Old Testament
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2 पतरस 1:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि जिसमें ये बातें नहीं, वह अंधा है, और धुन्धला देखता है*, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2 पतरस 1:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 1:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 पतरस 2:18 (HINIRV) »
वे व्यर्थ घमण्ड की बातें कर करके लुचपन के कामों के द्वारा, उन लोगों को शारीरिक अभिलाषाओं में फँसा लेते हैं, जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं।

1 यूहन्ना 1:7 (HINIRV) »
पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं और उसके पुत्र यीशु मसीह का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। (यशा. 2:5)

शासनार्थक स्पष्ट अर्थ
2 पतरस 1:9 में कहा गया है कि जो यीशु के पालनहार बनकर भी इन गुणों से सम्पन्न नहीं होता, वह अंधा है, धुन्धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है। पवित्र जीवन के लिए आवश्यक गुणों का अभाव आत्म-ज्ञान की कमी को दिखाता है और नैतिक दिशाहीनता की ओर इशारा करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पतरस ने ख्रीस्तीय जीवन के लिए प्रेरक गुणों की सूची दी है—आत्म-निजी सुधार, विश्वास पर चरित्र की वृद्धि और चरित्र के फल। इस पद में वह स्पष्ट करता है कि यदि इनमें से किसी एक गुण का अभाव है, तो व्यक्ति अंधा, धुन्धला और पूर्वकाली पापों से अछूता होने का भ्रम पा सकता है। यह चेतावनी नहीं है कि असफलता से उद्धार घट सकता है, बल्कि यह संकेत है कि निरंतर वृद्धि के बिना आत्म-प्रकाश घटता है और व्यक्ति कमजोर आस्थाओं के साथ जीवन बिताता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफ़रेंसेज़
- याकूब 1:23-25 में कहा गया है कि कौन-कौन से लोग सत्य के अनुसार रहे, वे पथ के अनुसार अपने अनुभव को देखेंगे और ध्वस्त नहीं होंगे। यह पठनीय संदेश इस पंक्ति के अनुरूप है कि आचरण और ज्ञान का सही संयोजन ही पूर्ण जीवन देता है।
- 2 पतरस 3:18 में कहा गया है कि हम प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के ज्ञान में उच्चमता के साथ बढ़ते रहें; स्मरण रहे कि ज्ञान और उनके साथ आचरण का मेल ही स्थाई जीवन देता है।
- 1 योहन्ना 2:3-6 में यह स्पष्ट है कि जो उसके नियमों को मानता है, वह उसी के अनुसार चलता है और उसका जीवन प्रकाशित होता है। यह दर्शाता है कि धारणा और व्यवहार में संगति जरूरी है।
अनुशासनपूर्ण निष्कर्ष
निरंतर आत्म-उन्नति के लिए प्रेरणा चाहिए: विश्वास से गुणों की वृद्धि, नैतिक और आध्यात्मिक निर्णयों में स्पष्ट दृष्टि, और पाप से विमुख रहने की जागरूकता। अपने आप को नियमित रूप से नम्रता, प्रेम और सत्य की दिशा में आकार दें, ताकि आपके जीवन में प्रकाश बना रहे।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
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महत्त्वपूर्ण उद्धरण (उद्धरण स्पष्ट स्रोत के रूप में): “The neglected growth in grace makes men blind to spiritual realities.” (सार तत्व, Henry) — यह विचार इस पाठ की प्रेरणा को संक्षेप में व्यक्त करता है।