद्धार निकट है।
2 पतरस 1:20 पर निष्कर्षक महत्त्व
इस पद के पीछे की सच्चाई यह है कि भविष्यवाणी का असली स्रोत मनुष्य के विचारधारा या निजी सोच नहीं हो सकती। पवित्रशास्त्र बताते हैं कि हर भविष्यद्वाणी ईश्वर के प्रेरणादत्त नियम के अनुसार है, और उसे मानवीय दृष्टिकोण से या व्यक्तिगत तर्क से बदलना नहीं चाहिए। यह विचार ईसाई विश्वास के भीतर साक्ष्य-आधारित परमेश्वर-आज्ञा की सुरक्षा को मजबूत करता है: परमेश्वर की भाषा मानव के भीतर उतरकर समय के साथ प्रकट होती है, न कि किसी एक व्यक्ति की मौलिक धारणा से बनती है।
पश्चिमी संदर्भ में मूल पाठ और प्रसंग
पहले पाठक यह देखते हैं कि पतरस अपने समय के शास्त्री-नक्श और भविष्यवाणी की प्रकृति पर सख्ती से चोट कर रहे हैं। वह कहता है कि भविष्यवाणी के सत्यापन के लिए उसे व्यक्ति-स्वामित्व या निजी अनुभव के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। Instead, it must be weighed against God's revelation and the testimony of Scripture as a whole. इस संदर्भ में पतरस स्वयंभू-पथ पर नहीं चलते; वे एक सामुदायिक मानक की चर्चा करते हैं जो सत्य-परमेश्वर के द्वारा स्थापित है।
मुख्य संदेश
कथित संदर्भों से सम्बन्ध
यह विचार अन्य बाइबल पाठों से संगति बनाता है:
कई विश्वसनीय चिह्न (Cross-References)
इन संदर्भों से समझ बढ़ती है कि कैसे भविष्यवाणी को परीक्षण के दायरे में लाया जाए:
इन उपदेशों से स्पष्ट होता है कि सूतर की जड़ परमेश्वर की प्रेरणा है, न मानवीय धारणा।
आन्तरिक व्यवहार पर प्रेरणा
2 पतरस 1:20 की प्रेरणा से प्रभु के लोगों को निम्न व्यवहार अपनाने चाहिए:
व्यावहारिक देवotional विचार
किसी भी भविष्यवाणी को सुनते समय खाली आश्वासन लेने के बजाय, अपने विवेक और साक्ष्य-आधारित प्रमाण की कसौटी से उसे परखें। परमेश्वर की आवाज़ आत्मा-प्रेरित उद्धार के संदेश की पवित्रता को बनाए रखने के लिए है, न कि मानव-निर्मित तर्कों की गुदगुदी के लिए। सतत प्रार्थना और पवित्र शास्त्र-समझ के साथ विश्वास बढ़ता है और भविष्योन्मुखीय आशीषों के लिए तैयार करता है।
संक्षिप्त विश्लेषण
इस पद का उद्देश्य यह याद दिलाना है कि बाइबल की भविष्यवाणियाँ मनुष्य की मौलिक धारणाओं पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि परमेश्वर की प्रेरणा पर आधारित होती हैं। इसलिए स्पष्ट परीक्षण, गुरु-भीतर का अनुशासन और शास्त्र-आनुषांगिकता अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (अनुमत स्रोत):
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विशिष्ट टिप्पणी-रेखाओं के शाब्दिक उद्धरण इस पाठ के लिए आवश्यक नहीं हैं; किन्तु उनके विचारात्मक मूल्य का अवलोकन नीचे समाहित है।