Old Testament
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2 पतरस 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएँ, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह की पहचान में निकम्मे और निष्फल न होने देंगी।
2 पतरस 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यूहन्ना 15:2 (HINIRV) »
जो डाली मुझ में है*, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छाँटता है ताकि और फले।

कुलुस्सियों 3:16 (HINIRV) »
मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने-अपने मन में कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

तीतुस 3:14 (HINIRV) »
हमारे लोग भी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये अच्छे कामों में लगे रहना सीखें ताकि निष्फल न रहें।
मुख्य व्याख्या बिंदु
2 पतरस 1:8 बताता है कि यदि ईमानदार विश्वासियों के भीतर ये गुण सक्रिय और बढ़ते रहते हैं, तो वे मसीह यीशु की पहचान में निष्फल नहीं होंगे। यह वाक्य एक सतत विकास के दायरे की ओर इशारा करता है—आत्म-गुणों की वृद्धि से निजी जीवन में पवित्रता और विश्वसनीयता बढ़ती है, जो ईश्वर के सामने मसीह के अनुयायी होने की दृढ़ पहचान बनाती है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
पतरस के दूसरे अध्याय में, प्रेरित लेखन प्रेरित करता है कि विश्वास के साथ गुणों की वृद्धि होना चाहिए—यह शुद्धिकरण और आत्म-संयम का क्रम है। यदि ये गुण स्पष्ट रूप से जीवन में स्थिर रहते हैं और क्रमिक वृद्धि करते हैं, तो विश्वासी को प्रमाण मिलता है कि उसने अपने उद्धारकर्ता को पहचानना और उसकी राह पर चलना जारी रखा है।
धार्मिक महत्त्व
यह आयत हमें स्मरण कराती है कि केवल आस्था पर्याप्त नहीं है; आस्था के साथ दौड़ती हुई नैतिक वृद्धि ही वास्तविक पहचान दर्ज कराती है। ग़लतफहमी में नहीं, बल्कि biblically दृढ़ रहने के लिए गुणों की अभिवृद्धि चाहिए—विश्वास, आशा, प्रेम के साथ-साथ नैतिकता, ज्ञान, संयम, धैर्य और दृढ़ता।
बाइबिल के अन्य भागों से संयोग
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि गुणों की वृद्धि केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं है, बल्कि ईश्वर के काम और उद्धार की पूर्ण पहचान के लिए आवश्यक है।
गहराई से विचारें (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यदि ये पुण्य-गुण हमारे भीतर सचमुच स्थिर रहते हैं और निरंतर बढ़ते हैं, तो हम मसीह यीशु की पहचान में निष्फल नहीं होते। यह एक प्रेरणा है कि विश्वास के साथ स्पष्ट, दृढ़ और पवित्र जीवन बनना चाहिए, ताकि हमारा आचरण ईश्वर की महिमा को उजागर करे और उद्धार की वास्तविक पुष्टि दे।
संदर्भ उद्धरण (संदर्भित विचार)
एमैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरणा मिलती है, जो पवित्र आत्मा के फल और जीवन के गुणों की वृद्धि पर जोर देते हैं।
संयोगित बाइबल मार्ग (Cross-references) संक्षेप
रोमियों 12:2; गलती 5:22-23; याकूब 1:4 — ये तीनों संदर्भ बताते हैं कि आस्था के साथ नैतिक और आध्यात्मिक गुणों की वृद्धि ईश्वर के लक्ष्य तक पहुँचाती है और मसीह की पहचान में स्थायित्व बनाती है।