Old Testament
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2 पतरस 1:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
2 पतरस 1:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 1:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 8:28 (HINIRV) »
और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात् उन्हीं के लिये जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

1 पतरस 5:10 (HINIRV) »
अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुःख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्त करेगा*।

2 तीमुथियुस 1:9 (HINIRV) »
जिस ने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है; जो मसीह यीशु में अनादि काल से हम पर हुआ है।
2 पतरस 1:3 — सीधे तौर पर इसका अर्थ
यही वाक्य स्पष्ट करता है कि ईश्वर की शक्ति से ही हमारे जीवन के परम आवश्यक तत्व—जीवन, भक्ति और पवित्र चरित—प्राप्त होते हैं। यह कहना है कि हम जिसे पधार चुके बुलाव और महिमा के अनुसार जीवन पाते हैं, वह सब कुछ ईश्वर की क्षमता से आता है, न कि हमारी अपनी योग्यता से।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद 2 पतरस के लेख में प्रेरित पौलुस के नहीं, किन्तु प्रेरित पतरस के exhortation का हिस्सा है जहाँ वे विश्वस्नीयता और चरित्र-निर्माण के मार्ग पर ध्यान दिलाते हैं। वे कहते हैं कि ईश्वर ने हमें अपने महिमा और सद्गुणों के अनुसार बुलाकर सक्षम बनाया है ताकि हमारी आस्था कर्मों से पुष्ट हो सके। यह शाब्दिक रूप से ईश्वर के करुणा-पूर्ण आह्वान और शक्ति का संयुक्त परिणाम है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
अध्यायन के 2-3 संकेतक विचार
संबंधित पदों के संक्षिप्त संदर्भ और समझ
याकूब 1:17— हर अच्छा उपहार और हर उत्तम उपहार ऊपर से आता है; वह प्रकाश के स्रोत है; हमारी आध्यात्मिक बहुविधताएं उसी द्वारा प्रेरित होती हैं।
रोमियों 8:28— जिन्हें परमेश्वर अपने उद्देश्य के अनुसार बुलाता है, उनके लिए सब कुछ मिलकर भला करते हैं; यह भी ईश्वर की सामर्थ्य के अनुभव का भाग है।
इफिसियों 2:8-9— विश्वास के द्वारा उद्धार, न कि हमारे कामों से; यह भी दर्शाता है कि बुलावा और सामर्थ्य ईश्वर से आते हैं।
चर्चित टिप्पणीकारों के संक्षिप्त सार
हैंरी, बार्न्स और क्लार्क के विचार इन पंक्तियों में एक सामान्य धारा दिखाते हैं: ईश्वर की कृपा और शक्ति से हमारा नैतिक परिवर्तन संभव है; यह परिवर्तन हमारे आस्था-प्रकार को दृढ़ बनाता है और हमें लोक-जीवन में एक उच्च, पवित्र आचरण के लिए प्रेरित करता है।
मुख्य निष्कर्ष—संक्षेपित takeaway
ईश्वर ने अपनी सामर्थ्य से हमें वह दे दिया है जो जीवन-शैली और भक्ति के लिए आवश्यक है। यह बुलावा उसका है: हमारी पहचान उसकी महिमा के अनुसार है, और उसी के अनुरूप जीवन जीना ही वास्तविक भक्ति है।